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मेडिकल कॉलेज : आंख में एंट्रोपियन का सफल ऑपरेशन
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तिर्वा। अब इत्रनगरी के लोगों को आंख की जटिल समस्याओं के लिए कानपुर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। राजकीय मेडिकल कॉलेज में आंख में एंट्रोपियन का इलाज भी शुरू हो गया है। रविवार को नेत्र विभाग की टीम ने 65 वर्षीय महिला की आंख में एंट्रोपियन का सफल ऑपरेशन किया।
कस्बे निवासी अख्तरी (65) की निचली पलक अंदर की ओर मुड़ी हुई थी, जिससे उन्हें लगातार आंखों में जलन, असहजता और संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
परिजन उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग पहुंचे। वहां पर पर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शैली चौधरी ने देखा और ऑपरेशन कराने की सलाह दी। शुक्रवार को विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक रंजन की निगरानी में डॉ. शैली चौधरी, डॉ. करिश्मा सिंह, डॉ. सरिता कुशवाहा और डॉ. आरती डगर ने ऑपरेशन किया।
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इस स्थिति से मरीज को लगातार जलन, आंसू बहना, धुंधलापन और संक्रमण की शिकायत रहती है। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है, जैसे उम्र से संबंधित मांसपेशियों की कमजोरी, पलकों की पुरानी चोट, सूजन या संक्रमण और कभी-कभी यह आनुवंशिक भी हो सकती है।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में इस तरह की उन्नत सर्जिकल तकनीकों के माध्यम से रोगियों को अब उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। भविष्य में और जटिल नेत्र रोगों का उपचार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे मरीजों को रेफर नहीं होना पड़ेगा।
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कस्बे निवासी अख्तरी (65) की निचली पलक अंदर की ओर मुड़ी हुई थी, जिससे उन्हें लगातार आंखों में जलन, असहजता और संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
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परिजन उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग पहुंचे। वहां पर पर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शैली चौधरी ने देखा और ऑपरेशन कराने की सलाह दी। शुक्रवार को विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक रंजन की निगरानी में डॉ. शैली चौधरी, डॉ. करिश्मा सिंह, डॉ. सरिता कुशवाहा और डॉ. आरती डगर ने ऑपरेशन किया।
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इस स्थिति से मरीज को लगातार जलन, आंसू बहना, धुंधलापन और संक्रमण की शिकायत रहती है। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है, जैसे उम्र से संबंधित मांसपेशियों की कमजोरी, पलकों की पुरानी चोट, सूजन या संक्रमण और कभी-कभी यह आनुवंशिक भी हो सकती है।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में इस तरह की उन्नत सर्जिकल तकनीकों के माध्यम से रोगियों को अब उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। भविष्य में और जटिल नेत्र रोगों का उपचार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे मरीजों को रेफर नहीं होना पड़ेगा।