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पहली बार लगा शहर में कर्फ्यू
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Sat, 24 Oct 2015 12:28 AM IST
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जाना जाने वाला कन्नौज भी आखिरकार वोटबैंक की राजनीति के चक्कर में
सांप्रदायिकता की आग में झुलसने लगा है। पहली बार यहां कर्फ्यू लगा है।
वर्ष 1992 के दंगे में जब सीमावर्ती कानपुर, हरदोई, लखनऊ समेत अन्य जिलों में हिंदू-मुसलिम झगड़े हुए थे तब कन्नौज में अमनचैन की गंगा बह रही थी। झगड़ा तो दूर तब तू-तू-मैं-मैं तक नहीं हुई थी। मिल जुलकर खुशबू का व्यापार करने व एक-दूसरे के त्योहारों में मिलजुलकर रहते थे।
बीते एक दशक से इत्र नगरी को राजनीतिज्ञों की बुरी नजर लग गई। पालिका चुनाव के दौरान वोट बैंक के चक्कर में राजनीतिज्ञों ने पब्लिक को आपस में लड़ाकर सियासी रोटियां सेंकना शुरू कर दिया। तब से नेतागिरी करने वाले तो खूब फूले-फले, पर आम आदमी का जीना दूभर हो गया है।
सूत्रों की मानें तो कई दलों के नेताओं ने जनता के बीच बदले की भावना को भड़का दिया है। ईंट का जवाब पत्थर से देने की प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है, जो शहरवासियों के लिए नासूर बनती जा रही है।
वर्ष 1992 के दंगे में जब सीमावर्ती कानपुर, हरदोई, लखनऊ समेत अन्य जिलों में हिंदू-मुसलिम झगड़े हुए थे तब कन्नौज में अमनचैन की गंगा बह रही थी। झगड़ा तो दूर तब तू-तू-मैं-मैं तक नहीं हुई थी। मिल जुलकर खुशबू का व्यापार करने व एक-दूसरे के त्योहारों में मिलजुलकर रहते थे।
बीते एक दशक से इत्र नगरी को राजनीतिज्ञों की बुरी नजर लग गई। पालिका चुनाव के दौरान वोट बैंक के चक्कर में राजनीतिज्ञों ने पब्लिक को आपस में लड़ाकर सियासी रोटियां सेंकना शुरू कर दिया। तब से नेतागिरी करने वाले तो खूब फूले-फले, पर आम आदमी का जीना दूभर हो गया है।
सूत्रों की मानें तो कई दलों के नेताओं ने जनता के बीच बदले की भावना को भड़का दिया है। ईंट का जवाब पत्थर से देने की प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है, जो शहरवासियों के लिए नासूर बनती जा रही है।