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उन्नत प्रजातियों के सुगंधित पौधों से मालामाल होंगे किसान
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गुलाब के पौधे देखता किसान।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। जिले के किसान अब उन्नत प्रजातियों के सुगंधित पौधों की खेती कर मालामाल होंगे। इत्र कारोबार में फूलों की खपत ज्यादा होने से सीमैप लखनऊ ने एफएफडीसी के सहयोग से हाइब्रिड प्रजाति के उन्नत बीजों से फूलों की खेती कराने का फैसला लिया है। अभी करीब 670 हेक्टेयर में फूलों की खेती होती है। दोनों संस्थानों की साझा कोशिशों से रकबा तकरीबन दोगुना हो जाएगा।
जिला मुख्यालय के आसपास के गांवों में करीब 670 हेक्टेयर में गुलाब, बेला, गेंदा और मेहंदी की खेती की जाती है। 500 के करीब किसान परिवार फूलों की खेती से जुड़े हैं। तकरीबन 30 हेक्टेयर में गुलाब की खेती होती है। बाकी में अन्य फूलों की खेती होती है। कारोबारी किसानों से फूल खरीद कर इत्र तैयार करते हैं। जिले में फूलों की खपत ज्यादा होने से प्रदेश सरकार की पहल पर सीमैप (केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान) लखनऊ ने एफएफडीसी (सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र) के सहयोग से हाइब्रिड प्रजाति के उन्नत बीजों से फूलों की खेती कराने का फैसला लिया है। सीमैप के वैज्ञानिकों का फोकस सूखी, जलभराव और ऊसर जमीन पर खेती कराने पर रहेगा। एफएफडीसी के प्रधान निदेशक डॉ. शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि जिले में उन्नति प्रजाति के फूलों की खेती कराने के लिए किसानों और इत्र कारोबारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
करीब 150 क्विंटल फूलों की रोजाना होती खपत
शहर में छोटे-बड़े 300 इत्र कारखाने हैं। इत्र एवं अतर एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी ने बताया कि शहर के इत्र कारखानों में रोजाना करीब 150 क्विंटल फूलों की खपत होती है। बारिश में खपत का दायरा तीन गुना हो जाता है।
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कम देखभाल और लागत से किसानों की आय दोगुनी होगी
एफएफडीसी के निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि हाइब्रिड पौधों का कद छोटा होगा। फूल ज्यादा आएंगे। कम देखभाल और लागत से किसानों की आय दोगुनी होगी। इनसे ज्यादा इत्र मिलेगा। कारोबारियों को भी मुनाफा होगा। ज्यादा कमाई से फूलों की खेती करने वाले किसानों की संख्या भी बढ़ेगी।
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जिला मुख्यालय के आसपास के गांवों में करीब 670 हेक्टेयर में गुलाब, बेला, गेंदा और मेहंदी की खेती की जाती है। 500 के करीब किसान परिवार फूलों की खेती से जुड़े हैं। तकरीबन 30 हेक्टेयर में गुलाब की खेती होती है। बाकी में अन्य फूलों की खेती होती है। कारोबारी किसानों से फूल खरीद कर इत्र तैयार करते हैं। जिले में फूलों की खपत ज्यादा होने से प्रदेश सरकार की पहल पर सीमैप (केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान) लखनऊ ने एफएफडीसी (सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र) के सहयोग से हाइब्रिड प्रजाति के उन्नत बीजों से फूलों की खेती कराने का फैसला लिया है। सीमैप के वैज्ञानिकों का फोकस सूखी, जलभराव और ऊसर जमीन पर खेती कराने पर रहेगा। एफएफडीसी के प्रधान निदेशक डॉ. शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि जिले में उन्नति प्रजाति के फूलों की खेती कराने के लिए किसानों और इत्र कारोबारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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करीब 150 क्विंटल फूलों की रोजाना होती खपत
शहर में छोटे-बड़े 300 इत्र कारखाने हैं। इत्र एवं अतर एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी ने बताया कि शहर के इत्र कारखानों में रोजाना करीब 150 क्विंटल फूलों की खपत होती है। बारिश में खपत का दायरा तीन गुना हो जाता है।
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कम देखभाल और लागत से किसानों की आय दोगुनी होगी
एफएफडीसी के निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि हाइब्रिड पौधों का कद छोटा होगा। फूल ज्यादा आएंगे। कम देखभाल और लागत से किसानों की आय दोगुनी होगी। इनसे ज्यादा इत्र मिलेगा। कारोबारियों को भी मुनाफा होगा। ज्यादा कमाई से फूलों की खेती करने वाले किसानों की संख्या भी बढ़ेगी।