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खंभे, न तार फिर भी बिल आ रहे सरकार
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Sat, 25 Apr 2015 12:05 AM IST
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जिले की तस्वीर बदलने का दावा करने वाले प्रदेश सरकार की नजर शायद इस गांव की ओर आज तक नहीं गई। यह गांव है तारमऊ गढ़ी। यहां चौतरफा समस्याओं का अंबार लगा है। आवागमन के लिए मुख्य रास्ते पर जलभराव है। ग्रामीणों के घर बिजली के बिल हर माह आ रहे हैं। लेकिन गांव में बिजली के खंभे नहीं लगे हैं। मजबूरी में ट्यूबवेल लाइन को रखे गए ट्रांसफार्मर से कई सौ मीटर लंबी केबिल खींचकर लोग बिजली सुविधा का लाभ ले रहे हैं। गरीब पेंशन और आवास के लिए भी परेशान हैं।
ग्रामीण रामप्रसाद, पंकज पाल, सुनील ने बताया कि कई वर्ष पहले कनेक्शन कराए थे। तब जल्दी ही खंभे गाड़कर बिजली आपूर्ति पहुंचाने का दावा किया गया था। पर ऐसा नहीं हुआ। बिल लगातार हर महीने आने लगे। कई बार मांग की गई पर बहाने बनाकर टाल दिया गया। कोई दूसरा तरीका न सूझने पर गांव वालों ने जगह-जगह लकड़ी की बल्ली के सहारे 300 से 400 मीटर लंबी केबिल ट्यूबवेल लाइन के लिए रखे ट्रांसफार्मर से जोड़ ली। बीते कई सालों से ऐसे ही बिजली मिल रही है।
मनोज कटियार ने बताया कि जीटी रोड से गांव तक आने वाला दो किमी लंबा मुख्य रास्ता जर्जर है। कई सालों से इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है। गांव में जगह-जगह पानी भरा है व गिट्टी उखड़ी है। जल निकासी के लिए रोड किनारे नालियां नहीं बनवाई गई हैं। ऊषा ने बताया कि भूमिहीन गरीब होने के बावजूद झोपड़ी में गुजर-बसर करती हैं।
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प्रधान, सचिव व ब्लाक में मांग की पर आवास नहीं मिला क्योंकि उसके पास सुविधाशुल्क देने के लिए रुपये नहीं हैं। सोनू पाल, संदीप पाल ने बताया कि खेलने के लिए कोई मैदान नहीं है। खेलकूद की योजनाओं का धेलाभर भी लाभ उनके गांव को नहीं मिला।
ऊषा, अनामिका, मीना, लक्ष्मी, रामबेटी, गीता, पुष्पलता, रामसिया, दिव्या, सुशीला ने बताया कि उन्हें महामाया पेंशन मिलती थी, जिसे बंद कर दिया गया। समाजवादी पेंशन में महीनों चक्कर काटे पर उनका चयन नहीं किया गया। दलालों ने एक-एक हजार रुपये लेकर अपात्रों को पेंशन दिला दी है, जबकि गरीब वंचित हो गए। अब न अफसर सुन रहे और न ही नेता।
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फोटो 9- अशोक कटियार
गांव के अंदर जल निकासी की व्यवस्था चौपट है। कई दशक पहले बिछाया गया खड़ंजा ऊबड़-खाबड़ हो गया है। मांग करने के बावजूद मरम्मत नहीं कराई जा रही है। वहीं नाली न बनी होने के कारण गंदा पानी अक्सर घरों में घुसता है।
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फोटो 10- रजनीश कटियार
गांव में चौतरफा गंदगी फैली है क्योंकि सफाई कर्मचारी कामचोरी करता है। शिकायत करने पर कभी-कभार एक-दो बच्चों को भेजकर खानापूरी कर देता है। गांव वाले कूड़े के ढेर, बजबजाती नालियों व जलभराव से उठती दुर्गंध के बीच रहने को विवश हैं।
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11- पंकज कटियार
ॎ गांव के अंदर विद्युतीकरण कराने की मांग कई बार नेताओं से की गई। अफसरों को जिला मुख्यालय जाकर शिकायती पत्र दिए पर हुआ कुछ भी नहीं। गांव के लोग बिल अदा कर रहे हैं पर बिजली विभाग सुध नहीं ले रहा। पूरे गांव में केबिलों का जाल फैला है। इससे हादसा होने का खतरा मंडराता रहता है।
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12- भइयालाल
ॎ इंदिरा आवास आवंटन में धांधली होती है। गरीब ताकते रह जाते हैं, जबकि सुविधाशुल्क देने वाले आवास पा जाते हैं। वह भूमिहीन है। रहने के लिए उसके पास सुरक्षित घर नहीं है। आवास के लिए गुहार लगाई पर उसकी समस्या का समाधान किसी ने भी नहीं कराया।
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हो कोई समस्या तो हमें बताएं
अगर आपकी कोई समस्या है तो आप हमें 9675890054, 8954893156, 9536901648 पर दोपहर 1:00 से 3:00 बजे के बीच काल करके बताएं। हम समस्याओं को प्रकाशित करके अफसरों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।
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ग्रामीण रामप्रसाद, पंकज पाल, सुनील ने बताया कि कई वर्ष पहले कनेक्शन कराए थे। तब जल्दी ही खंभे गाड़कर बिजली आपूर्ति पहुंचाने का दावा किया गया था। पर ऐसा नहीं हुआ। बिल लगातार हर महीने आने लगे। कई बार मांग की गई पर बहाने बनाकर टाल दिया गया। कोई दूसरा तरीका न सूझने पर गांव वालों ने जगह-जगह लकड़ी की बल्ली के सहारे 300 से 400 मीटर लंबी केबिल ट्यूबवेल लाइन के लिए रखे ट्रांसफार्मर से जोड़ ली। बीते कई सालों से ऐसे ही बिजली मिल रही है।
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मनोज कटियार ने बताया कि जीटी रोड से गांव तक आने वाला दो किमी लंबा मुख्य रास्ता जर्जर है। कई सालों से इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है। गांव में जगह-जगह पानी भरा है व गिट्टी उखड़ी है। जल निकासी के लिए रोड किनारे नालियां नहीं बनवाई गई हैं। ऊषा ने बताया कि भूमिहीन गरीब होने के बावजूद झोपड़ी में गुजर-बसर करती हैं।
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प्रधान, सचिव व ब्लाक में मांग की पर आवास नहीं मिला क्योंकि उसके पास सुविधाशुल्क देने के लिए रुपये नहीं हैं। सोनू पाल, संदीप पाल ने बताया कि खेलने के लिए कोई मैदान नहीं है। खेलकूद की योजनाओं का धेलाभर भी लाभ उनके गांव को नहीं मिला।
ऊषा, अनामिका, मीना, लक्ष्मी, रामबेटी, गीता, पुष्पलता, रामसिया, दिव्या, सुशीला ने बताया कि उन्हें महामाया पेंशन मिलती थी, जिसे बंद कर दिया गया। समाजवादी पेंशन में महीनों चक्कर काटे पर उनका चयन नहीं किया गया। दलालों ने एक-एक हजार रुपये लेकर अपात्रों को पेंशन दिला दी है, जबकि गरीब वंचित हो गए। अब न अफसर सुन रहे और न ही नेता।
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फोटो 9- अशोक कटियार
गांव के अंदर जल निकासी की व्यवस्था चौपट है। कई दशक पहले बिछाया गया खड़ंजा ऊबड़-खाबड़ हो गया है। मांग करने के बावजूद मरम्मत नहीं कराई जा रही है। वहीं नाली न बनी होने के कारण गंदा पानी अक्सर घरों में घुसता है।
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फोटो 10- रजनीश कटियार
गांव में चौतरफा गंदगी फैली है क्योंकि सफाई कर्मचारी कामचोरी करता है। शिकायत करने पर कभी-कभार एक-दो बच्चों को भेजकर खानापूरी कर देता है। गांव वाले कूड़े के ढेर, बजबजाती नालियों व जलभराव से उठती दुर्गंध के बीच रहने को विवश हैं।
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11- पंकज कटियार
ॎ गांव के अंदर विद्युतीकरण कराने की मांग कई बार नेताओं से की गई। अफसरों को जिला मुख्यालय जाकर शिकायती पत्र दिए पर हुआ कुछ भी नहीं। गांव के लोग बिल अदा कर रहे हैं पर बिजली विभाग सुध नहीं ले रहा। पूरे गांव में केबिलों का जाल फैला है। इससे हादसा होने का खतरा मंडराता रहता है।
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12- भइयालाल
ॎ इंदिरा आवास आवंटन में धांधली होती है। गरीब ताकते रह जाते हैं, जबकि सुविधाशुल्क देने वाले आवास पा जाते हैं। वह भूमिहीन है। रहने के लिए उसके पास सुरक्षित घर नहीं है। आवास के लिए गुहार लगाई पर उसकी समस्या का समाधान किसी ने भी नहीं कराया।
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अगर आपकी कोई समस्या है तो आप हमें 9675890054, 8954893156, 9536901648 पर दोपहर 1:00 से 3:00 बजे के बीच काल करके बताएं। हम समस्याओं को प्रकाशित करके अफसरों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।