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नाइट्रोजन की कमी धान के लिए घातक
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
Updated Tue, 11 Oct 2016 11:50 PM IST
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धान की फसल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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इस साल अच्छी बारिश होने से किसानों के चेहरे कुछ दिनों पहले तक खिले हुए थे। बारिश से किसानों को उम्मीद थी, कि इस बार अच्छी उपज होगी, लेकिन हाल में हुई बरसात से धान की फसल पर एक बार फिर बीमारी ने हमला बोल दिया है। धान के पौधे पर पीला रंग का धब्बा बनने लगा है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो यह बीमारी नाइट्रोजन की कमी से होती है।
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कृषि अधिकारी नीरज राज बताते हैं कि कम और ज्यादा बरसात दोनों हालत में यह बीमारी धान की फसल को अपनी चपेट में लेती है। धान में बालियां आने पर यह बीमारी लगती है। यदि समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो धान की बालियों में दाना कम बनता है।
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नाइट्रोजन की कमी पौधों में क्लोरोफिल समाप्त कर देता है। जिसके चलते फसल कमजोर होकर गिरने लगेगी। किसानों को चाहिए कि वह खेतों में नाइट्रोजन की कमी को दूर करें। किसानों को खेतों में नीम जैविक आधारित कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए।
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किसान रामेंद्र ने बताया कि उन्होंने इस बार छह बीघा धान की फसल बोई है। सबकुछ ठीक चल रहा था, ऐसे में ये पीला धब्बा रोग लग गया है। फसल खेतों में ही गिर रही है। किसान राकेश वर्मा बताते हैं कि उन्होंने आठ बीघा धान की फसल बोई है। बाली आने तक तो फसल ठीक थी, लेकिन पिछले सप्ताह में पत्तों में पीला रंग आना शुरू हो गया है। जिसके चलते फसल गिर रही है।
नाइट्रोजन की कमी बनी समस्या
खेत में यदि पानी अधिक हो जाए तो भी नाइट्रोजन की कमी हो जाती है और यदि पानी कम हो तो भी नाइट्रोजन की कमी हो जाती है। कृषि अधिकारी नीरज राज की माने तो बहुत ज्यादा बरसात के बाद एकदम से बारिश बंद हो जाती है और जब कुछ दिनों तक बारिश नहीं होती है। तो मिट्टी सूखने से खेत में नाइट्रोजन की कमी होती है। ऐसे में अन्य साधन से खेत तक पानी पहुंचाएं। उन्होंने बताया कि यदि पानी अधिक मात्रा में है तो उसे ज्यादा दिन तक न रुकने दें उसे भी खेत से बाहर निकालने की की तैयारी करें।