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Kannauj News: 2.5 सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा गंगा का जलस्तर
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कन्नौज। 27 सितंबर 2010 को कन्नौज-हरदोई रोड के ऊपर से गंगा का पानी बह रहा था और कुछ दिन के लिए इस रोड को बंद कर दिया गया था। गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी और कासिमपुर व बख्शीपुरवा गांव जलप्लावित हो गए थे। कुछ वैसा ही दृश्य रविवार को देखने को मिला। हालांकि अभी गंगा खतरे के निशान से 73 सेमी नीचे है। 2.5 सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा है। इससे तो ऐसा लग रहा है कि 2010 का इतिहास फिर दोहराने के लिए पतित पावनी गंगा आतुर है। बारिश तो हो ही रही है, लेकिन नरौरा बांध से फिर 3.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया। इससे यह आंकड़ा छूने में देर नहीं लगेगी। गंगा के साथ काली नदी भी उफान पर है, जिसने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बाढ़ के लाइव हालात बताते हुए ब्यूरो प्रभारी अभिषेक द्विवेदी व रिपोर्टर सुनील तिवारी की रिपोर्ट-
दोपहर के समय बादलों की ओट से निकले सूरज ने कुछ तपिश बढ़ा दी थी। महादेवी वर्मा के नाम पर बने घाट पर मोक्षदायिनी का विहंगम दृश्य सभी को लुभा रहा था। पुल पार करते ही कासिमपुर गांव दिखा। गांव जाने वाली पुलिया पर पानी भरा होने से बच्चे उसमें नहा रहे थे। कई बच्चे मछलियां पकड़ कर झोली में डाल रहे थे। वहीं, गांव के ग्रामीण गृहस्थी का सामान समेट कर नाव से बाहर आ रहे थे। सामने ही हरदोई रोड पर बाढ़ राहत शिविर बना था। नायब तहसीलदार राकेश कुशवाहा अपनी टीम के साथ डटे थे। कासिमपुर गांव के प्रेमचंद्र ने बताया कि ..गंगा मैया, पता नाहीं काहे नाराज हैं, लगातार बढ़ रहीं हैं..अब बहुत दिक्कत हुइ रही है। महादेवी घाट पर स्वामी वेदेश्वरानंद भी गंगा मैया को प्रणाम कर बोले-हर साल माता आश्रम तक जरूर आती हैं। आखिरकार हम सब उनके सेवक जो ठहरे...लागत है कि इस बार भी आश्रम में आएंगीं।
वहां से मेहंदीपुर गांव पहुंचे तो काली नदी का किनारा शुरू हो गया। नदी की धारा में जलकुंभी बहकर आ रही थी। गुमटिया गांव के किनारे श्याममुरारी बोले-गंगा जब बढ़त है तौ काली अपने आप बढि़ जात है...सिगरी सब्जी डूबि गई, लक्खन को नुकसान हुइ गओ...। चौराचांदपुर पहुंचे तो वहां कुछ किसान नाव से पैकेट उतार कर ले जा रहे थे। पूछने पर रामकेश बोले कि काली के उइ पार कटरी मा अमरूद केरी बगिया है, पानी बढ़ो तो बगिया डूबि गई। जित्ते अमरूद मिले, तोरि लाए..बेच दीहीं तौ कछु दिन काम चलिहै..। खेतवा सगरे डूबि गए।
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सलेमपुर ताराबांगर के हाल तो बहुत ही खराब थे। बाढ़ के पानी से मुख्यमार्ग पर कीचड़ से निकलना दुश्वार था। गांव के दीपक बोले- कछु हाल तौ बाढ़ से खराब हहिं तौ कछु शिवराज प्रधान नै खराब करि दये..उहि मा मिट्टी डरवाय दई, जासैं रबदा (कीचड़) और बढि़ गई। रोज सैकड़न लोग गिरत हैं चाहला मैं...। पानी चौधरियापुर और जुकइया गांव तक पहुंच रहा था और किसान खेतों में फसलों को समेटने में जुटे थे। इसी उम्मीद के साथ आज नहीं तो कल बाढ़ तो आएगी ही, तब तक जो बचा लें, उससे कुछ दिन जीविकोपार्जन तो हो जाएगा।
डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री का कहना है कि नरौरा बांध से लगातार पानी रिलीज किया जा रहा है, जिससे गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। उसकी निगरानी के लिए टीम को लगाया गया है और सदर तहसीलदार को बाढ़ राहत शिविरों में सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। तटवर्ती गांवों में लेखपालों व सचिवों को कैंप करने के आदेश दिए गए हैं।
इस तरह बढ़ा जलस्तर
04 अगस्त - 124.100 मीटर
05अगस्त - 124.160 मीटर
06 अगस्त - 124.200 मीटर
07अगस्त - 124.310 मीटर
08 अगस्त - 124.820 मीटर
09 अगस्त - 125.070 मीटर
10 अगस्त - 125.240 मीटर
-- -- -- -- --
चेतावनी बिंदु - 124.970 मीटर
खतरे का निशान-125.970 मीटर
बाढ़ लेवल - 126.240 मीटर
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दोपहर के समय बादलों की ओट से निकले सूरज ने कुछ तपिश बढ़ा दी थी। महादेवी वर्मा के नाम पर बने घाट पर मोक्षदायिनी का विहंगम दृश्य सभी को लुभा रहा था। पुल पार करते ही कासिमपुर गांव दिखा। गांव जाने वाली पुलिया पर पानी भरा होने से बच्चे उसमें नहा रहे थे। कई बच्चे मछलियां पकड़ कर झोली में डाल रहे थे। वहीं, गांव के ग्रामीण गृहस्थी का सामान समेट कर नाव से बाहर आ रहे थे। सामने ही हरदोई रोड पर बाढ़ राहत शिविर बना था। नायब तहसीलदार राकेश कुशवाहा अपनी टीम के साथ डटे थे। कासिमपुर गांव के प्रेमचंद्र ने बताया कि ..गंगा मैया, पता नाहीं काहे नाराज हैं, लगातार बढ़ रहीं हैं..अब बहुत दिक्कत हुइ रही है। महादेवी घाट पर स्वामी वेदेश्वरानंद भी गंगा मैया को प्रणाम कर बोले-हर साल माता आश्रम तक जरूर आती हैं। आखिरकार हम सब उनके सेवक जो ठहरे...लागत है कि इस बार भी आश्रम में आएंगीं।
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वहां से मेहंदीपुर गांव पहुंचे तो काली नदी का किनारा शुरू हो गया। नदी की धारा में जलकुंभी बहकर आ रही थी। गुमटिया गांव के किनारे श्याममुरारी बोले-गंगा जब बढ़त है तौ काली अपने आप बढि़ जात है...सिगरी सब्जी डूबि गई, लक्खन को नुकसान हुइ गओ...। चौराचांदपुर पहुंचे तो वहां कुछ किसान नाव से पैकेट उतार कर ले जा रहे थे। पूछने पर रामकेश बोले कि काली के उइ पार कटरी मा अमरूद केरी बगिया है, पानी बढ़ो तो बगिया डूबि गई। जित्ते अमरूद मिले, तोरि लाए..बेच दीहीं तौ कछु दिन काम चलिहै..। खेतवा सगरे डूबि गए।
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सलेमपुर ताराबांगर के हाल तो बहुत ही खराब थे। बाढ़ के पानी से मुख्यमार्ग पर कीचड़ से निकलना दुश्वार था। गांव के दीपक बोले- कछु हाल तौ बाढ़ से खराब हहिं तौ कछु शिवराज प्रधान नै खराब करि दये..उहि मा मिट्टी डरवाय दई, जासैं रबदा (कीचड़) और बढि़ गई। रोज सैकड़न लोग गिरत हैं चाहला मैं...। पानी चौधरियापुर और जुकइया गांव तक पहुंच रहा था और किसान खेतों में फसलों को समेटने में जुटे थे। इसी उम्मीद के साथ आज नहीं तो कल बाढ़ तो आएगी ही, तब तक जो बचा लें, उससे कुछ दिन जीविकोपार्जन तो हो जाएगा।
डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री का कहना है कि नरौरा बांध से लगातार पानी रिलीज किया जा रहा है, जिससे गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। उसकी निगरानी के लिए टीम को लगाया गया है और सदर तहसीलदार को बाढ़ राहत शिविरों में सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। तटवर्ती गांवों में लेखपालों व सचिवों को कैंप करने के आदेश दिए गए हैं।
इस तरह बढ़ा जलस्तर
04 अगस्त - 124.100 मीटर
05अगस्त - 124.160 मीटर
06 अगस्त - 124.200 मीटर
07अगस्त - 124.310 मीटर
08 अगस्त - 124.820 मीटर
09 अगस्त - 125.070 मीटर
10 अगस्त - 125.240 मीटर
चेतावनी बिंदु - 124.970 मीटर
खतरे का निशान-125.970 मीटर
बाढ़ लेवल - 126.240 मीटर