{"_id":"e05e2be42e3fc292de13aa84f19ec5ae","slug":"the-villagers-demanded-the-evacuation-route-in-highway-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्रामीणों ने हाइवे में मांगा निकासी मार्ग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्रामीणों ने हाइवे में मांगा निकासी मार्ग
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Wed, 20 May 2015 11:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्षेत्र के गांव सकरैनी के ग्रामीणों ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे में निकासी मार्ग दिए जाने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए हाइवे निर्माण में लगे डंपरों को रोककर काम ठप करा दिया। सूचना पर पहुंचे अफसरों ने ग्रामीणों को तीन दिन में समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिलाकर शांत कराया।
बुधवार सुबह करीब 8 बजे गांव सकरैनी की प्रधान गोमती देवी बिरियाहार, टिकुरियन, अंथरा के सैकड़ों ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंच गई। ग्रामीणों का कहना था कि उनके खेत हाइवे के दोनों ओर हैं। हाइवे निर्माण होने से दूसरी ओर जाने के लिए कई किमी का चक्कर लगाना पड़ेगा।
गांव सकरैनी के दक्षिण में बिरियाहार जाने वाले मार्ग पर निकासी के लिए अपरगामी पुलिया का निर्माण कराकर निकासी की व्यवस्था कराई जाए। इसके लिए कई बार अफसरों को अवगत कराया गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसी बात से आक्रोशित ग्रामीणों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान हाइवे के निर्माण में मिट्टी डाल रहे डंफरों को ग्रामीणों ने रुकवा लिया और मांग पूरी न होने तक काम रोकने की चेतावनी दी।
विज्ञापन
सर्किल के जेई मैक्यू जॉन ने प्रधान व ग्रामीणों वार्ता की और मामले से उच्च अफसरों को अवगत कराया। बाद में तीन दिन में समस्या का निस्तारण कराए जाने का भरोसा दिया। इस मौके पर बिरियाहार निवासी पातीराम, हरीराम, शिवनाथ, विश्वनाथ, होरीलाल, शंकरलाल, सकरैनी निवासी दयाराम, वेदप्रकाश, कमलेश, छुन्नूलाल, मोहनलाल सहित ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही।
हर काम के लिए कई किलोमीटर का चक्कर
गांव सकरैनी निवासी पूर्व प्रधान का कहना है कि हाइवे गांव के पास से निकला है। इसमें कई परिवारों की आवासीय भूमि अधिग्रहीत हुई है। हाइवे में निकासी का रास्ता न मिलने पर अपने खेतों पर पहुंचने के लिए अमोलर स्थित गुरसहायगंज-ताहपुर मार्ग से होकर जाना पड़ेगा। इससे करीब छह किमी रास्ता तय करना पड़ेगा।
सकरैनी निवासी राधेश्याम का कहना है कि गांव के सैकड़ों बच्चे एक किमी दूर बिरियाहार स्थित इंटर कालेज में पढ़ते हैं। निकासी का रास्ता न मिलने पर करीब सात किमी का चक्कर लगाकर स्कूल जाना पड़ेगा। सोमबाबू का कहना है अमोलर पीएचसी जाने के लिए करीब 5 किमी चक्कर लगाना पडे़गा।
हाइवे निर्माण में लगे अधिकारियों ने अभी मामला मेरे संज्ञान में नहीं लाया है। ग्रामीणों की जो भी समस्या है, उसका निस्तारण जल्द किया जाएगा। साथ ही काम को अवरुद्ध नहीं होने दिया जाएगा।
डीएम अनुज कुमार झा
विज्ञापन
बुधवार सुबह करीब 8 बजे गांव सकरैनी की प्रधान गोमती देवी बिरियाहार, टिकुरियन, अंथरा के सैकड़ों ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंच गई। ग्रामीणों का कहना था कि उनके खेत हाइवे के दोनों ओर हैं। हाइवे निर्माण होने से दूसरी ओर जाने के लिए कई किमी का चक्कर लगाना पड़ेगा।
विज्ञापन
गांव सकरैनी के दक्षिण में बिरियाहार जाने वाले मार्ग पर निकासी के लिए अपरगामी पुलिया का निर्माण कराकर निकासी की व्यवस्था कराई जाए। इसके लिए कई बार अफसरों को अवगत कराया गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसी बात से आक्रोशित ग्रामीणों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान हाइवे के निर्माण में मिट्टी डाल रहे डंफरों को ग्रामीणों ने रुकवा लिया और मांग पूरी न होने तक काम रोकने की चेतावनी दी।
विज्ञापन
सर्किल के जेई मैक्यू जॉन ने प्रधान व ग्रामीणों वार्ता की और मामले से उच्च अफसरों को अवगत कराया। बाद में तीन दिन में समस्या का निस्तारण कराए जाने का भरोसा दिया। इस मौके पर बिरियाहार निवासी पातीराम, हरीराम, शिवनाथ, विश्वनाथ, होरीलाल, शंकरलाल, सकरैनी निवासी दयाराम, वेदप्रकाश, कमलेश, छुन्नूलाल, मोहनलाल सहित ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही।
हर काम के लिए कई किलोमीटर का चक्कर
गांव सकरैनी निवासी पूर्व प्रधान का कहना है कि हाइवे गांव के पास से निकला है। इसमें कई परिवारों की आवासीय भूमि अधिग्रहीत हुई है। हाइवे में निकासी का रास्ता न मिलने पर अपने खेतों पर पहुंचने के लिए अमोलर स्थित गुरसहायगंज-ताहपुर मार्ग से होकर जाना पड़ेगा। इससे करीब छह किमी रास्ता तय करना पड़ेगा।
सकरैनी निवासी राधेश्याम का कहना है कि गांव के सैकड़ों बच्चे एक किमी दूर बिरियाहार स्थित इंटर कालेज में पढ़ते हैं। निकासी का रास्ता न मिलने पर करीब सात किमी का चक्कर लगाकर स्कूल जाना पड़ेगा। सोमबाबू का कहना है अमोलर पीएचसी जाने के लिए करीब 5 किमी चक्कर लगाना पडे़गा।
हाइवे निर्माण में लगे अधिकारियों ने अभी मामला मेरे संज्ञान में नहीं लाया है। ग्रामीणों की जो भी समस्या है, उसका निस्तारण जल्द किया जाएगा। साथ ही काम को अवरुद्ध नहीं होने दिया जाएगा।
डीएम अनुज कुमार झा