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‘कथा के रसपान से मिलता पुण्य’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Tue, 05 Jan 2016 12:43 AM IST
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शहर के ऐतिहासिक सिद्धपीठ मां फूलमती मंदिर में चल
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रहे सतचंडी महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा में भक्तों की भीड़ उमड़ी।
श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए गोपालकृष्णजी महाराज ने कहा कि ज्ञान और
वैराग्य की त्रिवेणी में भक्तों को आनंदित होना चाहिए।
श्रीमद्भागवत कथा के रसपान से भक्तों को जन्म जन्मांतर के पुण्य का उदय होता है। उन्होंने कहा कि भक्त बहुत ही बड़भागी हैं, जिनको मां के चरणों में बैठने का अवसर प्राप्त हुआ है। बिन सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिन सुलभ न कोई। परमात्मा को तीन रूपों में दर्शाते हुए व्यास ने कहा कि परमात्मा सत्चित आनंद रूप है।
परमात्मा के दिव्य रूपों का कथा में वर्णन होता है। उन्होंने कहा कि सत्य का स्वरूप परमात्मा को हम सब प्रणाम करते हैं। व्यास जी ने कहा कि मंदिर जाना सरल है, और पूजा करना सरल है, किंतु मूर्ति से बात करना मुश्किल है, क्योंकि ठाकुर को केवल भक्ति प्रिय है।
इस दौरान सतचंडी महायज्ञ में आचार्य राधेश्याम मिश्र नैमिषारेण ने प्रथम दिन गणेश, गौरी पूजन एवं वरुण भगवान का विशाल पूजन किया। पंचांग देवताओं का पूजन कराते हुए व्यास पूजन व कलश स्थापना कराई गई। इस मौके पर नैमिष पीठाधीश्वर जगदाचार्य स्वामी व उपेंद्रानंद जी महाराज मौजूद थे।
श्रीमद्भागवत कथा के रसपान से भक्तों को जन्म जन्मांतर के पुण्य का उदय होता है। उन्होंने कहा कि भक्त बहुत ही बड़भागी हैं, जिनको मां के चरणों में बैठने का अवसर प्राप्त हुआ है। बिन सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिन सुलभ न कोई। परमात्मा को तीन रूपों में दर्शाते हुए व्यास ने कहा कि परमात्मा सत्चित आनंद रूप है।
परमात्मा के दिव्य रूपों का कथा में वर्णन होता है। उन्होंने कहा कि सत्य का स्वरूप परमात्मा को हम सब प्रणाम करते हैं। व्यास जी ने कहा कि मंदिर जाना सरल है, और पूजा करना सरल है, किंतु मूर्ति से बात करना मुश्किल है, क्योंकि ठाकुर को केवल भक्ति प्रिय है।
इस दौरान सतचंडी महायज्ञ में आचार्य राधेश्याम मिश्र नैमिषारेण ने प्रथम दिन गणेश, गौरी पूजन एवं वरुण भगवान का विशाल पूजन किया। पंचांग देवताओं का पूजन कराते हुए व्यास पूजन व कलश स्थापना कराई गई। इस मौके पर नैमिष पीठाधीश्वर जगदाचार्य स्वामी व उपेंद्रानंद जी महाराज मौजूद थे।