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Kannauj News: 15 साल से सूखा पड़ा मिर्जापुर रजवाहा
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हसेरन। ब्लॉक क्षेत्र का मिर्जापुर-राजपुर रजबाहा 15 वर्षों से सूखा पड़ा है। इसके बावजूद नहर विभाग हर वर्ष रजबाहा की सफाई और मरम्मत के नाम पर बजट खर्च होने का दावा करता रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विभागीय अभिलेखों में सफाई दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया, जबकि धरातल पर रजबाहा बदहाल स्थिति में पड़ा है।
20 किलोमीटर लंबे इस रजबाहा से कभी हजारों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती थी लेकिन वर्षों से पानी न आने के कारण किसान निजी नलकूपों और डीजल पंपों के सहारे खेती करने को मजबूर हैं। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण श्याम सिंह गौड़, चंगू कुमार, महेंद्र प्रताप तथा संदीप प्रजापति का कहना है कि रजबाहा के कई हिस्सों में अतिक्रमण हो चुका है। कहीं नहर की जमीन पर लकड़ी व अन्य सामान की दुकानें बना ली गई हैं। तो कहीं अंतिम छोर टेल को जोतकर खेत बना दिए गए हैं। कई स्थानों पर नहर झाड़ियों और घास-फूस से पूरी तरह पट चुकी है, जिससे पानी का प्रवाह संभव नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि शिकायत के बाद कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिससे सिंचाई के साथ-साथ पेयजल संकट भी गहराता जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि रजबाहा की नियमित सफाई कराकर उसमें पानी छोड़ा जाए तो हजारों किसानों को राहत मिल सकती है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पिछले वर्षों में सफाई के नाम पर खर्च हुए बजट का ब्योरा सार्वजनिक करने, रजबाहा से अतिक्रमण हटाने और जल्द पानी का संचालन शुरू कराने की मांग की है।
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अधिशासी अभियंता सूर्यमणि सिंह ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। यदि रजबाहा की ऐसी स्थिति है तो मौके का निरीक्षण कराया जाएगा। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई करते हुए रजबाहा में पानी का संचालन शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
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20 किलोमीटर लंबे इस रजबाहा से कभी हजारों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती थी लेकिन वर्षों से पानी न आने के कारण किसान निजी नलकूपों और डीजल पंपों के सहारे खेती करने को मजबूर हैं। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण श्याम सिंह गौड़, चंगू कुमार, महेंद्र प्रताप तथा संदीप प्रजापति का कहना है कि रजबाहा के कई हिस्सों में अतिक्रमण हो चुका है। कहीं नहर की जमीन पर लकड़ी व अन्य सामान की दुकानें बना ली गई हैं। तो कहीं अंतिम छोर टेल को जोतकर खेत बना दिए गए हैं। कई स्थानों पर नहर झाड़ियों और घास-फूस से पूरी तरह पट चुकी है, जिससे पानी का प्रवाह संभव नहीं है।
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ग्रामीणों ने बताया कि शिकायत के बाद कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिससे सिंचाई के साथ-साथ पेयजल संकट भी गहराता जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि रजबाहा की नियमित सफाई कराकर उसमें पानी छोड़ा जाए तो हजारों किसानों को राहत मिल सकती है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पिछले वर्षों में सफाई के नाम पर खर्च हुए बजट का ब्योरा सार्वजनिक करने, रजबाहा से अतिक्रमण हटाने और जल्द पानी का संचालन शुरू कराने की मांग की है।
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अधिशासी अभियंता सूर्यमणि सिंह ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। यदि रजबाहा की ऐसी स्थिति है तो मौके का निरीक्षण कराया जाएगा। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई करते हुए रजबाहा में पानी का संचालन शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।