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पाई-पाई को मोहताज हैं किसान
ब्यूरो/ अमर उजाला, कन्नौज
Updated Thu, 26 Mar 2015 11:47 PM IST
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पिछले दिनों ओलावृष्टि से फसल बर्बाद होने से किसान
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परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ओलावृष्टि ने उनके अरमानों पर पानी फेर
दिया है। इसके चलते कई परिवार शादी स्थगित करने को मजबूर हैं। प्रशासन
द्वारा राहत प्रदान करने को किया जा रहा सर्वे कछुआ गति से चल रहा है। इससे
क्षेत्रीय किसानों को मायूसी का सामना करना पड़ रहा है।
पुरानी ठठिया निवासी पृथ्वीराज कुशवाहा की मानें तो ओलावृष्टि से खेत में खड़ी 7 बीघा सरसों की फसल चौपट हो गई। मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रहे पृथ्वीराज को इस फसल से काफी उम्मीदें थी। पुत्र की शादी भी इसी वर्ष करने की योजना थी लेकिन ऊपर वाले को तो कुछ और ही मंजूर था। यह कहकर उनकी आंखें भर आईं।
ठठिया के खेड़ा निवासी किसान विश्वनाथ ने बताया कि दैवीय आपदा में उनकी तीन बीघा सरसों की फसल नष्ट हो गयी। परिवार पर कर्ज का बोझ और बढ़ गया है। इसे चुकाने के लिए कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अगली फसल को तैयार करने के लिए भी कर्ज नहीं मिल रहा है।
गांव मधईपुरवा निवासी किसान आछेलाल ने बताया कि पट्टे पर मिली तीन बीघा जमीन पर तैयार हो रही सरसों की फसल चौपट होने से कई सपने चकनाचूर हो गए।
सात पुत्र-पुत्रियों में बड़ी पुत्री की शादी इसी साल करने की तैयारी थी। अब इसे आगे बढ़ाना पड़ेगा। इसी गांव के किसान रामलखन की दो बीघा सरसों व तीन बीघा आलू की फसल चौपट हो गयी। उनका कहना है कि बैंक का डेढ़ लाख रूपए कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।
क्षेत्र के ग्रामपंचायत बहसुइया के मजरा लालसहायपुरवा में ओलावृष्टि से हुए नुकसान का जायजा लेने राजस्व टीम नहीं पहुंची है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
गांव निवासी बृजेश चंद्र दुबे, सतीशचंद्र कटियार सहित दर्जनों किसानों का कहना है कि उनकी फसलें ओलों से पूरी तरह बर्बाद हो गयी। सर्वे टीम आयी और कुछ ही गांवों में घूमकर चली गई।
पुरानी ठठिया निवासी पृथ्वीराज कुशवाहा की मानें तो ओलावृष्टि से खेत में खड़ी 7 बीघा सरसों की फसल चौपट हो गई। मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रहे पृथ्वीराज को इस फसल से काफी उम्मीदें थी। पुत्र की शादी भी इसी वर्ष करने की योजना थी लेकिन ऊपर वाले को तो कुछ और ही मंजूर था। यह कहकर उनकी आंखें भर आईं।
ठठिया के खेड़ा निवासी किसान विश्वनाथ ने बताया कि दैवीय आपदा में उनकी तीन बीघा सरसों की फसल नष्ट हो गयी। परिवार पर कर्ज का बोझ और बढ़ गया है। इसे चुकाने के लिए कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अगली फसल को तैयार करने के लिए भी कर्ज नहीं मिल रहा है।
गांव मधईपुरवा निवासी किसान आछेलाल ने बताया कि पट्टे पर मिली तीन बीघा जमीन पर तैयार हो रही सरसों की फसल चौपट होने से कई सपने चकनाचूर हो गए।
सात पुत्र-पुत्रियों में बड़ी पुत्री की शादी इसी साल करने की तैयारी थी। अब इसे आगे बढ़ाना पड़ेगा। इसी गांव के किसान रामलखन की दो बीघा सरसों व तीन बीघा आलू की फसल चौपट हो गयी। उनका कहना है कि बैंक का डेढ़ लाख रूपए कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।
क्षेत्र के ग्रामपंचायत बहसुइया के मजरा लालसहायपुरवा में ओलावृष्टि से हुए नुकसान का जायजा लेने राजस्व टीम नहीं पहुंची है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
गांव निवासी बृजेश चंद्र दुबे, सतीशचंद्र कटियार सहित दर्जनों किसानों का कहना है कि उनकी फसलें ओलों से पूरी तरह बर्बाद हो गयी। सर्वे टीम आयी और कुछ ही गांवों में घूमकर चली गई।