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अब मरहम लगाने की कवायद

Wed, 02 Mar 2016 12:10 AM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज Updated Wed, 02 Mar 2016 12:10 AM IST
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Now the healer exercise

वर्ष 2015 में कुदरत के कहर से बर्बाद हुई मक्का और

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धान की फसल बोने वाले नौ हजार 21 किसानों के लिए खुशखबरी है। इन्हें संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (फसल बीमा योजना) के तहत क्लेम (क्षतिपूर्ति) की चार करोड़ 60 लाख रुपये धनराशि का भुगतान बीमा कंपनी ने कर दिया है। ये रुपये सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजे गए हैं।

कन्नौज जनपद में वर्ष 14 में अमर उजाला ने फसल बीमा योजना को लेकर जन जागरूकता अभियान चलाया था। इसके बाद किसानों तक इस योजना की जानकारी पहुंची और उन्होंने फसलों का बीमा कराने की पहल शुरू कराई। जिलाधिकारी के स्तर से कृषि विभाग के अफसरों के भी पेच कसे गए थे।

इस मुहिम का सकारात्मक असर किसानों को अब देखने को मिला है। उप निदेशक कृषि डा. राजेश कुमार ने बताया कि खरीफ के सीजन में बीते वर्ष मक्का की फसल में 17,047 किसानों ने फसल बीमा कराया था। किसानों का कुल 19,013 हेक्टेयर कृषि क्षेत्रफल बीमा योजना में कवर हुआ था। इनमें से 5,641 किसान बीमा के लाभ के दायरे में आए हैं।

इन किसानों को क्लेम के तौर पर दो करोड़ 49 लाख 47 हजार 211 रुपये की धनराशि प्रदान की गई है। इसी तरह धान बोने वाले 5,477 किसानों ने अपना बीमा कराया था। इन किसानों का कुल 3,299 हेक्टेयर कृषि क्षेत्रफल बीमा योजना से कवर था। क्राप कटिंग रिपोर्ट और सर्वे के बाद इनमें से 3,380 किसानों को लाभ के मानकों के अनुरूप पाया गया।

इस पर बीमाधारक इन किसानों को क्लेम के तौर पर दो करोड़ 11 लाख नौ हजार 846 रुपये का भुगतान किया गया है। उन्होंने बताया कि क्लेम की धनराशि का भुगतान आनलाइन किसानों के खाते में भेजा गया है। किसान बैंक जाकर खाता चेक करें और क्लेम की धनराशि निकालकर उसका उपयोग कृषि कार्य में करें।

यदि किसी बैंक में कोई समस्या हो तो उनके कार्यालय में आकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के क्रेडिट कार्ड हैं उनका हर सीजन में फसल बीमा करने की जिम्मेदारी बैंकों को दी जा चुकी है। कहा कि यदि कोई किसान किसान क्रेडिट कार्ड धारक नहीं है तो भी वह अपनी फसल का बीमा करा सकता है।

इसके लिए वह उनके दफ्तर आकर जानकारी हासिल कर सकता है। उधर, उप निदेशक कृषि ने बताया कि गेहूं की फसल बोने वाले जिन किसानों ने सरकारी बीज खरीदा है उन्हें जनपद के सूखा ग्रस्त घोषित से अतिरिक्त अनुदान मिलेगा। शासन से बजट प्राप्त हो गया है। अनुदान की धनराशि सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जा रही है।

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