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एक्सप्रेसवे पर यूपीडा के पेट्रोल पंपों पर मिलेगी नाइट्रोजन
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे मौत का रास्ता बन गया है। 11 माह में जिले में एक्सप्रेसवे पर 85 लोगों की मौत हो गई है। हादसों से सबक लेते हुए यूपीडा ने नई पहल की है। गुजरने वाले लोगों को जागरूक कर उनके वाहनों के टायर-ट्यूब में नाइट्रोजन डलवाई जाएगी। इससे एक्सप्रेसवे पर टायर-ट्यूब के फटने से होने वाले हादसों में कमी आएगी। वाहनों के टायर-ट्यूब में नाइट्रोजन एक्सप्रेसवे पर यूपीडा के पेट्रोल पंपों के अलावा कुछ प्वाइंट बनाकर डाली जाएगी।
पिछले 11 माह में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 241 हादसों में 85 लोगों की मौत हुई। 52 फीसदी हादसे तेज रफ्तार में टायर-ट्यूब फटने से हुए हैं। अब यूपीडा के अधिकारियों ने टायर-ट्यूब में साधारण हवा की जगह नाइट्रोजन डलवाने की व्यवस्था का फैसला लिया है। दरअसल साधारण हवा के साथ टायर में आर्द्रता बढ़ जाती है। इससे टायर को नुकसान होने की आशंका रहती है।
टायर के प्रेशर, रिम व एलॉय व्हील पर असर पड़ता है। तेज रफ्तार और लंबी दूरी के सफर के दौरान टायर घर्षण से गर्म होकर फट जाते हैं। इससे बड़े हादसे हो जाते हैं। नाइट्रोजन के इस्तेमाल से ऑक्सीजन फीकी पड़ जाती है। सेफ्टी, हैंडलिंग के लिहाज से भी नाइट्रोजन गैस उपयोगी होती है। यह टायर को ठंडा रखेगी। ऐसे में टायर-ट्यूब में नाइट्रोजन गैस डलवा ली जाए तो फटने की समस्या से निजात मिल जाएगी। यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी मनोहर सिंह ने बताया कि जल्द ही यूपीडा के पेट्रोल पंपों और अस्थायी प्वाइंट बनाकर टायर-ट्यूब में नाइट्रोजन डलवाई जाएगी। इससे हादसों की रफ्तार पर ब्रेक लगेगी।
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50 रुपये तक होती है महंगी
कार या बाइक के टायर-टयूब में साधारण हवा मुफ्त में पड़ जाती है। नाइट्रोजन भरवाने में 43 से 50 रुपये प्रति टायर के हिसाब से देना होता है। महंगी होने के बावजूद नाइट्रोजन गैस के कई फायदे भी हैं। यूपीडा नाइट्रोजन के प्रचार-प्रसार के लिए अभियान भी चलाएगा।
रेसिंग कारों और बाइकों में इस्तेमाल होती है नाइट्रोजन
साधारण हवा की तुलना में नाइट्रोजन लंबे समय तक टिकती है। इसे बार-बार भरवाने की जरूरत नहीं होती। रेस में चलने वाली गाड़ियों से इसका इस्तेमाल किया जाता है। इससे रेस के वाहनों के टायर फटते नहीं हैं।
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पिछले 11 माह में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 241 हादसों में 85 लोगों की मौत हुई। 52 फीसदी हादसे तेज रफ्तार में टायर-ट्यूब फटने से हुए हैं। अब यूपीडा के अधिकारियों ने टायर-ट्यूब में साधारण हवा की जगह नाइट्रोजन डलवाने की व्यवस्था का फैसला लिया है। दरअसल साधारण हवा के साथ टायर में आर्द्रता बढ़ जाती है। इससे टायर को नुकसान होने की आशंका रहती है।
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टायर के प्रेशर, रिम व एलॉय व्हील पर असर पड़ता है। तेज रफ्तार और लंबी दूरी के सफर के दौरान टायर घर्षण से गर्म होकर फट जाते हैं। इससे बड़े हादसे हो जाते हैं। नाइट्रोजन के इस्तेमाल से ऑक्सीजन फीकी पड़ जाती है। सेफ्टी, हैंडलिंग के लिहाज से भी नाइट्रोजन गैस उपयोगी होती है। यह टायर को ठंडा रखेगी। ऐसे में टायर-ट्यूब में नाइट्रोजन गैस डलवा ली जाए तो फटने की समस्या से निजात मिल जाएगी। यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी मनोहर सिंह ने बताया कि जल्द ही यूपीडा के पेट्रोल पंपों और अस्थायी प्वाइंट बनाकर टायर-ट्यूब में नाइट्रोजन डलवाई जाएगी। इससे हादसों की रफ्तार पर ब्रेक लगेगी।
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50 रुपये तक होती है महंगी
कार या बाइक के टायर-टयूब में साधारण हवा मुफ्त में पड़ जाती है। नाइट्रोजन भरवाने में 43 से 50 रुपये प्रति टायर के हिसाब से देना होता है। महंगी होने के बावजूद नाइट्रोजन गैस के कई फायदे भी हैं। यूपीडा नाइट्रोजन के प्रचार-प्रसार के लिए अभियान भी चलाएगा।
रेसिंग कारों और बाइकों में इस्तेमाल होती है नाइट्रोजन
साधारण हवा की तुलना में नाइट्रोजन लंबे समय तक टिकती है। इसे बार-बार भरवाने की जरूरत नहीं होती। रेस में चलने वाली गाड़ियों से इसका इस्तेमाल किया जाता है। इससे रेस के वाहनों के टायर फटते नहीं हैं।