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सामूहिक दुष्कर्म में भाइयों को 20-20 साल की सजा
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कन्नौज। बीमार किशोरी को बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म करने के दोषी दो भाइयों को न्यायाधीश ने 20-20 साल की सजा सुनाई है। न्याय मिलने के बाद पीड़ित परिवार ने कहा कि उन्हें कोर्ट पर पूरा भरोसा था।
सदर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी बीमार थी। 15 मई 2017 को वह खेत पर जा रही थी। परिवार के मुताबिक इस दौरान पटियन कटरी फिरोजपुर निवासी ग्रीश ने अपने छोटे भाई रामतीर्थ के साथ किशोरी को अगवा कर लिया। दोनों किशोरी का मुंह बंद कर अपने घर ले आए। यहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
सदर कोतवाली पुलिस ने पीड़िता के पिता की तहरीर पर दोनों आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण और पाक्सो एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया था। मेडिकल परीक्षण में सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पाक्सो एक्ट गीता सिंह ने मामले की सुनवाई कर दोनों को जेल भेज दिया था।
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गुरुवार को न्यायाधीश गीता सिंह ने दोनों आरोपियों को 20-20 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा 25-25 हजार का अर्थदंड लगाया। शासकीय अधिवक्ता तरुण चंद्रा ने बताया कि अर्थदंड जमा न करने पर दोनों को तीन-तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
सीओ बलरामपुर और सेवानिवृत्त सीओ पर कार्रवाई की संस्तुति
मामले की विवेचना में कई तरह की लापरवाही सामने आई है। पीड़िता का सही समय पर मेडिकल और बयान न करने के अलावा चार्जशीट पेश करने में लापरवाही की गई है। इससे न्यायाधीश गीता सिंह ने तत्कालीन क्षेत्राधिकारी सुरेंद्र पाल सिंह(सेवानिवृत्त) और बलरामपुर जिले में तैनात सीओ लक्ष्मीकांत गौतम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक को निर्णय की कॉपी भेजी है।
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सदर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी बीमार थी। 15 मई 2017 को वह खेत पर जा रही थी। परिवार के मुताबिक इस दौरान पटियन कटरी फिरोजपुर निवासी ग्रीश ने अपने छोटे भाई रामतीर्थ के साथ किशोरी को अगवा कर लिया। दोनों किशोरी का मुंह बंद कर अपने घर ले आए। यहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
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सदर कोतवाली पुलिस ने पीड़िता के पिता की तहरीर पर दोनों आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण और पाक्सो एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया था। मेडिकल परीक्षण में सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पाक्सो एक्ट गीता सिंह ने मामले की सुनवाई कर दोनों को जेल भेज दिया था।
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गुरुवार को न्यायाधीश गीता सिंह ने दोनों आरोपियों को 20-20 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा 25-25 हजार का अर्थदंड लगाया। शासकीय अधिवक्ता तरुण चंद्रा ने बताया कि अर्थदंड जमा न करने पर दोनों को तीन-तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
सीओ बलरामपुर और सेवानिवृत्त सीओ पर कार्रवाई की संस्तुति
मामले की विवेचना में कई तरह की लापरवाही सामने आई है। पीड़िता का सही समय पर मेडिकल और बयान न करने के अलावा चार्जशीट पेश करने में लापरवाही की गई है। इससे न्यायाधीश गीता सिंह ने तत्कालीन क्षेत्राधिकारी सुरेंद्र पाल सिंह(सेवानिवृत्त) और बलरामपुर जिले में तैनात सीओ लक्ष्मीकांत गौतम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक को निर्णय की कॉपी भेजी है।