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फोटो 07- रायफल को दिखाते हेड मुहर्रिर देवेंद्र भदोरिया

Mon, 31 Aug 2020 12:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2020 12:09 AM IST
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गुरसहायगंज (कन्नौज)। सिपाही से लूटी गई राइफल 33 साल बाद थाने के शस्त्रागार में मिल गई। अभी इस राइफल के कारतूसों का पता नहीं चला है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सिपाही से ट्रक चालक और परिचालक ने राइफल लूटी थी। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद राइफल बरामद कर ली गई थी, लेकिन मालखाना के रिकार्ड में दर्ज नहीं हो सकी थी। जिससे राइफल की तलाश शुरू की गई। अब राइफल के मिलने की स्थिति स्पष्ट हो गई है।
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27 जून 2020 को अमर उजाला के प्रथम पेज पर कन्नौज में शस्त्रागार से राइफल और 309 कारतूसों के गायब होने की खबर प्रकाशित की गई थी। जिसका संज्ञान प्रदेश के डीजीपी ने स्वयं लिया था। एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने मामले की जांच शुरू कर राइफल बरामद होने के निर्देश दिए थे। तत्कालीन सीओ श्रीकांत प्रजापति ने मामले की जांच शुरू की थी। आखिरकार 33 साल गायब थ्री नॉट थ्री राइफल थाने के शस्त्रागार में रविवार को मिली तो पुलिसकर्मियों की चेहरों पर रौनक आ गई। गायब राइफल को ढूंढने के लिए मालखाना प्रभारी दो महीने से कन्नौज और फर्रुखाबाद जनपद की खाक छान रहे थे। एएसपी विनोद कुमार ने बताया कि दस्तावेजों में राइफल गायब चल रही थी। अब मालखाने के रेक भी दुरस्त करा दिए गए है।
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गुरसहायगंज। कोतवाली में तैनात हेड मुहर्रिर देवेंद्र भदोरिया ने बताया कि कोतवाली में तैनात आरक्षी संतोष कुमार शुक्ला से थ्री नॉट थ्री राइफल 11 जनवरी 1987 को कोतवाली के ग्राम सफियापुर के पास जीटी रोड किनारे ट्रक चालक देवेंद्र पाल शर्मा तत्कालीन पता निवासी ग्राम पनिहावर थाना चंदौसी जनपद अलीगढ़ और उसके खलासी कैलाश सिंह निवासी मोहल्ला अहीर पाड़ा थाना खुर्जा जिला बुलंदशहर ने उस समय रायफल लूट ली थी जब सिपाही गश्त कर रहे थे। उस समय फर्रुखाबाद जनपद के अधीन गुरसहायगंज कोतवाली थी। मामले की विवेचना कोतवाली के दरोगा विजय पांडे ने की थी और 11 जनवरी 1987 को ही राइफल बरामद कर 28 जनवरी 1987 को दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमे में चार्जशीट लगा दी थी। इसके बाद कोर्ट से रिलीज हुई राइफल सील कर स्थानीय कोतवाली के माल खाने में रख दी गई। निरीक्षण में एयर राइफल गायब दिखाई गई और तब से लगातार इसका पता नहीं लग सका। गत माह अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता के साथ जब प्रकाशित किया तो वरिष्ठ अधिकारियों ने इसको संज्ञान में लेते हुए इसकी तलाश के निर्देश दिए थे।
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कन्नौज। प्रथम विश्व युद्ध 1914 में थ्री नॉट थ्री नॉट राइफलों का इंग्लैंड और जर्मनी के सैनिकों ने प्रयोग किया था। अंग्रेजी शासनकाल में 1945 में थ्री नॉट थ्री राइफल यूपी पुलिस को दी गई थी। इसकी मारक क्षमता दो किलोमीटर तक है। इससे पहले पुलिस के पास मस्कट 410 बंदूक हुआ करती है। 80 के दशक में सिपाहियों को इंसास, एके-47 दे गईं। 2019 में यूपी पुलिस को जर्मनी की एमपी-5 राइफल दी गई हैं।
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