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Kannauj News: गंगा और सहायक नदियों के उफनाने से हजारों बीघा खेती जलमग्न
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कन्नौज। लगातार बारिश से जिले में बहने वाली अरिंद, काली, ईशन और गंगा नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। इससे तटवर्ती इलाकों में किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खेतों में पानी भरने से धान, मक्का और बाजरा की फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। फसल खराब होने से किसानों के सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
छिबरामऊ क्षेत्र में काली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से ग्राम हरिबल्लभपुर के 18 किसानों की 200 बीघा कृषि योग्य भूमि जलमग्न हो गई है। खेतों में कई फीट पानी भरने से फसल पूरी तरह डूब गई है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द पानी नहीं उतरा तो पूरी फसल खराब हो जाएगी। तालग्राम क्षेत्र में ईशन नदी की बाढ़ ने बेहटा, उमरपुर, रन्नापुरवा, तिलक सराय, ताहपुर, कुडरी, खबरामऊ, चचियापुर आदि गांवों को प्रभावित किया है। इन गांवों में धान, मक्का और बाजरा की फसलों में जलभराव हो गया है।
उमरपुर के पास श्मशान घाट भी पानी में डूब गया है। इस कारण अंतिम संस्कार में भी परेशानी हो रही है। किसानों ने बताया कि इस बार धान की फसल अच्छी थी पर बाढ़ के पानी ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। कई जगह मक्का और बाजरा की फसलें खेतों में प्रभावित हो गई हैं। लगातार जलभराव से फसलों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
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इसी प्रकार गंगा और अरिंद नदी के किनारे बसे गांवों के खेतों में भी पानी घुस गया है। गंगा का जलस्तर 125.090 मीटर तक पहुंचने से कासिमपुर समेत कई गांवों के निचले इलाकों के खेत डूब गए हैं। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित खेतों का तत्काल सर्वे कराया जाए और फसल नुकसान का उचित मुआवजा दिलाया जाए। किसानों ने कमांड सेंटर और टोल फ्री नंबर 1077 पर शिकायत दर्ज कराना शुरू कर दिया है। एडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासन ने राजस्व टीमों को सर्वे के निर्देश दिए हैं। तटवर्ती गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
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फोटो:33: महादेवी घाट पर बढ़े जलस्तर से डूबने लगे भवन। संवाद
गंगा का जलस्तर 125.210 मीटर पहुंचा
कन्नौज। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों दाईपुर, अब्दुलपुर सकरी, गदनपुर नरहा, दुर्जनापुर, कासिमपुर, बक्शीपुर्वा, मेंहदीपुर, गुमटिया, चौरा चांदपुर व सलेमपुर आदि गांवों के निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को गंगा का जलस्तर 125.210 मीटर पहुंच गया। जलस्तर में बढ़ोत्तरी से नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की निगाहें लगातार गंगा के पानी पर टिकी हैं। तटवर्ती ग्रामीणों को खेतों और निचले इलाकों में पानी बढ़ने की आशंका सता रही है।
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फोटो :35: मलबे में दबा गृहस्थी का सामान निकालती महिला। संवाद
बारिश थमी, हरिहरपुर में भरभराकर गिरा कच्चा मकान
छिबरामऊ। बारिश थमने और सोमवार को दिनभर तेज धूप निकलने के बाद कच्चे मकानों पर संकट बढ़ गया है। ग्राम सभा हरिहरपुर के मजरा नगला कोठी निवासी ममता कश्यप, पति संदीप व बच्चों के साथ लंबे अर्से से कच्चे मकान में जीवन यापन कर रही हैं। सोमवार रात 11 बजे अचानक मकान की कच्ची छत तेज धमाके के साथ ढह गई। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग एकत्रित हो गए। ममता के अनुसार कमरे में रखा गेहूं, रजाई, गद्दे, भूसा और गृहस्थी का अन्य जरूरी सामान मलबे में दब गया। बीडीसी प्रतिनिधि विवेक दीक्षित समेत अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
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फोटो :26: खेत में बर्बाद हुई मक्का की फसल दिखाता किसान। संवाद
बारिश के बाद तेज हवाओं से मक्का की फसल बर्बाद
विशुनगढ़। बारिश के बाद चली तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी। क्षेत्र के ग्राम कुड़रा निवासी सुरेशचंद्र राजपूत, डॉ. अजय राजपूत और डॉ. धर्मवीर राजपूत ने बताया कि 18 बीघा मक्के की फसल नष्ट हो गई। वहीं, गांव के पप्पू राजपूत की चार बीघा बाजरे की फसल भी तेज हवाओं की चपेट में आकर बर्बाद हो गई। किसानों ने बताया कि भुट्टे तैयार हो चुके थे और अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। आलू का उचित भाव न मिलने से किसान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से फसलों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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छिबरामऊ क्षेत्र में काली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से ग्राम हरिबल्लभपुर के 18 किसानों की 200 बीघा कृषि योग्य भूमि जलमग्न हो गई है। खेतों में कई फीट पानी भरने से फसल पूरी तरह डूब गई है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द पानी नहीं उतरा तो पूरी फसल खराब हो जाएगी। तालग्राम क्षेत्र में ईशन नदी की बाढ़ ने बेहटा, उमरपुर, रन्नापुरवा, तिलक सराय, ताहपुर, कुडरी, खबरामऊ, चचियापुर आदि गांवों को प्रभावित किया है। इन गांवों में धान, मक्का और बाजरा की फसलों में जलभराव हो गया है।
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उमरपुर के पास श्मशान घाट भी पानी में डूब गया है। इस कारण अंतिम संस्कार में भी परेशानी हो रही है। किसानों ने बताया कि इस बार धान की फसल अच्छी थी पर बाढ़ के पानी ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। कई जगह मक्का और बाजरा की फसलें खेतों में प्रभावित हो गई हैं। लगातार जलभराव से फसलों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
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इसी प्रकार गंगा और अरिंद नदी के किनारे बसे गांवों के खेतों में भी पानी घुस गया है। गंगा का जलस्तर 125.090 मीटर तक पहुंचने से कासिमपुर समेत कई गांवों के निचले इलाकों के खेत डूब गए हैं। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित खेतों का तत्काल सर्वे कराया जाए और फसल नुकसान का उचित मुआवजा दिलाया जाए। किसानों ने कमांड सेंटर और टोल फ्री नंबर 1077 पर शिकायत दर्ज कराना शुरू कर दिया है। एडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासन ने राजस्व टीमों को सर्वे के निर्देश दिए हैं। तटवर्ती गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
फोटो:33: महादेवी घाट पर बढ़े जलस्तर से डूबने लगे भवन। संवाद
गंगा का जलस्तर 125.210 मीटर पहुंचा
कन्नौज। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों दाईपुर, अब्दुलपुर सकरी, गदनपुर नरहा, दुर्जनापुर, कासिमपुर, बक्शीपुर्वा, मेंहदीपुर, गुमटिया, चौरा चांदपुर व सलेमपुर आदि गांवों के निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को गंगा का जलस्तर 125.210 मीटर पहुंच गया। जलस्तर में बढ़ोत्तरी से नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की निगाहें लगातार गंगा के पानी पर टिकी हैं। तटवर्ती ग्रामीणों को खेतों और निचले इलाकों में पानी बढ़ने की आशंका सता रही है।
फोटो :35: मलबे में दबा गृहस्थी का सामान निकालती महिला। संवाद
बारिश थमी, हरिहरपुर में भरभराकर गिरा कच्चा मकान
छिबरामऊ। बारिश थमने और सोमवार को दिनभर तेज धूप निकलने के बाद कच्चे मकानों पर संकट बढ़ गया है। ग्राम सभा हरिहरपुर के मजरा नगला कोठी निवासी ममता कश्यप, पति संदीप व बच्चों के साथ लंबे अर्से से कच्चे मकान में जीवन यापन कर रही हैं। सोमवार रात 11 बजे अचानक मकान की कच्ची छत तेज धमाके के साथ ढह गई। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग एकत्रित हो गए। ममता के अनुसार कमरे में रखा गेहूं, रजाई, गद्दे, भूसा और गृहस्थी का अन्य जरूरी सामान मलबे में दब गया। बीडीसी प्रतिनिधि विवेक दीक्षित समेत अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
फोटो :26: खेत में बर्बाद हुई मक्का की फसल दिखाता किसान। संवाद
बारिश के बाद तेज हवाओं से मक्का की फसल बर्बाद
विशुनगढ़। बारिश के बाद चली तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी। क्षेत्र के ग्राम कुड़रा निवासी सुरेशचंद्र राजपूत, डॉ. अजय राजपूत और डॉ. धर्मवीर राजपूत ने बताया कि 18 बीघा मक्के की फसल नष्ट हो गई। वहीं, गांव के पप्पू राजपूत की चार बीघा बाजरे की फसल भी तेज हवाओं की चपेट में आकर बर्बाद हो गई। किसानों ने बताया कि भुट्टे तैयार हो चुके थे और अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। आलू का उचित भाव न मिलने से किसान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से फसलों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।