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सत्र बीता, हजारों छात्रों का वजीफा छूटा
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Tue, 02 Jun 2015 11:38 PM IST
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पिछला शैक्षणिक सत्र बीतने के बाद भी हजारों छात्र-छात्राओं को अभी तक वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि का इंतजार है। शासन ने सीबीएसई की तर्ज पर अप्रैल माह से शैक्षिक सत्र की शुरुआत तो करा दी, लेकिन वजीफे से पढ़ने वाले गरीब बच्चों की ओर ध्यान नहीं दिया।
दशमोत्तर कक्षाओं में पढ़ने वाले पिछड़ी जाति के हजारों छात्र-छात्राओं को अभी तक इन दोनों योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका है। वहीं अफसर यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि बचे हुए विद्यार्थियों को लाभान्वित करने के लिए पांच करोड़ रुपये की जरूरत है।
जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी कार्यालय के अनुसार जनपद में शैक्षिक सत्र 2014-15 में 19300 छात्रों को छात्रवृत्ति का पात्र माना गया था। इन्हें वजीफा देने के लिए विभाग ने नौ करोड़ रुपये की धनराशि मांगी थी। लेकिन पूरी धनराशि नहीं मिली। इस वजह से अब तक 7257 छात्रों को छात्रवृत्ति मिल पाई है। 12043 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का इंतजार है।
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बजट की कमी से छात्रों को वजीफा नहीं मिल पा रहा है।
इसी तरह शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि भी सभी छात्र-छात्राओं के लिए नहीं आई। अब तक 11659 छात्रों को ही 21311000 रुपये की धनराशि शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में भेजी र्गई। शेष 7641 विद्यार्थी शुल्क प्रतिपूर्ति पाने को भटक रहे हैं। इस कारण विद्यार्थियों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।
छात्र नेता सुनील यादव का कहना है कि छात्रों से जुड़ी इस योजना में लेटलतीफी के लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं। शासन स्तर पर सही स्थिति न पहुंच पाने के कारण बजट मिलने में विलंब हुआ है। उन्होंने कहा कि सभी छात्र-छात्राओं को एक साथ शुल्क प्रतिपूर्ति व वजीफा मिलना चाहिए।
सभी छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति और वजीफा की धनराशि देने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये की दरकार है। जनपद स्तर से सारी कागजी कार्रवाई पूरी कर दी गई है। बजट आवंटित करना शासन स्तर का निर्णय है। जैसे ही बजट मिलेगा, विद्यार्थियों के खाते में ट्रांसफर करा दिया जाएगा। जल्द भुगतान कराने के लिए लिखापढ़ी चल रही है।
राजेश बघेल, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, कन्नौज।
कौन बताए क्यों रिजेक्ट हुए फार्म
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के आंकड़ों की मानें तो इस बार जिले में बड़ी संख्या में वजीफे संबंधी आवेदन पत्र रिजेक्ट हुए हैं। फार्म निरस्त होने का स्पष्ट कारण न बताए जाने से भ्रम की स्थिति बनी है। पिछड़ा विभाग कल्याण विभाग में रोजाना दर्जनों की संख्या में छात्र-छात्राएं यह पता लगाने के लिए आते हैं कि उनका आवेदन निरस्त क्यों हुआ। पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी का कहना है कि आन-लाइन प्रक्रिया के चलते कई कारणों से फार्म निरस्त हुए हैं। शासन से इस संबंध में वार्ता की गई। लेकिन आवेदन निरस्त होने का कारण नहीं पता चला।
फैक्ट फाइल
-शैक्षिक सत्र 2014-15 में वजीफे के लिए 19300 और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए 19300 छात्रों का चयन।
-7257 को मिली छात्रवृत्ति। 12043 वंचित। 11659 छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति मिली। 7641 वंचित।
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दशमोत्तर कक्षाओं में पढ़ने वाले पिछड़ी जाति के हजारों छात्र-छात्राओं को अभी तक इन दोनों योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका है। वहीं अफसर यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि बचे हुए विद्यार्थियों को लाभान्वित करने के लिए पांच करोड़ रुपये की जरूरत है।
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जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी कार्यालय के अनुसार जनपद में शैक्षिक सत्र 2014-15 में 19300 छात्रों को छात्रवृत्ति का पात्र माना गया था। इन्हें वजीफा देने के लिए विभाग ने नौ करोड़ रुपये की धनराशि मांगी थी। लेकिन पूरी धनराशि नहीं मिली। इस वजह से अब तक 7257 छात्रों को छात्रवृत्ति मिल पाई है। 12043 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का इंतजार है।
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बजट की कमी से छात्रों को वजीफा नहीं मिल पा रहा है।
इसी तरह शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि भी सभी छात्र-छात्राओं के लिए नहीं आई। अब तक 11659 छात्रों को ही 21311000 रुपये की धनराशि शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में भेजी र्गई। शेष 7641 विद्यार्थी शुल्क प्रतिपूर्ति पाने को भटक रहे हैं। इस कारण विद्यार्थियों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।
छात्र नेता सुनील यादव का कहना है कि छात्रों से जुड़ी इस योजना में लेटलतीफी के लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं। शासन स्तर पर सही स्थिति न पहुंच पाने के कारण बजट मिलने में विलंब हुआ है। उन्होंने कहा कि सभी छात्र-छात्राओं को एक साथ शुल्क प्रतिपूर्ति व वजीफा मिलना चाहिए।
सभी छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति और वजीफा की धनराशि देने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये की दरकार है। जनपद स्तर से सारी कागजी कार्रवाई पूरी कर दी गई है। बजट आवंटित करना शासन स्तर का निर्णय है। जैसे ही बजट मिलेगा, विद्यार्थियों के खाते में ट्रांसफर करा दिया जाएगा। जल्द भुगतान कराने के लिए लिखापढ़ी चल रही है।
राजेश बघेल, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, कन्नौज।
कौन बताए क्यों रिजेक्ट हुए फार्म
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के आंकड़ों की मानें तो इस बार जिले में बड़ी संख्या में वजीफे संबंधी आवेदन पत्र रिजेक्ट हुए हैं। फार्म निरस्त होने का स्पष्ट कारण न बताए जाने से भ्रम की स्थिति बनी है। पिछड़ा विभाग कल्याण विभाग में रोजाना दर्जनों की संख्या में छात्र-छात्राएं यह पता लगाने के लिए आते हैं कि उनका आवेदन निरस्त क्यों हुआ। पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी का कहना है कि आन-लाइन प्रक्रिया के चलते कई कारणों से फार्म निरस्त हुए हैं। शासन से इस संबंध में वार्ता की गई। लेकिन आवेदन निरस्त होने का कारण नहीं पता चला।
फैक्ट फाइल
-शैक्षिक सत्र 2014-15 में वजीफे के लिए 19300 और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए 19300 छात्रों का चयन।
-7257 को मिली छात्रवृत्ति। 12043 वंचित। 11659 छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति मिली। 7641 वंचित।