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अवैध तरीके से माल ढो रही थीं टूरिस्ट बसें
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कन्नौज। इत्र नगरी से रोजाना गैर राज्यों और शहरों तक इत्र, सुगंधीय तेल भेजा जाता है। छिबरामऊ में हादसे के बाद इसका खुलासा हुआ। ट्रांसपोर्ट की जगह कारोबारियों ने निजी टूरिस्ट बसों को परिवहन का आधार बनाकर वाणिज्य कर को लाखों का चूना भी लगाया जाता था। बसों में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बस संचालक और चालक यात्रियों की सुरक्षा की बजाय माल परिवहन को अधिक तवज्जो देते है। रात में चलने वाली इन बसों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बिठाने के साथ बसों के ऊपर, डिग्गाी, खांचोें और सीटों के आसपास रखकर गैर राज्यों तक सामान पहुंचाने का धंधा चलता था।
10 जनवरी को छिबरामऊ में हादसे का शिकार हुई टूरिस्ट बस में कई सवारियां जिंदा जल गई थी। जिसके बाद से निजी बसों के संचालन की जांच चल रही है। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिला मुख्यालय, गुरसहायगंज, छिबरामऊ, सौरिख से रोजाना करीब 30 बसे राजस्थान के जयपुर, दिल्ली, हरियाणा, आगरा, मथुरा और अलीगढ़ शहर तक निजी बसें संचालित होती थी। इन बसों में बड़ी मात्रा में लगेज का परिवहन होता था। यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए मनमर्जी से बसों से इत्र और सुगंधीय तेल भेजा जाता था। बसें कॉमर्शियल सामान बगैर बिल्टी, बिल और मानक से भेजकर व्यापारी वाणिज्य कर विभाग को लाखों चूना लगाते थे। एआरटीओ संजय झा ने बताया कि निजी बसों की चेकिंग की जा रही है। अवैध ढंग से सामान ढोने और संचालित होने वाली बसों को सीज किया जा रहा है।
कन्नौज। कम समय में सुरक्षित माल पहुंचे। इसके लिए उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने निजी संस्था को पार्सल की जिम्मेदारी है। जिले में साईं श्रद्धा कार्गो संस्था को परिवहन का टेंडर दिया है। इससे किसी भी शहर में माल भेजने के लिए संस्था की ओर से निर्धारित शुल्क के आधार पर माल को पार्सल किया जाता है। नियम के अनुसार 20 किलो से एक क्विंटल सामान को ही रोडवेज बस से पार्सल किया जा सकता है। संस्थान के कर्मचारी आलोक शुक्ला ने बताया कि नंबर के एक कागज और सामान चेक करने के बाद ही पार्सल किया जाता है। अगर पार्सल की कीमत 50 हजार रुपये से अधिक की है, तो अधिक चार्ज पर जिम्मेदारी के साथ बीमा कर माल को सुरक्षित पहुंचाया जाता है। कन्नौज से जयपुर तक के लिए 20 किलो पार्सल का 300 रुपये, आगरा तक का 200, कानपुर 120 है। जबकि निजी बसों से माल ले जाने का कोई निर्धारण नहीं होता है। चालक और माल मालिक के बीच सहमति होने पर माल भेज दिया जाता है।
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इसलिए निजी बसों से होता परिवहन
कन्नौज। निजी बसों से बगैर चेक किए कोई भी सामान आसानी गैर राज्यों तक भेजा जा सकता। वाणिज्य कर के अलावा किसी भी विभाग के कागज, बिल की जरूरत नहीं होती है। ज्वलनशील तेल और पदार्थों के परिवहन में रोडवेज बसों में प्रतिबंध होता है। इसके अलावा कम रुपयों में आसानी से कारोबारी और बस संचालक के बीच सेटिंग से अधिकांश वस्तुओं का परिवहन होता है।
हादसों का कारण बनता माल ढुलाई
कन्नौज। लगेज से ओवरलोड चलती ये निजी बसें हमेशा हादसे को निमंत्रण देती है। यात्रियों से खचाखच भरी होने और बस की छत पर क्षमता से ज्यादा लगेज लदा होने के कारण कई बार बस का संतुलन बिगड़ जाता है। लंबी दूरी की बसें होने के कारण ज्यादा स्पीड में चलती है। संतुलन बिगड़ने से हादसा हो जाता है। जिसमें यात्रियों की जान चली जाती है।
पार्सल बुकिंग एजेंटों का फैला नेटवर्क
कन्नौज। निजी बस ऑपरेटर्स की ओर से पार्सल की बुकिंग के लिए भी एजेंट नियुक्त कर रखे हैं। बस संचालकों की ओर से पार्सल भेजने की दर भी मनमर्जी से तय की जाती है। जानकारों का कहना है कि 50 रुपये से कम में कोई पार्सल बुक नहीं किया जाता। कई शहरों और राज्यों तक माल ढुलाई को लेकर इनका नेटवर्क फैला है। इससे बड़ा मुनाफा होता है।
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निजी बसों से माल ढोने का नहीं प्रावधान
कन्नौज। सुरक्षा मोटर वाहन अधिनियम-1998 प्रावधान के अनुसार निजी बसों से ट्रांसपोर्ट का सामान परिवहन नहीं होगा। इससे यात्रियों की जान को खतरा होने के साथ प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी होती है। भारी वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा निर्धारण करने के साथ ही बसों की छतों पर कैरियर व पीछे की सीढ़ियां हटाने का आदेश जारी किया गया था।
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10 जनवरी को छिबरामऊ में हादसे का शिकार हुई टूरिस्ट बस में कई सवारियां जिंदा जल गई थी। जिसके बाद से निजी बसों के संचालन की जांच चल रही है। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिला मुख्यालय, गुरसहायगंज, छिबरामऊ, सौरिख से रोजाना करीब 30 बसे राजस्थान के जयपुर, दिल्ली, हरियाणा, आगरा, मथुरा और अलीगढ़ शहर तक निजी बसें संचालित होती थी। इन बसों में बड़ी मात्रा में लगेज का परिवहन होता था। यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए मनमर्जी से बसों से इत्र और सुगंधीय तेल भेजा जाता था। बसें कॉमर्शियल सामान बगैर बिल्टी, बिल और मानक से भेजकर व्यापारी वाणिज्य कर विभाग को लाखों चूना लगाते थे। एआरटीओ संजय झा ने बताया कि निजी बसों की चेकिंग की जा रही है। अवैध ढंग से सामान ढोने और संचालित होने वाली बसों को सीज किया जा रहा है।
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कन्नौज। कम समय में सुरक्षित माल पहुंचे। इसके लिए उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने निजी संस्था को पार्सल की जिम्मेदारी है। जिले में साईं श्रद्धा कार्गो संस्था को परिवहन का टेंडर दिया है। इससे किसी भी शहर में माल भेजने के लिए संस्था की ओर से निर्धारित शुल्क के आधार पर माल को पार्सल किया जाता है। नियम के अनुसार 20 किलो से एक क्विंटल सामान को ही रोडवेज बस से पार्सल किया जा सकता है। संस्थान के कर्मचारी आलोक शुक्ला ने बताया कि नंबर के एक कागज और सामान चेक करने के बाद ही पार्सल किया जाता है। अगर पार्सल की कीमत 50 हजार रुपये से अधिक की है, तो अधिक चार्ज पर जिम्मेदारी के साथ बीमा कर माल को सुरक्षित पहुंचाया जाता है। कन्नौज से जयपुर तक के लिए 20 किलो पार्सल का 300 रुपये, आगरा तक का 200, कानपुर 120 है। जबकि निजी बसों से माल ले जाने का कोई निर्धारण नहीं होता है। चालक और माल मालिक के बीच सहमति होने पर माल भेज दिया जाता है।
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इसलिए निजी बसों से होता परिवहन
कन्नौज। निजी बसों से बगैर चेक किए कोई भी सामान आसानी गैर राज्यों तक भेजा जा सकता। वाणिज्य कर के अलावा किसी भी विभाग के कागज, बिल की जरूरत नहीं होती है। ज्वलनशील तेल और पदार्थों के परिवहन में रोडवेज बसों में प्रतिबंध होता है। इसके अलावा कम रुपयों में आसानी से कारोबारी और बस संचालक के बीच सेटिंग से अधिकांश वस्तुओं का परिवहन होता है।
हादसों का कारण बनता माल ढुलाई
कन्नौज। लगेज से ओवरलोड चलती ये निजी बसें हमेशा हादसे को निमंत्रण देती है। यात्रियों से खचाखच भरी होने और बस की छत पर क्षमता से ज्यादा लगेज लदा होने के कारण कई बार बस का संतुलन बिगड़ जाता है। लंबी दूरी की बसें होने के कारण ज्यादा स्पीड में चलती है। संतुलन बिगड़ने से हादसा हो जाता है। जिसमें यात्रियों की जान चली जाती है।
पार्सल बुकिंग एजेंटों का फैला नेटवर्क
कन्नौज। निजी बस ऑपरेटर्स की ओर से पार्सल की बुकिंग के लिए भी एजेंट नियुक्त कर रखे हैं। बस संचालकों की ओर से पार्सल भेजने की दर भी मनमर्जी से तय की जाती है। जानकारों का कहना है कि 50 रुपये से कम में कोई पार्सल बुक नहीं किया जाता। कई शहरों और राज्यों तक माल ढुलाई को लेकर इनका नेटवर्क फैला है। इससे बड़ा मुनाफा होता है।
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निजी बसों से माल ढोने का नहीं प्रावधान
कन्नौज। सुरक्षा मोटर वाहन अधिनियम-1998 प्रावधान के अनुसार निजी बसों से ट्रांसपोर्ट का सामान परिवहन नहीं होगा। इससे यात्रियों की जान को खतरा होने के साथ प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी होती है। भारी वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा निर्धारण करने के साथ ही बसों की छतों पर कैरियर व पीछे की सीढ़ियां हटाने का आदेश जारी किया गया था।