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रुक्मिणी विवाह सुन झूमे श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
Updated Sat, 19 Nov 2016 11:58 PM IST
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सांस्कृतिक कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कान्यकुब्ज शिक्षा एवं समाज सेवा समिति के तत्वावधान में केके इंटर कालेज छात्रावास मैदान पर आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के छठे दिन व्यास आचार्य गौरव कृष्ण महाराज ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है। यदि कमी रहती है तो केवल संकल्प की। संकल्प दृढ़ एवं कपट रहित होने से प्रभु उसे पूर्ण करेंगे।
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रुक्मिणी विवाह पर आचार्य ने कहा कि रुक्मिणी के भाई रुक्मि ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ तय किया था, लेकिन रुक्मिणी ने संकल्प लिया था कि मैं केवल गोपाल को ही पति के रुप में वरण करूंगी। शिशुपाल असत मार्गी है और श्री द्वारिकाधीश भगवान श्रीकृष्ण सतमार्गी हैं। कृष्ण ने रुक्मिणी का संकल्प पूर्ण किया और उन्हें पत्नी रूप में वरणकर प्रधान पटरानी का स्थान दिया।
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श्रीकृष्ण की महाराज लीला प्रसंग पर कहा कि महारास लीला काम लीला नहीं, काम पर विजय प्राप्ति की लीला ही महारास लीला है। विशुद्ध जीव और पूर्ण ब्रह्म का मिलन ही महारास है। कहा कि तपस्या से इंद्रियों की शुद्धि होती है। दान से धन शुद्ध होता है। पुरुषार्थ के साथ मन में संतोष होना चाहिए। लक्ष्मी को नारायण सहित बुलाना चाहिए।
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उल्लू के साथ लक्ष्मी आई तो उल्लू बना देगी। जीवन में अशांति आ जाएगी। कहा जब अहं की पूर्ति नहीं होती तो क्रोध आता है। इस मौके पर आयोजक नवाब सिंह यादव, नीलू यादव, दिलीप गुप्ता, सीएम के ओएसडी रमेश चंद्र यादव सहित अन्य तमाम भक्त मौजूद रहे।