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Kannauj News: पूर्णिमा से अमावस्या तक पितरों को जलदान
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छिबरामऊ/कन्नौज। महादेवी घाट पर सामूहिक तर्पण का आयोजन शनिवार को किया गया। यहां विधिविधान से आचार्यों ने पितरों की आत्मशांति के लिए तर्पण कराया। इसी प्रकार पितरों की प्रसन्नता और उनके आशीर्वाद से घर में सुख-समृद्धि, शांति व आरोग्य की कामना को लेकर शक्तिपीठ गमा देवी मंदिर में सामूहिक तर्पण कराया गया। मंदिर के पुजारी पंडित बनारसी दास शास्त्री ने श्रद्धालुओं को विधि-विधान से तर्पण कराया और पितृपक्ष के महत्व की जानकारी दी।
पंडित बनारसी दास शास्त्री ने बताया कि पितरों को अदृश्य सहायक माना गया है। उनकी प्रसन्नता के लिए श्रद्धापूर्वक तर्पण और श्राद्ध करना चाहिए। पूर्णिमा से अमावस्या तक पितरों के लिए तर्पण किया जा सकता है। जिन पूर्वजों का निधन जिस तिथि को हुआ हो, उसी तिथि पर उनका श्राद्ध करना चाहिए। मृत्यु की तिथि ज्ञात न होने पर महिलाओं के लिए नवमी और पुरुषों के लिए अमावस्या को श्राद्ध करने की परंपरा है। आकस्मिक मृत्यु होने पर चतुर्दशी को श्राद्ध किया जाता है।
उन्होंने बताया कि तर्पण के लिए फूल या पीतल की थाली का प्रयोग करना चाहिए। देवताओं के लिए पूर्व, दिव्य मनुष्यों के लिए उत्तर और पूर्वजों के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करने की परंपरा है। ब्राह्मण भोज के लिए पत्तल में भोजन कराना श्रेष्ठ माना गया है। भोजन में गाय के दूध, दही और घी से बने पदार्थों को प्राथमिकता देने की बात कही।
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उन्होंने रिफाइंड और पाम ऑयल से बने पदार्थों का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी। शनिवार को मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से तर्पण कर पितरों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान रामू गुप्ता, अरुण राजपूत, अनिल कौशल, रवि तिवारी आदि मौजूद रहे।
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पंडित बनारसी दास शास्त्री ने बताया कि पितरों को अदृश्य सहायक माना गया है। उनकी प्रसन्नता के लिए श्रद्धापूर्वक तर्पण और श्राद्ध करना चाहिए। पूर्णिमा से अमावस्या तक पितरों के लिए तर्पण किया जा सकता है। जिन पूर्वजों का निधन जिस तिथि को हुआ हो, उसी तिथि पर उनका श्राद्ध करना चाहिए। मृत्यु की तिथि ज्ञात न होने पर महिलाओं के लिए नवमी और पुरुषों के लिए अमावस्या को श्राद्ध करने की परंपरा है। आकस्मिक मृत्यु होने पर चतुर्दशी को श्राद्ध किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि तर्पण के लिए फूल या पीतल की थाली का प्रयोग करना चाहिए। देवताओं के लिए पूर्व, दिव्य मनुष्यों के लिए उत्तर और पूर्वजों के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करने की परंपरा है। ब्राह्मण भोज के लिए पत्तल में भोजन कराना श्रेष्ठ माना गया है। भोजन में गाय के दूध, दही और घी से बने पदार्थों को प्राथमिकता देने की बात कही।
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उन्होंने रिफाइंड और पाम ऑयल से बने पदार्थों का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी। शनिवार को मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से तर्पण कर पितरों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान रामू गुप्ता, अरुण राजपूत, अनिल कौशल, रवि तिवारी आदि मौजूद रहे।