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कोहरे से ‘सेड़ी’ को नुकसान
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
Updated Mon, 30 Jan 2017 11:40 PM IST
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सरसों का खेत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विकास खंड तालग्राम क्षेत्र में फसलों पर कोहरे की मार के बाद पाला व पानी ने कहर बरपाया है। दोबारा शुरू हुए कोहरे ने बची मटर ,आलू, अरहर व सेमी के साथ सरसों प्रजाति की सेड़ी (सफेद सरसों) की फसल में भी आफत दिखाई दे रही है। फसलों पर माहू रोग का प्रकोप शुरू हो गया है। इससे किसानों के चेहरे की रंगत गायब है।
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किसान सतीश चंद्र, रामऔतार, राम निवास सविता का कहना है कि क्षेत्र में सैकड़ों बीघा में लोग तिलहन की खेती करते हैं। जिसमें सरसों प्रजाति की सेकेंड्री खेती भी करते हैं। किसान सफेद सरसों (सेड़ी) में तेल की मात्रा अधिक होने के कारण इसे बोते है। इधर बरसात व कोहरे के चलते इस फसल पर असर दिखने लगा है। उत्पादन प्रभावित होने की संभावना भी है। किसान रघुवीर, महेंद्र का कहना है कि इस समय फूल के साथ फलियां बन रही हैं। जिस पर माहू लगने के कारण किसान सब्जी में प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं। इसके साथ ही दाना भी कमजोर होने के कारण 45 से 50 फीसदी तेल देने वाली फसल सेड़ी से अब 25 से 28 फीसदी ही तेल निकल पाएगा।
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किसान दयाराम, राम सहाय का कहना है कि क्षेत्र में तिलहन खेती के साथ सरसों की फसल की पहले बुवाई होती है। वहीं, किसान बाद में इस फसल को बो देते है कि फसल पर पाले व कोहरे का असर न पड़े और भरपूर पैदावार मिले। अबकी बार जनवरी में ही कोहरा, पाला, पानी नने फसल को चौपट कर दिया है।
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कोट
सेड़ी फसल को पानी, पाला व कोहरे से कुछ नुकसान हुआ है। लेकिन माहू रोग की रोकथाम के लिए किसान इमिडा क्लोरपिड की 17.5 फीसदी की एक मिलीलीटर मात्रा को एक लीटर पानी में घोलकर फसलों पर छिड़काव करें। रोग से मुक्ति मिलेगी। - विनय शर्मा (कृषि प्रावधिक सहायक, अमोलर)
बहु उपयोगी है सेड़ी
फसल सुरक्षा के लिए किसान अधिकतर फसलों के चारों ओर सेड़ी की बुवाई करते हैं। इसके साथ ही कई किसान मुख्य फसल के रूप में इसकी बुवाई करते हैं। सरसों की तरह इस सेड़ी फसल में भी सफेद व बैगनी फूल के साथ फलियां आती हैं। यह कच्ची अवस्था में सब्जी के रूप में प्रयोग में लाई जाती हैं। पकने पर इसका तेल निकाला जाता है।