{"_id":"62828d491e5e96791c017ac4","slug":"ishan-river-dry-canal-also-needs-water-kannauj-news-knp697144268","type":"story","status":"publish","title_hn":"ईशन नदी सूखी, नहर को भी पानी की दरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ईशन नदी सूखी, नहर को भी पानी की दरकार
विज्ञापन
फोटो:01: राजकीय मेडिकल कॉलेज के निकट से गुजरी ईशन नदी में इन दिनों पानी नहीं है। संवाद
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। भीषण गर्मी के चलते ईशन नदी सूख गई है। निचली गंग नहर में भी पानी कम है। नरौरा से पानी न आने की वजह से रजबहा और माइनर भी बिन पानी हैं। फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है।
नरौरा से कन्नौज जिले को पानी मिलता है। नहर, नदियों, रजबहा और माइनर में पानी छोड़े जाने के बाद ही किसान फसलों की सिंचाई कर पाते हैं। मवेशियों और पक्षियों का भी गला तर इसी से होता है, लेकिन इन दिनों पानी को लेकर हायतौबा मची है। एक ओर तो तेज धूप व लपट से लोग परेशान हैं तो दूसरी ओर नरौरा से पानी नहीं आ रहा है। ऐसी गर्मी में लोगों के बीच पानी की मांग भी बढ़ गई है।
इंसान तो किसी तरह पानी की व्यवस्था कर प्यास बुझा लेता है, लेकिन पशु-पक्षी, फसलें तपती हैं। मुसीबत तब और बढ़ जाती है जब जरूरत के मुताबिक नहर में पानी नहीं मिलता है। जिले से गुजरी निचली गंग नहर में इन दिनों करीब दो हजार क्यूसेक ही पानी है, जबकि जरूरत 5400 क्यूसेक पानी की है। मांग का सिर्फ 37 फीसदी पानी होने से फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
निचली गंग नहर नरौरा से आई है। यह एटा, मैनपुरी, कन्नौज होते हुए कानपुर की ओर गई है। ईशननदी मैनपुरी से निकली है जो कन्नौज होते हुए कानपुर देहात व नगर क्षेत्र को जाती है। नदियों, रजबहा व माइनर से जानवरों व पक्षियों को पानी की जरूरत होती है। किसान पंपसेट लगाकर फसलों व सब्जियों की सिंचाई करते हैं।
-64 किमी में निचली गंग नहर है।
-35 किमी दायरे में ईशन नदी है।
-443 किमी में रजबहा व माइनर का जाल बिछा है।
-5400 क्यूसेक पानी की दरकार नहर को है।
-2000 क्यूसेक की उपलब्धता है।
जिले के 92 गांवों के किसान नहर के पानी पर निर्भर हैं। फिलहाल 2000 क्यूसेक पानी ही है। गंगा में पानी कम होने से दिक्कत है। नहर में 5400 क्यूसेक पानी होना चाहिए। गर्मी में पानी की मांग बढ़ी है। -पारस नाथ, अधिशाषी अभियंता सिंचाई विभाग।
इन गांव के भी किसानों को है दिक्कत
ईशन नदी में पानी न आने से नुनारी, चिंतापुर्वा, जगनपुर्वा, पवोरा, सहनापुर, पट्टी, बरुआहार, महमूदापुर, तारनपुर्वा, अर्जुनपुर्वा, भुडिय़ा, सियापुर, सिकरोरी, सखौली, हिमनापुर, भखरा, महानंदपुर्वा व रज्जापुर्वा समेत कई गांव के किसानों व पशुपालकों को दिक्कतें हैं।
इनसेट
ये फसलें मांग रहीं पानी
मक्का, मूंगफली, तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा, भिंडी, उर्द, तोरई, लौकी व मूंग आदि फसलों को पानी की जरूरत है।
विज्ञापन
नरौरा से कन्नौज जिले को पानी मिलता है। नहर, नदियों, रजबहा और माइनर में पानी छोड़े जाने के बाद ही किसान फसलों की सिंचाई कर पाते हैं। मवेशियों और पक्षियों का भी गला तर इसी से होता है, लेकिन इन दिनों पानी को लेकर हायतौबा मची है। एक ओर तो तेज धूप व लपट से लोग परेशान हैं तो दूसरी ओर नरौरा से पानी नहीं आ रहा है। ऐसी गर्मी में लोगों के बीच पानी की मांग भी बढ़ गई है।
विज्ञापन
इंसान तो किसी तरह पानी की व्यवस्था कर प्यास बुझा लेता है, लेकिन पशु-पक्षी, फसलें तपती हैं। मुसीबत तब और बढ़ जाती है जब जरूरत के मुताबिक नहर में पानी नहीं मिलता है। जिले से गुजरी निचली गंग नहर में इन दिनों करीब दो हजार क्यूसेक ही पानी है, जबकि जरूरत 5400 क्यूसेक पानी की है। मांग का सिर्फ 37 फीसदी पानी होने से फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
निचली गंग नहर नरौरा से आई है। यह एटा, मैनपुरी, कन्नौज होते हुए कानपुर की ओर गई है। ईशननदी मैनपुरी से निकली है जो कन्नौज होते हुए कानपुर देहात व नगर क्षेत्र को जाती है। नदियों, रजबहा व माइनर से जानवरों व पक्षियों को पानी की जरूरत होती है। किसान पंपसेट लगाकर फसलों व सब्जियों की सिंचाई करते हैं।
-64 किमी में निचली गंग नहर है।
-35 किमी दायरे में ईशन नदी है।
-443 किमी में रजबहा व माइनर का जाल बिछा है।
-5400 क्यूसेक पानी की दरकार नहर को है।
-2000 क्यूसेक की उपलब्धता है।
जिले के 92 गांवों के किसान नहर के पानी पर निर्भर हैं। फिलहाल 2000 क्यूसेक पानी ही है। गंगा में पानी कम होने से दिक्कत है। नहर में 5400 क्यूसेक पानी होना चाहिए। गर्मी में पानी की मांग बढ़ी है। -पारस नाथ, अधिशाषी अभियंता सिंचाई विभाग।
इन गांव के भी किसानों को है दिक्कत
ईशन नदी में पानी न आने से नुनारी, चिंतापुर्वा, जगनपुर्वा, पवोरा, सहनापुर, पट्टी, बरुआहार, महमूदापुर, तारनपुर्वा, अर्जुनपुर्वा, भुडिय़ा, सियापुर, सिकरोरी, सखौली, हिमनापुर, भखरा, महानंदपुर्वा व रज्जापुर्वा समेत कई गांव के किसानों व पशुपालकों को दिक्कतें हैं।
इनसेट
ये फसलें मांग रहीं पानी
मक्का, मूंगफली, तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा, भिंडी, उर्द, तोरई, लौकी व मूंग आदि फसलों को पानी की जरूरत है।