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Kannauj News: फर्जी गेमिंग एप से ठगी करने वाले चार शातिर और गिरफ्तार

Mon, 01 Sep 2025 12:27 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 01 Sep 2025 12:27 AM IST
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Four more fraudsters arrested for cheating people with fake gaming app
कन्नौज। फर्जी गेमिंग एप से ठगी करने वाले चार शातिरों को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक तो अग्रिम जमानत के लिए वकील से मिलने आया था, जिसे पुलिस ने दबोच लिया। उसके पास एक सिम और मोबाइल बरामद किया गया है। उसके माध्यम से करोड़ाें रुपये का लेनदेन हुआ था। इसके अलावा पुलिस ने देवरिया, कुशीनगर व अलीगढ़ से एक-एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। चारों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
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सदर कोतवाली प्रभारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गोंडा जिले के थाना नवाबगंज के ग्राम चौबेपुर चकरसूल का रहने वाला डॉ. हाफिज अली फर्जी गेमिंग एप में मास्टर माइंड है। उसकी तलाश में पुलिस गोंडा में दबिश देने गई थी पर वह फरार हो गया। उसका छोटा भाई कायम अली कन्नौज में अग्रिम जमानत के लिए वकील से मिलने आया था। पुलिस को सूचना मिली तो उसे पकड़ लिया गया। तलाशी में उसके पास से वह सिम बरामद हुआ, जिससे कारपोरेट अकाउंट खोल कर करोड़ाें रुपये ठगी की रकम का लेनदेन किया गया था।
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इसी तरह अलीगढ़ जिले के थाना बरला अंतर्गत ग्राम मदारपुर निवासी मनमोहित कुमार को गिरफ्तार किया है। उसने पत्नी प्रियंका के नाम से कारपोरेट अकाउंट खोलकर ठगी की रकम का आदान-प्रदान किया था। देवरिया जिले के थाना लार अंतर्गत ग्राम तितौली धर्मनेर निवासी सत्यम चौबे, कुशीनगर जिले के थाना खड्डा निवासी आशीष प्रताप सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। ये सभी फर्जी गेमिंग एप गिराेह में पैनल व किट होल्डर के रूप में काम कर रहे थे। चारों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जिला कारागार अनौगी भेज दिया गया।
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पुणे की एक कंपनी के नाम खाता खोलकर किए सात करोड़ ट्रांसफर
सत्यम चौबे शातिर किस्म का है और उसने पुणे की एक कंपनी के नाम कारपोरेट अकाउंट खोलकर उसमें छह माह में ठगी की सात करोड़ रकम ट्रांसफर की थी। अकेले सत्यम के नाम पांच कारपोरेट अकाउंट मिले हैं, जिनमें 20 लाख रुपये हैं। वह सात बैंक अकाउंट खुद संचालित कर रहा है। वहीं, आशीष प्रताप सिंह दुबई में काम कर चुका है। उसके संपर्क में लखनऊ का राघव भी रहा है, जो पैनल में काम करता है। राघव का एक सहयोगी ताज भी है जो मूलत: बिहार का रहने वाला है और दुबई में रहकर गिरोह को संचालित कर रहा रहा है। बताया गया कि राघव भी मुस्लिम है, जो छद्म नाम से काम कर रहा है।

उत्तराखंड और जबलपुर में खोले गए कई कारपोरेट अकाउंट
एसपी विनोद कुमार ने बताया कि पुलिस फर्जी गेमिंग एप मामले में जितनी छानबीन कर रही है तो उसमें एक कड़ी और जुड़ती जा रही है। अब पुलिस के लिए राघव व ताज की गिरफ्तारी अहम है। गोंडा का हाफिज अली भी फरार है। इनकी गिरफ्तारी के लिए आठ टीमें लगीं हैं, जो प्रदेश और अन्य प्रदेशों के कई जिलों में दबिश दे रहीं हैं। साथ ही जो खाते मिल रहे हैं, उनके ट्रांजेक्शनों की भी जांच कराई जा रही है। यदि अपराधी विदेश में भी होंगे तो उनकी गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल की मदद ली जाएगी। उत्तराखंड और जबलपुर में कई कारपोरेट अकाउंट मिले हैं, उनकी भी छानबीन की जा रही है।
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