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सुधारक बनने से पहले बनना होगा साधक
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छिबरामऊ। ग्राम पलिया में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शुक्रवार को आचार्य राजेंद्र भाई ब्रह्मचारी महाराज ने गुरु की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि जब तक वक्ता, आयोजक ओर सेवक की कथनी और करनी एक नहीं होगी, तब तक समाज का सुधार संभव नहीं है।
आचार्य ने कहा कि जगत कल्याण के लिए सुधारक बनने से पहले एक अच्छा साधक बनना होगा। जैसे वृक्ष होगा तो छाया अवश्य मिलेगी, साधक बन जाओगे तो सुधारक स्वत: हो जाओगे। आपके सानिध्य में जो आएगा, आपके सात्विक गुणों से उसका आचरण स्वत: ठीक हो जाएगा।
आचार्य ने कहा कि जो स्वयं ठीक न हो, वह दूसरों को ठीक कैसे करेगा। उसे समझाने का भी अधिकार नहीं है। आज धर्मगुरु, पंडित, व्यास, सेवक, उपदेशक, भोगी, विलासी, स्वार्थी, निकम्मे, कामचोर, धोखेबाज दिख रहे हैं, तभी समाज में अशांति फैली है। जो खुद तृप्त न हुआ, वह दूसरों को तृप्त कैसे कर पाएगा। स्वयं सोया हुआ इंसान दूसरों को नहीं जगा सकता। आचार्य ने कहा कि समाज में सुधार के लिए स्वयं पहले हम सभी को सुधरना होगा।
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कथा के अंत में परीक्षित कृष्णबिहारी दुबे ने आरती कर प्रसाद वितरित कराया। इस मौके पर ग्राम प्रधान साधना दुबे, अनूप दुबे, शिवानंद दुबे, बालकृष्ण दीक्षित, आदित्य, विमला देवी, कल्पना दुबे समेत कई महिलाएं व पुरुष मौजूद रहे।
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आचार्य ने कहा कि जगत कल्याण के लिए सुधारक बनने से पहले एक अच्छा साधक बनना होगा। जैसे वृक्ष होगा तो छाया अवश्य मिलेगी, साधक बन जाओगे तो सुधारक स्वत: हो जाओगे। आपके सानिध्य में जो आएगा, आपके सात्विक गुणों से उसका आचरण स्वत: ठीक हो जाएगा।
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आचार्य ने कहा कि जो स्वयं ठीक न हो, वह दूसरों को ठीक कैसे करेगा। उसे समझाने का भी अधिकार नहीं है। आज धर्मगुरु, पंडित, व्यास, सेवक, उपदेशक, भोगी, विलासी, स्वार्थी, निकम्मे, कामचोर, धोखेबाज दिख रहे हैं, तभी समाज में अशांति फैली है। जो खुद तृप्त न हुआ, वह दूसरों को तृप्त कैसे कर पाएगा। स्वयं सोया हुआ इंसान दूसरों को नहीं जगा सकता। आचार्य ने कहा कि समाज में सुधार के लिए स्वयं पहले हम सभी को सुधरना होगा।
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कथा के अंत में परीक्षित कृष्णबिहारी दुबे ने आरती कर प्रसाद वितरित कराया। इस मौके पर ग्राम प्रधान साधना दुबे, अनूप दुबे, शिवानंद दुबे, बालकृष्ण दीक्षित, आदित्य, विमला देवी, कल्पना दुबे समेत कई महिलाएं व पुरुष मौजूद रहे।