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Kannauj News: हर लाभार्थी और गोवंशी का होगा भौतिक सत्यापन
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कन्नौज। मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंशी सहभागिता योजना में पारदर्शिता लाने के लिए जिला प्रशासन सख्त हो गया है। डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने हर लाभार्थी और गोवंशी का मौके पर शत-प्रतिशत सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।
सरकार द्वारा योजना के तहत बेसहारा गोवंश को इच्छुक किसानों और पशुपालकों को सुपुर्द किया जाता है। उनके भरण-पोषण के लिए प्रति गोवंशी 50 रुपये प्रतिदिन यानी 1500 रुपये प्रतिमाह सीधे खाते में भेजे जाते हैं। एक लाभार्थी को अधिकतम चार गोवंशी दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई जगह शिकायतें मिल रही थीं कि लाभार्थी पैसा ले रहे हैं। गोवंशी उनके पास नहीं हैं या टैगिंग में गड़बड़ी है। इसे रोकने के लिए सभी ग्राम पंचायत सचिव और पशु चिकित्साधिकारी फील्ड में जाकर जांच करेंगे। गोवंशी की टैगिंग, उसकी मौजूदा स्थिति और लाभार्थी के पास मौजूदगी की भौतिक पुष्टि की जाएगी।
डीएम ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा मिलता है तो संबंधित अधिकारी और लाभार्थी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लगाने के साथ ही गोवंशियों की उचित देखभाल सुनिश्चित करना प्रशासन का लक्ष्य है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द सत्यापन रिपोर्ट जिला मुख्यालय को सौंपी जाए, ताकि पात्र लाभार्थियों को समय से भुगतान मिल सके। इस कदम से योजना में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक पशुपालकों को लाभ मिलेगा।
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सरकार द्वारा योजना के तहत बेसहारा गोवंश को इच्छुक किसानों और पशुपालकों को सुपुर्द किया जाता है। उनके भरण-पोषण के लिए प्रति गोवंशी 50 रुपये प्रतिदिन यानी 1500 रुपये प्रतिमाह सीधे खाते में भेजे जाते हैं। एक लाभार्थी को अधिकतम चार गोवंशी दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई जगह शिकायतें मिल रही थीं कि लाभार्थी पैसा ले रहे हैं। गोवंशी उनके पास नहीं हैं या टैगिंग में गड़बड़ी है। इसे रोकने के लिए सभी ग्राम पंचायत सचिव और पशु चिकित्साधिकारी फील्ड में जाकर जांच करेंगे। गोवंशी की टैगिंग, उसकी मौजूदा स्थिति और लाभार्थी के पास मौजूदगी की भौतिक पुष्टि की जाएगी।
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डीएम ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा मिलता है तो संबंधित अधिकारी और लाभार्थी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लगाने के साथ ही गोवंशियों की उचित देखभाल सुनिश्चित करना प्रशासन का लक्ष्य है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द सत्यापन रिपोर्ट जिला मुख्यालय को सौंपी जाए, ताकि पात्र लाभार्थियों को समय से भुगतान मिल सके। इस कदम से योजना में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक पशुपालकों को लाभ मिलेगा।
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