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बारिश से कच्ची दीवार ढही, महिला घायल
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खेत में गिरी धान की फसल।
- फोटो : CHIBRAMAU
छिबरामऊ (कन्नौज)। दो दिन से लगातार बरसात के चलते जनजीवन अस्त व्यस्त है। शुक्रवार को भी कई बार रुक-रुक कर बरसात हुई। हसेरन इलाके में पानी के साथ तेज हवाओं से धान की फसल चौपट हो गई है। सौरिख क्षेत्र के जसमेड़ी गांव में चारपाई पर लेटी महिला के ऊपर कच्ची दीवार ढह गई। गंभीर हालत में निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया गया है।
सौरिख प्रतिनिधि के अनुसार ग्राम पंचायत दौलताबाद के जसमेड़ी गांव निवासी शीतला देवी (45) घर में चारपाई पर लेटी थीं। पास में ही बकरियां खूंटे से बंधी थीं। कच्ची दीवार ढहने से यह और बकरियां मलबे में दब गईं। परिजनों समेत आसपास के लोगों ने मलबा हटाकर बाहर निकाला। शीतला देवी को गंभीर हालत में छिबरामऊ के निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया गया।
हसेरन प्रतिनिधि के अनुसार मूसलाधार बरसात और तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल चौपट हो गई। शिव सिंहपुर निवासी जय नारायन सिंह की 14 बीघा फसल जमीन पर गिर गई। जयनारायन की माली हालत ठीक नहीं है। बैंक से कर्ज लेकर फसल तैयार की थी। वहीं हसेरन निवासी अनिल तिवारी के मकान की भी दीवार ढह गई।
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खड़िनी प्रतिनिधि के अनुसार बारिश के चलते कस्बे की बिजली शुक्रवार को भी बहाल नहीं हो सकी। धान के साथ साथ आलू, सरसों व सब्जियों की अगेती फसल के लिए पानी कहर बनकर बरसा। नहर के किनारे बसी नई बस्ती पूरी तरह से जलमग्न हो गई। लोगों को घरों से बाहर निकलने में परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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सौरिख प्रतिनिधि के अनुसार ग्राम पंचायत दौलताबाद के जसमेड़ी गांव निवासी शीतला देवी (45) घर में चारपाई पर लेटी थीं। पास में ही बकरियां खूंटे से बंधी थीं। कच्ची दीवार ढहने से यह और बकरियां मलबे में दब गईं। परिजनों समेत आसपास के लोगों ने मलबा हटाकर बाहर निकाला। शीतला देवी को गंभीर हालत में छिबरामऊ के निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया गया।
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हसेरन प्रतिनिधि के अनुसार मूसलाधार बरसात और तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल चौपट हो गई। शिव सिंहपुर निवासी जय नारायन सिंह की 14 बीघा फसल जमीन पर गिर गई। जयनारायन की माली हालत ठीक नहीं है। बैंक से कर्ज लेकर फसल तैयार की थी। वहीं हसेरन निवासी अनिल तिवारी के मकान की भी दीवार ढह गई।
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खड़िनी प्रतिनिधि के अनुसार बारिश के चलते कस्बे की बिजली शुक्रवार को भी बहाल नहीं हो सकी। धान के साथ साथ आलू, सरसों व सब्जियों की अगेती फसल के लिए पानी कहर बनकर बरसा। नहर के किनारे बसी नई बस्ती पूरी तरह से जलमग्न हो गई। लोगों को घरों से बाहर निकलने में परेशानियों का सामना करना पड़ा।