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Kannauj News: रोहिंग्या होने की जांच करने पहुंची एलआईयू
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तालग्राम। रोहिंग्या होने के आरोप की शिकायत पर शनिवार को प्रशासन जांच में जुट गया। एलआईयू के कर्मचारी ने कूकापुर गांव पहुंच कर जांच की है। यह परिवार 25 सालों तक जरामऊ अलमापुर में भी रह चुके हैं। गांव में विरोध होने पर लोग कूकापुर आकर रहने लगे हैं।
एलआईयू कर्मचारी ने इस परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और आधार कार्ड आदि देखे। सिपाही ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया है। वहीं, गांव के लोगों का कहना है कि 10-12 सालों से यह लोग गांव में बस गए हैं। इस परिवार में इस समय 30 सदस्य हैं। लोगों का आरोप है कि जब यह लोग गांव में रहने लगे तब से अपराध बढ़ गए हैं। प्रधान प्रतिनिधि श्रीकृष्ण वर्मा का कहना है कि प्रशासन गंभीरता से जांच करें। आधार कार्ड बने है उनमें कुछ फर्जी लग रहे है। पिता का नाम किसी धर्म से मिलता है तो बेटा का नाम किसी दूसरे धर्म से मिल रहा है, इससे संदेह बना है।
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12 साल पहले कूकापुर आए थे संदिग्ध रोहिंग्या
तालग्राम। रोहिंग्या होने का आरोप लगा कर जिस परिवार की शिकायत की गई है, वह 12 साल पहले कूकापुर आकर ग्रामसभा की जमीन कब्जा बस गए थे। इस समय इस परिवार में 30 सदस्य हैं। उनसे बात की गई तो उन्होंने बताया कि यहां आने से पहले वह पड़ोसी ग्राम पंचायत जरामऊ अलमापुर में 25 साल तक रहे थे। कूकापुर के पूर्व प्रधान मोहम्मद बाकर जिन का आठ साल पहले निधन हो चुका है। उनके संपर्क में आने पर उन्होंने शरण दी और ग्राम सभा की गांव से बाहर जमीन दी थी। पूर्व प्रधान ने ही आधार कार्ड भी बनाए और सरकारी योजनाओं का लाभ देने का आश्वासन दिया था। संवाद
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एलआईयू कर्मचारी ने इस परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और आधार कार्ड आदि देखे। सिपाही ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया है। वहीं, गांव के लोगों का कहना है कि 10-12 सालों से यह लोग गांव में बस गए हैं। इस परिवार में इस समय 30 सदस्य हैं। लोगों का आरोप है कि जब यह लोग गांव में रहने लगे तब से अपराध बढ़ गए हैं। प्रधान प्रतिनिधि श्रीकृष्ण वर्मा का कहना है कि प्रशासन गंभीरता से जांच करें। आधार कार्ड बने है उनमें कुछ फर्जी लग रहे है। पिता का नाम किसी धर्म से मिलता है तो बेटा का नाम किसी दूसरे धर्म से मिल रहा है, इससे संदेह बना है।
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12 साल पहले कूकापुर आए थे संदिग्ध रोहिंग्या
तालग्राम। रोहिंग्या होने का आरोप लगा कर जिस परिवार की शिकायत की गई है, वह 12 साल पहले कूकापुर आकर ग्रामसभा की जमीन कब्जा बस गए थे। इस समय इस परिवार में 30 सदस्य हैं। उनसे बात की गई तो उन्होंने बताया कि यहां आने से पहले वह पड़ोसी ग्राम पंचायत जरामऊ अलमापुर में 25 साल तक रहे थे। कूकापुर के पूर्व प्रधान मोहम्मद बाकर जिन का आठ साल पहले निधन हो चुका है। उनके संपर्क में आने पर उन्होंने शरण दी और ग्राम सभा की गांव से बाहर जमीन दी थी। पूर्व प्रधान ने ही आधार कार्ड भी बनाए और सरकारी योजनाओं का लाभ देने का आश्वासन दिया था। संवाद
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