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एक्सप्रेसवे के भूअधिग्रहण में धांधली की जांच तेज

Sun, 15 Mar 2020 12:04 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2020 12:04 AM IST
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eksapresave ke bhooadhigrahan mein dhaandhalee kee jaanch tej
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण में ज्यादा मुआवजा देने के मामलों की संख्या बढ़कर 146 हो गई है। जमीन को रोड के किनारे दिखाकर अधिक मुआवजा लिया गया था। संबंधित गांवों के लेखपालों के साथ ही इन 146 किसानों को वसूली के लिए नोटिस जारी करने के बाद जांच तेज कर दी गई है।
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वर्ष 2014 में कन्नौज जिले में तिर्वा और छिबरामऊ तहसील क्षेत्र के काश्तकारों की जमीनों का अधिग्रहण आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के लिए किया गया था। लेखपालों की सांठगांठ से किसानों की जमीन का सर्किल रेट बढ़ाने के लिए उन्हें रोड के किनारे की दर्शाकर चार गुना मुआवजा दिया गया था। ऐसी शिकायत पर तिर्वा तहसील क्षेत्र के पिपरौली, बस्ता, सत्सार, भुन्ना, बलनापुर, पट्टी गांवों में फर्जीवाड़ा पाया गया।
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छिबरामऊ तहसील क्षेत्र के भीकमपुर सानी, बेहटा खास, रनवां, जलालपुर दीनपुर, बहादुरपुर मझिगवां, सिकंदरपुर सकरावा, हुसेपुर में जमीन अधिग्रहण में खेल सामने आया। इन 13 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर जांच तेज की गई है। तिर्वा में करीब डेढ़ करोड़ रुपये और छिबरामऊ में 4.36 करोड़ रुपये वसूली के लिए नोटिस जारी किए जा चुके हैं। करीब 5.86 करोड़ रुपये की वसूली 146 काश्तकारों से की जानी है। तिर्वा में सात और छिबरामऊ में नौ लेखपालों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। शनिवार को तिर्वा एसडीएम जयकरन और तहसीलदार विश्ववेशर सिंह ने भुन्ना गांव पहुंच कर मुआवजा लेने वाले काश्तकारों से पूछताछ की। भूमि का स्थलीय निरीक्षण कर राजस्व अभिलेखों में स्थिति देखी।
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नोटिस मिलने के बाद कुछ किसान पहुंचे कोर्ट
एसडीएम तिर्वा जयकरन ने बताया कि यूपीडा ने अधिक मुआवजा लेने वाले काश्तकारों को धनराशि जमा कराने का निर्देश दिया था। कुछ किसान कोर्ट चले गए। कोर्ट ने जिला प्रशासन को स्थलीय जांच कर निस्तारण के निर्देश दिए थे। एडीएम के निर्देश पर स्थलीय जांच शुरू की गई है। निरीक्षण के बाद निस्तारण के लिए रिपोर्ट एडीएम को सौंप दी जाएगी।
ईओडब्ल्यू की जांच की जानकारी नहीं
जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि शासन की ओर से उन्हें अभी तक कोई पत्र आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की जांच के संबंध में नहीं मिला है। ईओडब्ल्यू जांच कर रहा है, इसकी भी लिखित जानकारी नहीं मिली है। एक्सप्रेसवे के अधिग्रहण की पूरी कार्रवाई कानपुर के एडीएम एलए की ओर से की गई थी। इसलिए इससे संबंधित जानकारी एडीएम एलए की ओर से ही बेहतर मिल सकती है।

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक नजर
छह लेन चौड़े और 302 किमी लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की निर्माण प्रक्रिया अगस्त 2014 में शुरू हुई थी। 22 माह बाद नवंबर 2016 में इसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। फरवरी 2017 को यह आम जनता के लिए खोल दिया गया। 18 जनवरी 2018 से टोल टैक्स की वसूली शुरू हुई। इसकी कुल लागत 13200 करोड़ रुपये थी। यह आठ जिलों आगरा, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, इटावा, कन्नौज, उन्नाव, कानपुर और लखनऊ से गुजरता है।
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