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प्रत्याशी की किस्मत लिखते ‘परदेसी’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Wed, 02 Dec 2015 12:00 AM IST
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ग्राम प्रधानी का चुनाव झोली में डालने के लिए
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उम्मीदवार कोई कसरत बाकी नहीं रखता है। जिले के अधिकांश ग्रामों में बड़ी
संख्या में लोग अपने परिवारों के साथ कई प्रदेशों में फैक्ट्री सहित अन्य
स्थानों पर नौकरी करके अपना भरण-पोषण करते हैं। इन परिवारों का वोट जो
उम्मीदवार अपनी ओर आकर्षित कर लेता है, उसकी जीत पक्की मानी जाती है।
जिले में ग्रामीण क्षेत्र की हुई जनगणना में करीब 12 लाख से अधिक की आबादी निवास करती हैं। इसमें परदेस में रहने वाले ग्रामीणों का प्रधान पद की सीट के परिणाम पर खासा दखल रहता है। होशियार उम्मीदवार इन परिवारों की पूरी संख्या का बही खाता पहले ही बना लेते हैं, ताकि इन वोटरों के जरिए अपनी सीट की नैया को पार लगाया जा सके।
इन वोटरों की उम्मीदवार पूरी खिदमत भी करते हैं। मतदाताओं को परदेस से बुलाने के लिए आने व जाने का पूरा खर्चा भी देते हैं। माना जाता है कि बाहर से आने वाले परिवारों का वोट अधिकतर एक ही प्रत्याशी के सपोर्ट में जाता है। जिले की ग्राम पंचायतों में नजर दौड़ाएं, तो कन्नौज ब्लाक में 89, जलालाबाद में 35, गुगरापुर में 23, तालग्राम में 67, छिबरामऊ में 96, सौरिख में 68, हसेरन में 36, उमर्दा में 90 ग्राम पंचायतें हैं।
जानकारों का कहना है कि कन्नौज जिले में फैक्ट्री सहित कोई विशेष उद्योग की स्थापना न होने की वजह से जिले से करीब 25-30 फीसदी लोग अपने परिवारों के साथ बाहरी प्रदेश में निवास करते हुए वहीं पर रोजगार या नौकरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं।
सबसे अधिक संख्या दिल्ली, पानीपत, गुड़गांव, नोएडा, कानपुर, लखनऊ, सूरत, अहमदाबाद, नासिक, मुंबई, गोहाटी जैसे महानगरों में रहकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इन परिवारों के लोग त्योहार के मौके पर ही अपने गांव आते हैं। प्रधान पद का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की इन परिवारों पर विशेष निगाह रहती है।
इन वोटरों का वोट ग्राम प्रधानी के चुनाव में उम्मीदवारों के लिए संजीवनी का काम करता है। उधर, प्रथम चरण का मतदान खत्म होने के बाद रोडवेज बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर इन दिनों उन प्रदेशों को वापसी करने वाले सैकड़ों लोगों की रात्रि में भीड़ उमड़ रही है।
आलम यह है कि अधिक संख्या होने की वजह से लोग जमीन पर बैठकर यात्रा साधनों का इंतजार कर रहे हैं। हालात यह है कि दिल्ली सहित अन्य जगहों पर जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बीती रात्रि रोडवेज बस स्टैंड पर लोग बस स्टाप से लेकर बाहर जीटी रोड तक जमीन पर बैठकर इंतजार करते मिले।
जिले में ग्रामीण क्षेत्र की हुई जनगणना में करीब 12 लाख से अधिक की आबादी निवास करती हैं। इसमें परदेस में रहने वाले ग्रामीणों का प्रधान पद की सीट के परिणाम पर खासा दखल रहता है। होशियार उम्मीदवार इन परिवारों की पूरी संख्या का बही खाता पहले ही बना लेते हैं, ताकि इन वोटरों के जरिए अपनी सीट की नैया को पार लगाया जा सके।
इन वोटरों की उम्मीदवार पूरी खिदमत भी करते हैं। मतदाताओं को परदेस से बुलाने के लिए आने व जाने का पूरा खर्चा भी देते हैं। माना जाता है कि बाहर से आने वाले परिवारों का वोट अधिकतर एक ही प्रत्याशी के सपोर्ट में जाता है। जिले की ग्राम पंचायतों में नजर दौड़ाएं, तो कन्नौज ब्लाक में 89, जलालाबाद में 35, गुगरापुर में 23, तालग्राम में 67, छिबरामऊ में 96, सौरिख में 68, हसेरन में 36, उमर्दा में 90 ग्राम पंचायतें हैं।
जानकारों का कहना है कि कन्नौज जिले में फैक्ट्री सहित कोई विशेष उद्योग की स्थापना न होने की वजह से जिले से करीब 25-30 फीसदी लोग अपने परिवारों के साथ बाहरी प्रदेश में निवास करते हुए वहीं पर रोजगार या नौकरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं।
सबसे अधिक संख्या दिल्ली, पानीपत, गुड़गांव, नोएडा, कानपुर, लखनऊ, सूरत, अहमदाबाद, नासिक, मुंबई, गोहाटी जैसे महानगरों में रहकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इन परिवारों के लोग त्योहार के मौके पर ही अपने गांव आते हैं। प्रधान पद का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की इन परिवारों पर विशेष निगाह रहती है।
इन वोटरों का वोट ग्राम प्रधानी के चुनाव में उम्मीदवारों के लिए संजीवनी का काम करता है। उधर, प्रथम चरण का मतदान खत्म होने के बाद रोडवेज बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर इन दिनों उन प्रदेशों को वापसी करने वाले सैकड़ों लोगों की रात्रि में भीड़ उमड़ रही है।
आलम यह है कि अधिक संख्या होने की वजह से लोग जमीन पर बैठकर यात्रा साधनों का इंतजार कर रहे हैं। हालात यह है कि दिल्ली सहित अन्य जगहों पर जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बीती रात्रि रोडवेज बस स्टैंड पर लोग बस स्टाप से लेकर बाहर जीटी रोड तक जमीन पर बैठकर इंतजार करते मिले।