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‘धार्मिक कार्यक्रमों से आती है सुख-शांति’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Mon, 09 Nov 2015 12:25 AM IST
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रविवार को भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान गीत संगीत के बीच भगवान की महिमा का
बखान किया गया। जयकारे गूंजते रहे। लोगों ने भगवान की आरती उतारी और
जयकारों के बीच प्रसाद ग्रहण किया।
परीक्षित सुमनलता बनीं। कथावाचक आचार्य पंडित सुभाष चंद्र द्विवेदी ने अंतिम दिन सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, कंस वध की लीला सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों का सदैव ध्यान रखते हैं। उसके दुखों का निवारण करते हैं। मथुरा में जब कंस के अत्याचारों से लोग त्राहि-त्राहि करने लगे, तब भगवान ने अवतार लेकर पापी कंस का अंत किया।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों से समाज में सुख व शांति बढ़ती है। लोगों को धर्म के रास्ते पर चलने की सीख मिलती है। धर्म से विमुख लोगों के मन में सदैव अशांति रहती है। इस मौके पर कुलकांत त्रिपाठी, अवनीश, सुरेश चंद्र, कनौजीलाल, जगदेव, जगदीश तिवारी, रामप्रकाश पाल, सियाराम आदि मौजूद थे।
परीक्षित सुमनलता बनीं। कथावाचक आचार्य पंडित सुभाष चंद्र द्विवेदी ने अंतिम दिन सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, कंस वध की लीला सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों का सदैव ध्यान रखते हैं। उसके दुखों का निवारण करते हैं। मथुरा में जब कंस के अत्याचारों से लोग त्राहि-त्राहि करने लगे, तब भगवान ने अवतार लेकर पापी कंस का अंत किया।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों से समाज में सुख व शांति बढ़ती है। लोगों को धर्म के रास्ते पर चलने की सीख मिलती है। धर्म से विमुख लोगों के मन में सदैव अशांति रहती है। इस मौके पर कुलकांत त्रिपाठी, अवनीश, सुरेश चंद्र, कनौजीलाल, जगदेव, जगदीश तिवारी, रामप्रकाश पाल, सियाराम आदि मौजूद थे।