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विजय दुबे हत्याकांड: एक आरोपी के खिलाफ अभी भी चल रही सुनवाई
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छिबरामऊ। 21 साल पहले हुआ सिकंदरपुर के बहुचर्चित विजय दुबे हत्याकांड में नामजद किए गए आठ आरोपियों में से दो की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। शेष बचे छह आरोपियों में पांच को बुधवार को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुना दी है। हत्याकांड में नामजद किए गए फौजी के खिलाफ सुनवाई अभी तक जारी है।
बता दें कि 26 अक्तूबर 2003 को सिकंदरपुर निवासी राजीव पांडेय उर्फ पप्पू, मनीष दीक्षित, पंकज सिंह, सुनील सिंह, विपिन बिहारी दीक्षित, रामचंद्र शर्मा, विनय शर्मा, लला तिवारी ने लाठी डंडों व असलहों से लैस होकर पड़ोस के विजय दुबे के घर पर धावा बोल दिया था। फायरिंग में गोली लगने से विजय दुबे की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनके भाई सुरेश दुबे, रवींद्र दुबे को तमंचों की बटों व हाकियों से मारपीट कर घायल कर दिया था। उसी दौरान रास्ते से गुजर रहे मुन्ना के साथ ही भी मारपीट की थी। सुरेश दुबे की तहरीर पर पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर डाॅ. रामचंद्र शर्मा व विनय शर्मा को उसी दिन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि अन्य सभी आरोपी फरार हो गए थे। बाद में सभी ने न्यायालय में सरेंडर किया था। 21 साल तक चली मुकदमे की सुनवाई में छह नवंबर को हत्यारोपी राजीव कुमार पांडेय, मनीष कुमार दीक्षित, सुनील सिंह, विपिन बिहारी दीक्षित, विनय शर्मा व लला तिवारी को आजीवन कारावास की सुनाते हुए जेल भिजवा दिया है। हत्याकांड के मामले में नामजद डॉ. रामचंद्र शर्मा की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है।
इनसेट
सेना में नौकरी करता था आरोपी पंकज सिंह
वादी सुरेश दुबे ने बताया कि इसी मामले में नामजद पंकज सिंह सेना में तैनात था। दीपावली पर छुट्टी लेकर घर आया था। दीपावली की प्रतिपदा पर हुए हत्याकांड के बाद फरार हुए साथियों के साथ वह भी मौके से भाग गया था। सूत्रों की मानें तो वह भागकर अपने तैनाती स्थल पर पहुंचकर ज्वाइनिंग ले ली थी। उसने उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया और पुलिस का आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल होने से पहले अग्रिम जमानत करा ली। जमानत मिलने पर पुलिस ने आरोप पत्र से उसका नाम फाइल से हटा दिया। उसकी सुनवाई के लिए अलग फाइल तैयार की गई, जिसकी सुनवाई अभी तक चल रही है, जिसका निर्णय अभी भविष्य के गर्भ में है।
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बता दें कि 26 अक्तूबर 2003 को सिकंदरपुर निवासी राजीव पांडेय उर्फ पप्पू, मनीष दीक्षित, पंकज सिंह, सुनील सिंह, विपिन बिहारी दीक्षित, रामचंद्र शर्मा, विनय शर्मा, लला तिवारी ने लाठी डंडों व असलहों से लैस होकर पड़ोस के विजय दुबे के घर पर धावा बोल दिया था। फायरिंग में गोली लगने से विजय दुबे की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनके भाई सुरेश दुबे, रवींद्र दुबे को तमंचों की बटों व हाकियों से मारपीट कर घायल कर दिया था। उसी दौरान रास्ते से गुजर रहे मुन्ना के साथ ही भी मारपीट की थी। सुरेश दुबे की तहरीर पर पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर डाॅ. रामचंद्र शर्मा व विनय शर्मा को उसी दिन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि अन्य सभी आरोपी फरार हो गए थे। बाद में सभी ने न्यायालय में सरेंडर किया था। 21 साल तक चली मुकदमे की सुनवाई में छह नवंबर को हत्यारोपी राजीव कुमार पांडेय, मनीष कुमार दीक्षित, सुनील सिंह, विपिन बिहारी दीक्षित, विनय शर्मा व लला तिवारी को आजीवन कारावास की सुनाते हुए जेल भिजवा दिया है। हत्याकांड के मामले में नामजद डॉ. रामचंद्र शर्मा की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है।
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सेना में नौकरी करता था आरोपी पंकज सिंह
वादी सुरेश दुबे ने बताया कि इसी मामले में नामजद पंकज सिंह सेना में तैनात था। दीपावली पर छुट्टी लेकर घर आया था। दीपावली की प्रतिपदा पर हुए हत्याकांड के बाद फरार हुए साथियों के साथ वह भी मौके से भाग गया था। सूत्रों की मानें तो वह भागकर अपने तैनाती स्थल पर पहुंचकर ज्वाइनिंग ले ली थी। उसने उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया और पुलिस का आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल होने से पहले अग्रिम जमानत करा ली। जमानत मिलने पर पुलिस ने आरोप पत्र से उसका नाम फाइल से हटा दिया। उसकी सुनवाई के लिए अलग फाइल तैयार की गई, जिसकी सुनवाई अभी तक चल रही है, जिसका निर्णय अभी भविष्य के गर्भ में है।
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