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Kannauj News: खेलने-कूदने की उम्र में कुपोषण से जंग लड़ रहा बचपन

Thu, 17 Apr 2025 12:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज Updated Thu, 17 Apr 2025 12:27 AM IST
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Milk, butter, eggs and salad are missing from the plate
-जिला अस्पताल के एनआरसी वार्ड में भर्ती बच्चे। संवाद - फोटो : -जिला अस्पताल के एनआरसी वार्ड में भर्ती बच्चे। संवाद
महोबा। जिले में ढाई हजार से अधिक मासूम बच्चों का बचपन कुपोषण की चपेट में है। खेलने-कूदने और जिंदगी की शुरुआत करने की उम्र में यह बच्चे सेहतमंद बनने के लिए कुपोषण से जंग लड़ रहे हैं। इन बच्चों का वजन औसत से कम है। कुपोषण से पीड़ित बच्चों में ग्रामीण क्षेत्र के मासूमों की संख्या सर्वाधिक हैं।
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से संचालित जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुल 69,872 बच्चे पंजीकृत हैं। इन केंद्रों के माध्यम से गर्भवती, धात्री महिलाओं व बच्चों को पोषाहार दिया जाता है। ताकि, उनको पौष्टिकता से भरपूर जीवन मिल सके। इसके बावजूद कई बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। ऐसे बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर समय-समय पर बच्चों का वजन और देखभाल की जाती है। साथ ही गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचाया जाता है। अभिभावकों को बच्चों के लिए दलिया, दाल, तेल आदि पौष्टिक आहार भी उपलब्ध कराया जाता है। इसके बाद भी जिलेभर में 2,552 बच्चे कुपोषण के बीच अपना जीवन गुजार रहे हैं। इसमें 345 बच्चे अति कुपोषित और 2,207 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में हैं। उधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी हर्षवर्धन नायक का कहना है कि बच्चों को कुपोषण की श्रेणी से बाहर लाने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। ताकि, यह बच्चे पूरी तरह स्वस्थ रहें।
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पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती पांच बच्चे
महोबा। जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में इस समय पांच कुपोषित बच्चे भर्ती हैं। इन बच्चों की हालत नाजुक है। यह बच्चे अल्प वजन व दुर्बलता की समस्या से जूझ रहे हैं। बच्चों के हालत से उनके अभिभावक भी परेशान हैं। कुपोषण के कारण आई शारीरिक कमजोरी के कारण डॉक्टरों ने इन बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की सलाह दी थी। तब परिजन उन्हें जिला अस्पताल लाए।
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अल्प वजन की शिकायत में आई कमी
महोबा। नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे के अनुसार वर्ष 2015-2016 के सापेक्ष अब एनीमिया, बौनापन, अल्प वजन और सूखापन में सुधार दर्ज किया गया है। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की शिकायत में 5.1 प्रतिशत का सुधार हुआ है। बच्चों में बौनापन की शिकायत में 6.6 प्रतिशत का सुधार हुआ है। कम वजन की शिकायत 7.4 प्रतिशत का सुधार हुआ है। बच्चों में सूखापन की शिकायत 0.6 प्रतिशत का सुधार हुआ है।
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