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हाईटेक शिक्षा के लिए छात्र करें इंतजार
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Sat, 11 Jul 2015 11:37 PM IST
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जलालाबाद विकास खंड के अनौगी गांव में निर्माणाधीन महामाया आईटी पालीटेक्निक (कालेज आफ इन्फार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी) का भवन अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इस कारण इस साल नया शैक्षिक सत्र शुरू होने के आसार नहीं हैं। अब तक छह करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने के बाद भी छात्रों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बसपा सरकार में अनौगी गांव में महामाया आईटी पालीटेक्निक कालेज के निर्माण को मंजूरी मिली थी। तब 6 करोड़ 45 लाख रुपये इसकी लागत निर्धारित की गई थी। अप्रैल 2011 में कालेज भवन का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। इसके लिए ग्राम सभा की 25 बीघा जमीन उपलब्ध कराई गई। कालेज का भवन मार्च 2013 तक तैयार होना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सरकार बदलने के बाद प्राथमिकताएं बदलीं तो इस प्रोजेक्ट को बजट के लाले पड़ गए। इसके चलते तय समय सीमा के दो साल बाद भी बिल्डिंग का काम अधूरा है।
यहां रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान की लैब, क्लासरूम, लाइब्रेरी, स्टाफ रूम, कंप्यूटर कक्ष, वर्कशाप के अलावा पानी के लिए टंकी, प्राचार्य आवास, स्टाफ के लिए आवास बनाने का खाका खींचा गया है। उच्च शिक्षा विभाग को भवन हैंडओवर न हो पाने के कारण अभी तक यहां पढ़ाई-लिखाई का खाका नहीं तैयार हो सका है।
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कालेज को बनवाने की जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट्स कार्पोरेशन लि. यूनिट 27 को सौंपा गया था। कार्यदाई संस्था के ठेकदार शिवप्रताप सिंह के मेट लालू भदौरिया ने बताया कि रंगाई-पुताई भी कराई जा चुकी है। भवन के अंदर कक्षों में विद्युतीकरण हो गया है, लेकिन बिजली कनेक्शन अब तक नहीं मिल सका है। इस कारण उपकरणों की चेकिंग नहीं हो पा रही है। इस समय कालेज गेट के बाहर जल निकासी के लिए बनी नाली को जाल डालकर पाटने का काम चल रहा है। बाउंड्री के पास मिट्टी भराव का काम भुगतान के अभाव में बाधित है।
क्या कहते हैं अभिभावक
जलालाबाद के गिरजेश पाठक कहते हैं कि पालीटेक्निक कालेज शुरू कराने में देरी के लिए जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। यदि यह कालेज शुरू हो जाए तो सैकड़ों बच्चों को कंप्यूटर आधारित तकनीकी शिक्षा मिल सकती है। लेटलतीफी के कारण छात्रों को कानपुर, लखनऊ, फर्रुखाबाद जैसे शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
भवानीपुर के सुरेंद्र सिंह का कहना है कि इस कालेज के संचालन में देरी के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी जिम्मेदार हैं। पूर्व प्रधान सूरजभान सिंह कहते हैं कि डीएम को इस मामले में दखल देना चाहिए। तय समय सीमा के दो साल बीतने के बाद भी बिल्डिंग अधूरी रहने की जांच कराई जाए।
महामाया आईटी पालीटेक्निक कालेज के निर्माण में देरी के कारणों की छानबीन की जाएगी। जो भी काम अधूरा है उसे जल्द पूरा कराया जाएगा। इसके बाद शासन स्तर पर पत्राचार करके इसका संचालन शुरू कराने व टीचिंग स्टाफ की तैनाती के लिए पत्राचार कराया जाएगा। ताकि छात्र-छात्राओं को इसका लाभ मिल सके।
- रमेश चंद्र यादव, अपर जिलाधिकारी कन्नौज।
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बसपा सरकार में अनौगी गांव में महामाया आईटी पालीटेक्निक कालेज के निर्माण को मंजूरी मिली थी। तब 6 करोड़ 45 लाख रुपये इसकी लागत निर्धारित की गई थी। अप्रैल 2011 में कालेज भवन का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। इसके लिए ग्राम सभा की 25 बीघा जमीन उपलब्ध कराई गई। कालेज का भवन मार्च 2013 तक तैयार होना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सरकार बदलने के बाद प्राथमिकताएं बदलीं तो इस प्रोजेक्ट को बजट के लाले पड़ गए। इसके चलते तय समय सीमा के दो साल बाद भी बिल्डिंग का काम अधूरा है।
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यहां रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान की लैब, क्लासरूम, लाइब्रेरी, स्टाफ रूम, कंप्यूटर कक्ष, वर्कशाप के अलावा पानी के लिए टंकी, प्राचार्य आवास, स्टाफ के लिए आवास बनाने का खाका खींचा गया है। उच्च शिक्षा विभाग को भवन हैंडओवर न हो पाने के कारण अभी तक यहां पढ़ाई-लिखाई का खाका नहीं तैयार हो सका है।
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कालेज को बनवाने की जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट्स कार्पोरेशन लि. यूनिट 27 को सौंपा गया था। कार्यदाई संस्था के ठेकदार शिवप्रताप सिंह के मेट लालू भदौरिया ने बताया कि रंगाई-पुताई भी कराई जा चुकी है। भवन के अंदर कक्षों में विद्युतीकरण हो गया है, लेकिन बिजली कनेक्शन अब तक नहीं मिल सका है। इस कारण उपकरणों की चेकिंग नहीं हो पा रही है। इस समय कालेज गेट के बाहर जल निकासी के लिए बनी नाली को जाल डालकर पाटने का काम चल रहा है। बाउंड्री के पास मिट्टी भराव का काम भुगतान के अभाव में बाधित है।
क्या कहते हैं अभिभावक
जलालाबाद के गिरजेश पाठक कहते हैं कि पालीटेक्निक कालेज शुरू कराने में देरी के लिए जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। यदि यह कालेज शुरू हो जाए तो सैकड़ों बच्चों को कंप्यूटर आधारित तकनीकी शिक्षा मिल सकती है। लेटलतीफी के कारण छात्रों को कानपुर, लखनऊ, फर्रुखाबाद जैसे शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
भवानीपुर के सुरेंद्र सिंह का कहना है कि इस कालेज के संचालन में देरी के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी जिम्मेदार हैं। पूर्व प्रधान सूरजभान सिंह कहते हैं कि डीएम को इस मामले में दखल देना चाहिए। तय समय सीमा के दो साल बीतने के बाद भी बिल्डिंग अधूरी रहने की जांच कराई जाए।
महामाया आईटी पालीटेक्निक कालेज के निर्माण में देरी के कारणों की छानबीन की जाएगी। जो भी काम अधूरा है उसे जल्द पूरा कराया जाएगा। इसके बाद शासन स्तर पर पत्राचार करके इसका संचालन शुरू कराने व टीचिंग स्टाफ की तैनाती के लिए पत्राचार कराया जाएगा। ताकि छात्र-छात्राओं को इसका लाभ मिल सके।
- रमेश चंद्र यादव, अपर जिलाधिकारी कन्नौज।