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विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में रेफर केंद्र बना सौ शय्या अस्पताल

Wed, 02 Dec 2020 10:50 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 02 Dec 2020 10:50 PM IST
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In the absence of specialist doctors, referral center becomes 100 bed hospital
छिबरामऊ(कन्नौज)। दिसंबर 2016 में 4597.54 लाख रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से युक्त सौ शय्या संयुक्त चिकित्सालय का शुभारंभ हुआ। चार वर्ष बीत जाने के बाद भी अस्पताल में आधा दर्जन से अधिक विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में अस्पताल रेफर केंद्र बनकर रह गया है।
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ग्राम दिलू का नगला स्थित सौ शय्या संयुक्त चिकित्सालय के निर्माण के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ, इमरजेंसी, पैथोलॉजी, ईएनटी (नाक, कान, गला रोग), आंख, हड्डी रोग, फिजीशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, आईसीयू, निश्चेतक, आईसीयू वेंटीलेटर, सर्जरी, रेडियोलॉजिस्ट व ओटी, जनरल, डेंटल, सर्जन, चेस्ट फिजीशियन सहित कई विभागों का संचालन स्वीकृत हुआ था। वर्तमान समय में स्त्री रोग विशेषज्ञ, इमरजेंसी, पैथोलॉजी, बाल रोग विशेषज्ञ, आंख व आर्थो विभागोें का संचालन हो रहा है। शेष विभागों में चिकित्सकों की तैनाती न होने के कारण ताला लटका रहता है। इससे इलाज के लिए आने वाले रोगियों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। बाद में इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक इन रोगियों को प्राथमिक उपचार देकर जिला अस्पताल या फिर तिर्वा मेडिकल कालेज रेफर कर देते। ऐसी स्थिति में लाखों रुपये के बजट से बनकर तैयार हुए अस्पताल बेमानी साबित हो रहा है। यहां के गंभीर रोगियों को फर्रुखाबाद, आगरा, कानपुर, लखनऊ, दिल्ली जाना पड़ता है। इस बारे में सौ शय्या अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश कुमार तिवारी का कहना है कि रिक्त पड़े विभागों में तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। जल्द तैनाती की उम्मीद है।
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रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती, नहीं मिलती सुविधाएं
रेडियोलॉजिस्ट विभाग में डॉ. ओमप्रकाश की तैनाती है। जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त होने के कारण उन्हें विभागीय अधिकारियों ने वहां अटैच करवा दिया। इससे यहां अल्ट्रासाउंड व एक्सरे जैसी सुविधाओं से मरीज वंचित हैं।
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प्रसूति रोग विशेषज्ञ का पद भी रिक्त, आईसीयू में लटका ताला
सौ शय्या अस्पताल में डॉ. ज्योति सिंह व डॉ. सुचि वर्मा की महिला चिकित्साधिकारी के पद पर तैनाती है। प्रसूति रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति न होने से डिलीवरी व ऑपरेशन की व्यवस्था नहीं है। इससे प्रसव नहीं हो पाते हैं। गर्भवती के आने पर स्टाफ नर्स डिलीवरी कराती हैं। एमडी मेडिसिन की तैनाती न होने के कारण लाखों की कीमत से तैयार आईसीयू वार्ड में ताला लटका हुआ है।

पैथोलॉजी में नहीं होतीं सभी जांचें
सौ शय्या अस्पताल में पैथोलॉजी विभाग का संचालन हो रहा है। यहां मलेरिया, टाइफाइड व कार्ड से डेंगू की जांच हो सकती है। गंभीर बीमारियों में होने वाली जांचें विशेषज्ञ के अभाव में मरीजों को बाहर से करानी पड़ती हैं।
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