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मंडी शुल्क के विरोध में व्यापारियों का प्रदर्शन
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Thu, 10 Dec 2015 11:52 PM IST
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उत्तर प्रदेश प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने खाद्य
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तेलों, काजू, किशमिश, छुहारा, बादाम, काली मिर्च आदि को मंडी शुल्क की
परिधि में लेने पर नाराजगी जताई है। गुरुवार को व्यापारी नेताओं ने
कलक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष रामजी अग्रवाल, जिला महामंत्री पवन अवस्थी, जिला कोषाध्यक्ष रमेश मेहरोत्रा, अरविंद दुबे और युवा व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष आशुतोष मिश्रा आदि ने जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में कहा कि 19 नवंबर को जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश सरकार ने सभी खाद्य तेलों एवं अन्य खाद्य पदार्थों को मंडी समिति की परिधि में ले लिया है।
इस पर ढाई फीसदी मंडी शुल्क लगा दिया है, जबकि खाद्य तेल का 80 फीसदी हिस्सा विदेशों से आता है। पाम आयल विदेशों से आकर यदि रिफाइन न हो तो उत्तर प्रदेश में तेल का अकाल पड़ जाएगा। कहा कि मूंगफली, सोयाबीन और सरसों का तेल भी राजस्थान और मध्य प्रदेश से आता है।
बताया कि इसी प्रकार सूखे मेवे जैसे बादाम, काजी, किशमिश, छुहारा आदि आइटम थोड़ा दक्षिण भारत से और शेष विदेशों से आते हैं। काली मिर्च श्रीलंका से आती है। ऐसे में इन पर मंडी शुल्क लगाना कहां का न्याय है। आरोप लगाया कि ऐसा मालूम पड़ता है कि प्रदेश सरकार मंडी अधिनियम 1964 को ताक में रखकर केवल राजस्व वसूलने के लिए जिस पर मंडी शुल्क नहीं लगाना चाहिए, उस पर भी लगा रही है।
मंडी शुल्क के नाम पर व्यापक भ्रष्टाचार बढ़ेगा। अभी भी मंडी समितियों के भ्रष्टाचार की जानकारी शासन को है। व्यापारियों का कहना है कि सुपारी पर मंडी शुल्क लगाया गया था, जिसे हटा दिया गया, पर उसका सेस अभी भी लागू है। ताकि सुपारी वाले व्यापारी मंडी अफसरों के कब्जे में रहें।
व्यापारियों ने कहा कि नियमानुसार जिस पर टैक्स लगता है उसी पर सेस लगता है। व्यापारियों ने मांग की कि मनमाने तरीके से जो चीजें मंडी समिति की परिधि में लाई गई हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से मुक्त किया जाए। साथ ही सुपारी पर से सेस हटाकर व्यापारी को राहत प्रदान की जाए।
व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष रामजी अग्रवाल, जिला महामंत्री पवन अवस्थी, जिला कोषाध्यक्ष रमेश मेहरोत्रा, अरविंद दुबे और युवा व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष आशुतोष मिश्रा आदि ने जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में कहा कि 19 नवंबर को जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश सरकार ने सभी खाद्य तेलों एवं अन्य खाद्य पदार्थों को मंडी समिति की परिधि में ले लिया है।
इस पर ढाई फीसदी मंडी शुल्क लगा दिया है, जबकि खाद्य तेल का 80 फीसदी हिस्सा विदेशों से आता है। पाम आयल विदेशों से आकर यदि रिफाइन न हो तो उत्तर प्रदेश में तेल का अकाल पड़ जाएगा। कहा कि मूंगफली, सोयाबीन और सरसों का तेल भी राजस्थान और मध्य प्रदेश से आता है।
बताया कि इसी प्रकार सूखे मेवे जैसे बादाम, काजी, किशमिश, छुहारा आदि आइटम थोड़ा दक्षिण भारत से और शेष विदेशों से आते हैं। काली मिर्च श्रीलंका से आती है। ऐसे में इन पर मंडी शुल्क लगाना कहां का न्याय है। आरोप लगाया कि ऐसा मालूम पड़ता है कि प्रदेश सरकार मंडी अधिनियम 1964 को ताक में रखकर केवल राजस्व वसूलने के लिए जिस पर मंडी शुल्क नहीं लगाना चाहिए, उस पर भी लगा रही है।
मंडी शुल्क के नाम पर व्यापक भ्रष्टाचार बढ़ेगा। अभी भी मंडी समितियों के भ्रष्टाचार की जानकारी शासन को है। व्यापारियों का कहना है कि सुपारी पर मंडी शुल्क लगाया गया था, जिसे हटा दिया गया, पर उसका सेस अभी भी लागू है। ताकि सुपारी वाले व्यापारी मंडी अफसरों के कब्जे में रहें।
व्यापारियों ने कहा कि नियमानुसार जिस पर टैक्स लगता है उसी पर सेस लगता है। व्यापारियों ने मांग की कि मनमाने तरीके से जो चीजें मंडी समिति की परिधि में लाई गई हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से मुक्त किया जाए। साथ ही सुपारी पर से सेस हटाकर व्यापारी को राहत प्रदान की जाए।