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Kannauj News: इत्रनगरी में 10 हजार मरीज पर एक डॉक्टर
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कन्नौज। सियासी दावों और सरकारी वायदों के उलट इत्रनगरी कन्नौज में स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति है। सीएचसी-पीएचसी विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। गंभीर मरीजों को तो देखने वाला भी कोई नहीं है। डॉक्टरों की कमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मानक के मुताबिक एक हजार की आबादी पर एक अदद डॉक्टर होना चाहिए। यहां 10 हजार की आबादी पर बमुश्किल एक डॉक्टर है।
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत यह है कि पूरे जिले में सिर्फ दो ही महिला रोग विशेषज्ञ हैं। उनमें एक की तैनाती जिला अस्पताल की महिला विंग में है। दूसरे की तैनाती तिर्वा सीएचसी में है। किसी भी अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। जिले में विभागीय मानक के मुताबिक महिला रोग विशेषज्ञ की संख्या 34 होनी चाहिए। इसी तरह जिले भर की किसी सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। सीएमओ के अधीन तीन बाल रोग विशेषज्ञ हैं। तीनों को जिला अस्पताल में ही तैनात कर काम चलाया जा रहा है। विभागीय मानक के मुताबिक जिले में बाल रोग विशेषज्ञ की संख्या 22 होनी चाहिए। सीएचसी में 23 चिकित्सक होने चाहिए। उसके मुकाबले कुल नौ की ही तैनाती है।
डीएम शुभ्रांत शुक्ल का कहना है जिले में डॉक्टरों की कमी की जानकारी है। शासन को अवगत कराया जा चुका है। फिर भी जितने डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ हैं, उनकी मदद से बेहतर सुविधा मुहैया कराई जा रही है।
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सिर्फ ए डॉक्टर के हवाले है महिला विंग
जिला अस्पताल स्थित महिला विंग में रोजाना 70 से 80 गर्भवती महिलाएं पहुंचती हैं। यहां सिर्फ एक महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मनप्रीत कौर की ही तैनाती है। सिर्फ एक महिला रोग विशेषज्ञ को ही ओपीडी संभालने के साथ ही सर्जरी के साथ दूसरी जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। किसी दिन वह छुट्टी पर चली गईं तो दिनभर अफरातफरी रहती है। बुधवार को उनकी ओपीडी में महिलाओं की खासी भीड़ थी। बारी-बारी से दिखलाने के लिए गर्भवती महिलाओं को लंबा इंतजार भी करना पड़ा।
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आबादी के अनुसार संख्या है कम
स्वास्थ्य महकमे से जुड़े जिम्मेदार बताते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी मानक के मुताबिक हर एक हजार की आबादी पर कम से कम एक डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए। केंद्र सरकार की केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार की ओर से सदन में दिधए गए बयान के मुताबिक हर 854 मरीज पर एक डॉक्टर की तैनाती है। कन्नौज जिले की आबादी 18 लाख से ज्यादा है। ऐसी सूरत में यहां हर एक लाख आबादी पर 100 से ज्यादा डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए। कुल आबादी के लिए डॉक्टरों की संख्या 1800 से 1900 के बीच होनी चाहिए।
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ग्रामीण अस्पतालों का लेखाजोखा
-11 सीएचसी हैं जिले के आठ ब्लॉक में, उनमें डॉक्टरों की कमी
-24 महिला रोग विशेषज्ञ होनी चाहिए, सिर्फ एक ही तैनात
-19 बाल रोग विशेषज्ञ होने चाहिए, एक भी तैनात नहीं
-17 एनेस्थेटिस्ट होने चाहिए, सिर्फ एक की तैनाती
-11 सीएचसी में से आंखों के डॉक्टर तैनात नहीं
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बयान
फोटो:04-डॉ. शक्ति बसु।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। कई विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं। इसके लिए शासन को चिट्ठी भेजी गई है। शासन स्तर से ही तैनाती होनी है। उसके बाद सुविधा और बेहतर हो जाएगी।
-- डॉ. शक्ति बसु, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत यह है कि पूरे जिले में सिर्फ दो ही महिला रोग विशेषज्ञ हैं। उनमें एक की तैनाती जिला अस्पताल की महिला विंग में है। दूसरे की तैनाती तिर्वा सीएचसी में है। किसी भी अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। जिले में विभागीय मानक के मुताबिक महिला रोग विशेषज्ञ की संख्या 34 होनी चाहिए। इसी तरह जिले भर की किसी सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। सीएमओ के अधीन तीन बाल रोग विशेषज्ञ हैं। तीनों को जिला अस्पताल में ही तैनात कर काम चलाया जा रहा है। विभागीय मानक के मुताबिक जिले में बाल रोग विशेषज्ञ की संख्या 22 होनी चाहिए। सीएचसी में 23 चिकित्सक होने चाहिए। उसके मुकाबले कुल नौ की ही तैनाती है।
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डीएम शुभ्रांत शुक्ल का कहना है जिले में डॉक्टरों की कमी की जानकारी है। शासन को अवगत कराया जा चुका है। फिर भी जितने डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ हैं, उनकी मदद से बेहतर सुविधा मुहैया कराई जा रही है।
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सिर्फ ए डॉक्टर के हवाले है महिला विंग
जिला अस्पताल स्थित महिला विंग में रोजाना 70 से 80 गर्भवती महिलाएं पहुंचती हैं। यहां सिर्फ एक महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मनप्रीत कौर की ही तैनाती है। सिर्फ एक महिला रोग विशेषज्ञ को ही ओपीडी संभालने के साथ ही सर्जरी के साथ दूसरी जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। किसी दिन वह छुट्टी पर चली गईं तो दिनभर अफरातफरी रहती है। बुधवार को उनकी ओपीडी में महिलाओं की खासी भीड़ थी। बारी-बारी से दिखलाने के लिए गर्भवती महिलाओं को लंबा इंतजार भी करना पड़ा।
आबादी के अनुसार संख्या है कम
स्वास्थ्य महकमे से जुड़े जिम्मेदार बताते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी मानक के मुताबिक हर एक हजार की आबादी पर कम से कम एक डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए। केंद्र सरकार की केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार की ओर से सदन में दिधए गए बयान के मुताबिक हर 854 मरीज पर एक डॉक्टर की तैनाती है। कन्नौज जिले की आबादी 18 लाख से ज्यादा है। ऐसी सूरत में यहां हर एक लाख आबादी पर 100 से ज्यादा डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए। कुल आबादी के लिए डॉक्टरों की संख्या 1800 से 1900 के बीच होनी चाहिए।
ग्रामीण अस्पतालों का लेखाजोखा
-11 सीएचसी हैं जिले के आठ ब्लॉक में, उनमें डॉक्टरों की कमी
-24 महिला रोग विशेषज्ञ होनी चाहिए, सिर्फ एक ही तैनात
-19 बाल रोग विशेषज्ञ होने चाहिए, एक भी तैनात नहीं
-17 एनेस्थेटिस्ट होने चाहिए, सिर्फ एक की तैनाती
-11 सीएचसी में से आंखों के डॉक्टर तैनात नहीं
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फोटो:04-डॉ. शक्ति बसु।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। कई विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं। इसके लिए शासन को चिट्ठी भेजी गई है। शासन स्तर से ही तैनाती होनी है। उसके बाद सुविधा और बेहतर हो जाएगी।