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तीन सदस्यीय टीम करेगी फर्जी शिक्षक के कागजों की जांच

Fri, 12 Jun 2020 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2020 11:57 PM IST
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teen sadasyeey teem karegee ?pharjee shikshak ke kaagajon kee jaanch
आरोपी शिक्षक जसवंत। - फोटो : KANNAUJ
संवाद न्यूज एजेंसी
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कन्नौज। पूर्व माध्यमिक विद्यालय रामपुर बरौली में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक के फर्जी डिग्री से नौकरी हासिल करने की जांच तीन सदस्यीय टीम को सौंपी गई है। ये टीम तीन दिन में जांच कर रिपोर्ट बीएसए को सौंपेगी। सर्विस बुक पर जसवंत की ही फोटो लगी है।
कासगंज में अनामिका शुक्ला उर्फ सुप्रिया सिंह के दूसरी की डिग्री पर नौकरी दिलाने वाले मास्टरमाइंड पुष्पेंद्र उर्फ राज उर्फ नीतू का भाई जसवंत हसेरन ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय रामपुर बरौली में नौकरी कर रहा था। मैनपुरी पुलिस की गिरफ्त में आए जसवंत ने मैनपुरी के भोगांव थाना क्षेत्र के हसनपुर पोस्ट मोटा गांव के विभव कुमार सिंह की डिग्री लगाई है। दूसरी की डिग्री से नौकरी हासिल करने वाला जसवंत 2015 से स्कूल में तैनात है।
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खुलासा होने के बाद बीएसए ने शिक्षक के कागजों की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बना दी है। टीम में ब्लाक तालग्राम के बीईओ पवन द्विवेदी, ब्लाक गुगरापुर के बीईओ राजेश कुमार और जिला समन्वयक एमडीएम मोहम्मद आदिल शामिल हैं। बीएसए केके ओझा ने बताया क्रि टीम से तीन दिन में जांच मांगी गई है। जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी साबित होने पर शिक्षक को बर्खास्त कर वेतन आदि मदों की रिकवरी की जाएगी। रुपये न लौटाने पर आरसी जारी की जाएगी। जसवंत मैनपुरी के नगला खरा जसराजपुर का रहने वाला है।
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सही से जांच में फंस सकते कई अफसर व कर्मी
फर्जी अभिलेखों से शिक्षक पद पर नौकरी पाए लोगों की अगर जांच की गई जाए तो कई अफसर व कर्मी इसके लपेटे में आ सकते हैं। शिक्षक भर्ती में नियुक्ति पत्र मिलने से पहले दो बार बोर्ड से अभिलेखों का सत्यापन करवाया जाता है। यहां से क्लीन चिट मिलने के बाद ही अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र दिया जाता है। बोर्ड परीक्षाओं में अभ्यर्थी की कई जगह फोटो लगाई जाती है। अगर जसवंत ने विभव की डिग्री का इस्तेमाल भी किया था तो बोर्ड में जब सत्यापन के लिए कागज गए तो अभिलेखों का सही से मिलान नहीं किया गया। इसके अलावा भोगांव से आरोपी शिक्षक जसंवत की फर्जी अभिलेखों से नौकरी पाने की शिकायत की गई। यहां से दो बार खानापूरी कर रिपोर्ट भेज दी गई। इससे आरोपी शिक्षक बार-बार बचता रहा। फर्जी शिक्षक भर्ती में हुई जांच व अभिलेखों के बारे में पूछने पर अफसर व कर्मी गोलमोल जवाब देते रहे। इससे कहीं न कहीं गड़बडी की बू आ रही हैं।
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