कटरी का गेहूं बिगाड़ सकता सेहत
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कटरी क्षेत्र में पैदा हो रही गेहूं की फसल आपकी सेहत बिगाड़ सकती है। इस गेहूं का आटा बीमारी पैदा कर सकता है। बावजूद इसके किसान धड़ल्ले से गेहूं की पैदावार ले रहे हैं। इस गेहूं की गुणवत्ता परखने का इंतजाम नहीं किया गया है। कटरी क्षेत्र में रामाश्रम से महादेवी घाट तक काली नदी के किनारे बसे 50 गांवों के किसान काली नदी क्षेत्र में हजारों बीघा में गेहूं की पैदावार ले रहे हैं। यह किसान फसलों की सिंचाई के लिए काली नदी के पानी का प्रयोग कर रहे हैं। यह पानी गेहूं की बाली में जहर बनकर दौड़ रहा है। समय से पहले पक रही बाली किसानों के लिए जान जोखिम में डाल सकती है।
हजारों बीघा में तैयार हो रहा प्रदूषित गेहूं
कटरी गंगपुर, कासिमपुर, फिरोजपुर, महावलीपुर, अमीनाबाद, डूंगरपुर, जलालपुर उमरा, तेरारागी, चौधरियापुर, दरियापुर, गुगरापुर बांगर, बलीदासपुर, कपूरपुर, सडियापुर, मिश्रीपुर, दरियापुर, सलेमपुर, चांदापुर, तहसीपुर, सौसरापुर, पहाड़पुर, मरहरिया, मोहनपुर, महादेवा, जदगीशपुर, सेंगरमऊ, मनोरथपुर, मोहनपुर, सिंहपुर, सादिकपुर, अकबरपुर, कासिमपुर, गंगपुर, रायपुर मकटौरा, देवकली कछोहा, सलेमपुर तारा, चौरा चांदपुर, नौरंगपुर, अजमतपुर, मेंहदीपुर, कुसुमखोर, गुगरापुर, गोरीपुर बांगर, ईशापुर पट्टी, मीरथपुर, चांदपुर, जलालपुर, फगुहा, मछियापुर समेत आधा सैकड़ा गांवों में हजारों बीघा गेहूं की फसल खड़ी है।
वर्जन
गंदे पानी में कास्टिक, साबुन, एसिड व अन्य घातक रसायन घुले होते हैं। पानी के बहाव के कारण इसमें निरंतर गैस भी बनती रहती है। ऐसे पानी की सिंचाई से फसल और आदमी की सेहत दोनों के लिए नुकसानदेय है। इससे गेहूं में भी केमिकल के अंश आ सकते हैं। पशुओं के लिए भूसा भी घातक हो सकता है। - डा. वीके कनौजिया (कृषि वैज्ञानिक केंद्र, अनौगी)
इंसेट
शरीर में केमिकल किसी भी रूप में घातक हो सकता है। यह पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। भोजन के पचाने के एंजाइम को नष्ट कर देता है। आंतों की दीवारों को नुकसान पहुंचा सकता है। जिससे भोजन में आवश्यक एंजाइम नहीं मिल सकेगा और भोजन पेट में अपाच्य रह जाएगा। इससे शरीर में कई प्रकार बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए साफ पानी पीएं व स्वच्छ भोजन करें। - डा. विमल कुमार (फिजीशियन)
इंसेट
गेहूं की बुवाई से पहले मिट्टी की जांच करानी चाहिए। यदि मिट्टी प्रदूषित है तो गेहूं भी प्रदूषित होगा। प्रदूषित वस्तु शरीर के लिए नुकसानदेय है। - डा. सोनम बाजपेयी (गुगरापुर, स्वास्थ्य केंद्र)