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संविदा कर्मचारियों की सुविधाओं में कंजूसी

Sun, 01 Mar 2015 11:55 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
अमर उजाला कन्नाैैज Updated Sun, 01 Mar 2015 11:55 PM IST
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Skimp on the perks of the contract staff
बिजली विभाग ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को जरूरी सुविधाएं देने में कंजूसी बरत रहा है। ऐसे में कई बार उनकी जान पर बन आती है। वहीं सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों ने भी ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में अप्रशिक्षत कर्मचारियों को काम पर लगा दिया गया है। इससे न सिर्फ फाल्ट ठीक होने में देरी होती है बल्कि कर्मचारी भी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
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बिजली विभाग के सूत्रों के अनुसार विभाग में एसएसओ, लाइनमैन और सहायक के रूप में सैकड़ों की तादात में संविदा पर कर्मचारी रखे गए हैं। एसएसओ का काम विद्युत उप केंद्रों पर रहकर शट डाउन देना, बिजली चालू करना समेत उप केंद्र के अंदर आई खराबियों को दुरुस्त कराना होता है।
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लाइनमैन का काम विद्युत लाइनों में होने वाले फाल्ट को ठीक करना होता है। सहायक फाल्ट ठीक करने के दौरान लाइनमैन की मदद करते हैं। ठेकेदारों से विभाग का करीब एक वर्ष का अनुबंध रहता है। कर्मचारियों के एक गैंग में तीन कर्मचारी रखे जाते हैं।
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उप केंद्र मकरंदनगर में डे-नाइट पर 9 कर्मचारी, बहादुरपुर उज्जैना उप केंद्र में डे-नाइट पर 12 कर्मचारी, मानपुर में 9 कर्मचारी, जसपुरापुर सरैंया में 15 कर्मचारी, चौधरियापुर पुलिस लाइन में 9 कर्मचारी, तिर्वा में 12 कर्मचारी, ठठिया में 12 कर्मचारी, गुरसहायगंज में 9 कर्मचारी, तालग्राम में 12 कर्मचारी, अनौगी में 12 कर्मचारी, गुगरापुर में 12 कर्मचारी, छिबरामऊ में 9 कर्मचारी, सिकंदरपुर में 12 कर्मचारी, बहबलपुर में 9 कर्मचारी, सौरिख में 12 कर्मचारी, हसेरन उप केंद्र पर भी 12 कर्मचारियों का स्टाफ दिन-रात की ड्यूटी में तैनात रहता है। एक जेई ने बताया कि यह कड़वी सच्चाई अफसरों को पता है, लेकिन कभी ठेकेदारों से नजदीकियां तो कभी दबाव में लिखित शिकायतें न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।

 कर्मचारी संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष हरीराम ने आरोप लगाया कि प्राइवेट कर्मचारी शोषण से परेशान हैं। ठेकेदार उनके हकों पर डाका डाल रहे हैं। अधिकारी व ठेकेदार मिले हैं, जिस कारण जो पूरा भुगतान मांगता है उसे नौकरी से निकाल देने व जेल भिजवा देने की धमकी दी जाती है। यदि जिला प्रशासन गोपनीय जांच कराए तो सारा सच सामने आ जाएगा।

किन फर्मों के हैं कितने कर्मचारी
मां बिसारा देवी फर्म के 96, मेसर्स नेशनल कंपनी के 45, मेसर्स अनुराग के 15 कर्मचारी, मां भगवानी देवी के 9 कर्मचारी, मेसर्स सिस्टल इंफ्रां लखनऊ के 3 कर्मचारी, मेसर्स पवन शुक्ला के 9 कर्मचारी कार्यरत हैं।

क्या होनी चाहिए प्राथमिकता
टेंडर में कहा गया है कि वही लोग ठेके पर कर्मचारी बन सकते हैं जिनके पास इलेक्ट्रानिक में आईटीआई का डिप्लोमा हो। ठेकेदार कर्मचारियों का बीमा कराएंगे। कर्मचारियों को एक-एक पहचान कार्ड मुहैया कराएगा। कर्मचारियों का फंड की कटौती करनी चाहिए। चेक से कर्मचारियों के खाते में मानदेय भेजना चाहिए।

इनमें ज्यादातर नियमों का पालन नहीं होता है। जब कोई कर्मचारी विरोध करता है तो उसकी काम से छुट्टी करके मुंह बंद कर दिया जाता है। हाल ही में ठेका कर्मी कल्लू, जय सिंह, अज्जू, भरत, सरमन, अजीत, प्रदीप पाल, परसादी, सर्वेश, अमित यादव की तरफ से मानकों का उल्लंघन व वाजिब भुगतान न होने पर हंगामा हो चुका है।

कागजों पर कोई हकीकत में कोई
कई कर्मचारी ऐसे हैं जिनके अभिलेख बिजली विभाग की फाइलों में लगे हैं, लेकिन उनके स्थान पर काम दूसरे लोग कर रहे हैं। तमाम कर्मचारी डिप्लोमा न होते हुए भी मनमाने तरीके से काम पर रख दिए गए हैं। इसके एवज में ठेकेदार उन्हें निर्धारित से कम भुगतान करते हैं। तीन कर्मचारियों के गैंग को शासन की तरफ से 25500 रुपये का भुगतान प्रति महीने किया जाता है। लेकिन प्रति गैंग 10 से 11 हजार रुपये ही दिए जाते हैं। कम भुगतान को लेकर कई बार लाइनमैन प्रदर्शन कर चुके हैं, पर कुछ दिन तक सुधार दिखने के बाद फिर पुराना ढर्रा चालू हो जाता है।

अप्रशिक्षित कर्मचारियों से होने वाली दिक्कतें
बिजली विभाग के अफसरों की मानें तो अप्रशिक्षित कर्मचारी विभाग के साथ ही जनता के लिए तमाम परेशानियां पैदा कर रहे हैं। अक्सर लाइनमैन की जगह सहायक खंभे पर चढ़कर काम करने लगते हैं। कई बार तार गलत बांध जाते हैं। इस कारण बिजली आपूर्ति चालू होते ही जंफर उड़ जाते हैं। अकुशल कर्मचारी फाल्ट तलाश करने और फिर उसकी मरम्मत करने में ज्यादा वक्त लगाते हैं। तब तक बिजली कट रहती है।

रात में नहीं काम करते कर्मचारी
सरकारी आंकड़ों में तो रात के वक्त कर्मचारियों के गैंग चलने को तैनात करके फाल्ट ठीक कराए जाते हैं, लेकिन हकीकत में अक्सर ऐसा नहीं होता है। रात के वक्त जब फाल्ट होता है तो उसे ठीक करने कोई गैंग नहीं पहुंचता। अगले दिन सुबह के वक्त ही कर्मचारी भेेजे जाते हैं। विभागीय जेई मानते हैं कि रात के वक्त ज्यादातर गैंग काम सही से नहीं कर रहे हैं।

जांच कराकर सुधार कराएंगे- एक्सईएन
अधिशासी अभियंता पी.राम का कहना है कि जिले में सरकारी कर्मचारियों की कमी होने के कारण टेंडर डालकर ठेकेदारों से कर्मचारी लेकर लगाए जाते हैं। यदि ठेकेदार अप्रशिक्षित कर्मचारियों से काम कराते हैं तो उनका टेंडर निरस्त किया जाएगा। क्रास चेक कर पता कराएंगे कि जो कर्मचारी काम कर रहे हैं वे डिप्लोमा होल्डर हैं कि नहीं ?


उनके कागजात देखे जाएंगे और काम के बारे में पूछताछ होगी। कर्मचारी पूरा भुगतान ठेकेदार से लें। यदि ठेकेदार कम रुपये देते हैं तो लिखित शिकायत करें। रात में छापेमारी कर जांचा जाएगा कि नाइड ड्यूटी पर तैनात टीम फाल्ट ठीक करने आती है या नहीं।
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