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Kannauj News: घिलोई की घटना से लेते सबक तो बच जाती नौ जिंदगियां

Sat, 26 Sep 2026 11:38 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 26 Sep 2026 11:38 PM IST
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Had lessons been learned from the Ghiloi incident, nine lives could have been saved.
छिबरामऊ। यमुना एक्सप्रेसवे पर 23 सितंबर की रात जेवर टोल प्लाजा के पास स्लीपर बस में लगी आग में नौ लोग जिंदा जल गए। इस हादसे ने कोतवाली क्षेत्र के ग्राम घिलोई के पास अलीगढ़ कानपुर हाईवे पर 10 जनवरी 2020 की रात हुए हादसे की यादों को ताजा कर दिया है। इस हादसे में 11 लोग जिंदा जल गए थे। इन सभी की शिनाख्त डीएनए टेस्ट के माध्यम से हुई थी। वर्ष 2020 में हुए इस हादसे से सबक लिया होता, और अवैध डग्गामार बसों के संचालन पर लगाम कसी होती तो शायद नौ जिंदगियों को बचाया जा सकता था।
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घटना 10 जनवरी साल 2020 की है। कड़ाके की सर्दी और भीषण कोहरे के बीच एक स्लीपर बस फर्रुखाबाद से छिबरामऊ होते हुए जयपुर जा रही थी। अभी वह नगर से महज चार किलोमीटर दूर ग्राम घिलोई के पास ही पहुंच पाई थी कि तभी बेवर की तरफ से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक से उसकी भिड़ंत हो गई थी। हादसे के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई थी। हादसे के वक्त बस में 90 यात्रियों के होने का दावा किया गया था। पुलिस रिकार्ड के अनुसार ग्राम उगरापुर निवासी लईक पुत्र मोहम्मद उमर, उसकी पत्नी सायदा बेगम, बेटी सादिया, बेटा शान अहमद व मोहम्मद सैफ, गंजडुडवारा जनपद कासगंज निवासी नूरी पत्नी नाजिम, जयपुर निवासी प्रिया पुत्री कृपाशंकर राठौर, ट्रक चालक अजय उर्फ रिंकू पुत्र पूरन सिंह निवासी लतीफपुर थाना कुरावली जनपद मैनपुरी समेत 11 लोगों की मौत हुई थी।
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कार्रवाई के नाम की गई थी खानापूरी
छिबरामऊ। फर्रुखाबाद से चलकर जयपुर जाने वाली विमल बस सर्विस नियमों को अपने ठेंगे पर रखती है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर गैर प्रांत सहित सूबे के छह जिलों में इस बस का चालान कटा था। हालांकि, प्रशासन ने बस संचालक के खिलाफ कार्रवाई भी की थी, लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और स्लीपर बसों पुनः सड़कों पर फर्राटा भरने लगी। यदि 2020 की हादसे के बाद शासन और प्रशासन ने सख्ती बरती होती तो शायद 23 सितंबर को हुए दोबारा इस तरह के हादसे की पुनरावृत्ति नहीं होती।
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जिले में कोई स्लीपर बस पंजीकृत नहीं है। बाहर से आने वाली बसों की एक्सप्रेसवे पर जांच करना संभव नहीं है। फिर भी उनकी टीम निगरानी कर रही है।
-इज्या तिवारी, एआरटीओ
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