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टीबी हारेगा, देश जीतेगा अभियान में खोजे जाएंगे क्षय रोगी

Sat, 26 Dec 2020 11:24 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 26 Dec 2020 11:24 PM IST
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teebee haarega, desh jeetega abhiyaan mein khoje jaenge kshay rogee
क्षय रोग के नोडल अधिकारी डॉ. जेजे राम। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन के तहत टीबी हारेगा, देश जीतेगा कार्यक्रम के अंतर्गत 25 जनवरी तक तीन चरणों में एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान (एसीएफ) चलेगा। यह 26 दिसंबर से शुरू हुआ है। एक महीने तक तीन चरणों में चलने वाले अभियान में कोविड-19 और टीबी स्क्रीनिंग, एचआईवी एवं डायबिटीज और निजी चिकित्सकों को टीबी से संबंधित जानकारी दी जाएगी।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जेजे राम ने बताया कि पहले चरण में 26 दिसंबर से एक जनवरी तक अनाथालयों, वृद्धाश्रम, जिला कारागार, बाल संरक्षण गृह, नारी निकेतन, शेल्टर होम, मदरसा, जवाहर नवोदय विद्यालय में टीमें क्षय रोगियों की खोज करेंगी। दूसरे चरण में 2 से 12 जनवरी तक शहरी और ग्रामीण मलिन बस्तियों में टीमें घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग कर बलगम की जांच करेंगी। इस दौरान एचआईवी व डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की विशेष रूप से जांच होगी। तीसरे चरण में 13 जनवरी से 25 जनवरी तक जनपद के निजी अस्पतालों में क्षय रोग की टीमें चिकित्सकों से संपर्क कर क्षय रोगियों के बारे में डाटा लेंगी। मरीजों का पंजीकरण निक्षय पोर्टल पर कर इलाज शुरू कर दिया जाएगा। रोगियों की कोविड जांच भी होगी।
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जिला कार्यक्रम समन्वयक रंजीत सिंह ने बताया कि अभियान का मकसद अधिक से अधिक लोगों तक क्षय रोग की उपलब्ध सुविधाओं को पहुंचाना है। अगर किसी व्यक्ति को दो हफ्तों से ज्यादा की खांसी, खांसते समय खून का आना, सीने में दर्द, बुखार, वजन कम होने की शिकायत हो तो वह तत्काल अपने बलगम की जांच कराए। जनपद में क्षय रोगियों की जांच एवं उपचार नि:शुल्क है।
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ये हैं टीबी के लक्षण
तीन सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार जो खासतौर पर शाम को बढ़ता है, छाती में दर्द, वजन का घटना, भूख में कमी, बलगम के साथ खून आना, फेफड़ों में इंफेक्शन, सांस लेने में दिक्कत इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

इस तरह कराएं जांच व इलाज
टीबी के निदान के लिए जरूरी है कि जीवाणु का पता लगाने के लिए लगातार तीन दिन तक कफ की जांच करवाई जाए। क्षय रोगी को कम से कम छह महीने तक लगातार दवा लेनी चाहिए। कभी-कभी दवा को एक साल तक भी लेना पड़ सकता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लेना बंद किया जाए। वह रोगी, जो पूरा इलाज नहीं करवाते अथवा दवा अनियमित लेते, उनके लिए रोग लाइलाज हो सकता है। यह जानलेवा भी हो सकता है। अपनी रुचि के अनुसार रोगी किसी प्रकार का भोजन ले सकते हैं। क्षय रोगी को बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब अथवा किसी भी नशीली वस्तु से परहेज करना चाहिए।
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