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फली छेदक सूड़ी के हमले से मटर की पैदावार में गिरावट
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मटर की फसल में सूड़ी का हमला रोकने के लिए छिड़काव करता युवा किसान।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। गंगा और काली नदी के तराई इलाके मटर पैदावार के लिए जाने जाते हैं। इस बार भी किसानों ने शासन से निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले तीन गुना रकबे में मटर की फसल की है। महंगाई के दौर में पहली तुड़ान के बाद ही फसल में फली छेदक सूड़ी ने हमला कर दिया है। इससे पैदावार प्रभावित हो गई है। सूड़ी के प्रकोप को रोकने के लिए मटर किसान कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं।
पिछले साल शासन से मटर की खेती के लिए 620 हेक्टेयर लक्ष्य निर्धारित किया गया था। किसानों ने मुनाफे की आस लगाकर 830 हेक्टेयर में मटर की फसल की थी। इस बार शासन ने 356 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। किसानों ने इस बार 900 हेक्टेयर में मटर की फसल की है। नवंबर में मटर का दाम 80 से 100 रुपये तक पहुंच गया। इससे किसानों के चेहरों पर खुशी बढ़ गई। ज्यादातर किसानों ने पहली और दूसरी तुड़ान में अच्छा मुनाफा कमाया। दीपावली पर बारिश होने के साथ ही अधिक सर्दी से मटर में फली छेदक सूड़ी ने हमला कर दिया। हरे रंग की यह सूड़ी मटर की फली छेदकर दाने खा जाती है। इससे मटर की पैदावार 30 फीसदी कम हो गई। इससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। अब किसान फसल को बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं।
मौसम में परिवर्तन से लग रही सूड़ी
जिला कृषि अधिकारी राम मिलन सिंह परिहार ने बताया कि मौसम में परिवर्तन से मटर में सूड़ी लग रही है। जल्द मटर पैदावार बहुल क्षेत्र में कृषि वैज्ञानिकों को भेजकर किसानों को बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा।
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सूड़ी और रोग से बचाव के उपाय
खेत की मेड़ों की सफाई करें। इससे कि कीड़ों को आश्रय देने वाले पौधे न पनप पाएं।
खेतों में पक्षी आश्रय स्थल, टी आकार की लकड़ी लगाएं। पक्षी कीड़ों को आहार बना लेते हैं।
रस चूसक कीड़ों की रोकथाम के लिए नीम तेल या नीम अर्क का छिड़काव करें।
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पिछले साल शासन से मटर की खेती के लिए 620 हेक्टेयर लक्ष्य निर्धारित किया गया था। किसानों ने मुनाफे की आस लगाकर 830 हेक्टेयर में मटर की फसल की थी। इस बार शासन ने 356 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। किसानों ने इस बार 900 हेक्टेयर में मटर की फसल की है। नवंबर में मटर का दाम 80 से 100 रुपये तक पहुंच गया। इससे किसानों के चेहरों पर खुशी बढ़ गई। ज्यादातर किसानों ने पहली और दूसरी तुड़ान में अच्छा मुनाफा कमाया। दीपावली पर बारिश होने के साथ ही अधिक सर्दी से मटर में फली छेदक सूड़ी ने हमला कर दिया। हरे रंग की यह सूड़ी मटर की फली छेदकर दाने खा जाती है। इससे मटर की पैदावार 30 फीसदी कम हो गई। इससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। अब किसान फसल को बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं।
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मौसम में परिवर्तन से लग रही सूड़ी
जिला कृषि अधिकारी राम मिलन सिंह परिहार ने बताया कि मौसम में परिवर्तन से मटर में सूड़ी लग रही है। जल्द मटर पैदावार बहुल क्षेत्र में कृषि वैज्ञानिकों को भेजकर किसानों को बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा।
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सूड़ी और रोग से बचाव के उपाय
खेत की मेड़ों की सफाई करें। इससे कि कीड़ों को आश्रय देने वाले पौधे न पनप पाएं।
खेतों में पक्षी आश्रय स्थल, टी आकार की लकड़ी लगाएं। पक्षी कीड़ों को आहार बना लेते हैं।
रस चूसक कीड़ों की रोकथाम के लिए नीम तेल या नीम अर्क का छिड़काव करें।