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दुर्गा विराजमान मंदिर के नाम दर्ज 21 बीघा जमीन पर कब्जा
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आदमपुर कपूरापुर का प्राचीन मां दुर्गा मंदिर।
- फोटो : KANNAUJ
तालग्राम(कन्नौज)। इलाके के आदमपुर कपूरापुर गांव में प्राचीन मंदिर की 21 बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया गया। कब्जेदार इस पर खेती कर रहे हैं। यह जमीन दुर्गा विराजमान मंदिर के नाम जमींदार दिलसुखराय ने की थी। जमीन के कब्जा मुक्त न होने से भक्तोें में नाराजगी बढ़ रही है।
आदमपुर कपूरापुर में 1870 में तालग्राम के जमींदार दिलसुखराय ने मंदिर की नींव रखी थी। उन्होंने 21 बीघा जमीन मां दुर्गा के नाम दान कर दी थी। इससे होने वाली आय से मंदिर की व्यवस्था होनी थी। उनकी मृत्यु के बाद बेटे दुर्गाशंकर ने मंदिर का निर्माण पूरा कराया। दुर्गाशंकर के निधन के बाद बेटे राकेश ने इंद्रजीत को सेवादार बनाया। कब्जे से पहले मंदिर की जमीन पर होने वाली फसल से रखरखाव किया जाता था। आयोजन होते थे। वर्ष 2002 से मंदिर की जमीन से होने वाली आय बंद हो गई। तीन लोगों ने चकबंदी प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेज तैयार करा कर कब्जा कर लिया। चकबंदी में दुर्गा विराजमान मंदिर के नाम 21 बीघा जमीन दर्ज है। पहले मालगुजारी की रसीद भी कटती थी। इस समय मंदिर की पूरी जमीन पर कब्जेदार खेती कर रहे हैं। इन्हें एक से डेढ़ लाख रुपये की सालाना आमदनी हो रही है। एसडीएम गजेंद्र सिंह का कहना है कि मामले की जानकारी नहीं है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी और जनप्रतिनिधि करें कब्जा हटवाने की पहल: सेवादार
दुर्गा मंदिर के सेवादार इंद्रजीत ने बताया कि सरकार कब्जे हटवाने के लिए संवेदनशील है। कार्रवाई भी हो रही है। इसके बाद भी देवी के नाम जमीन पर सालों से लोग कब्जा कर खेती कर रहे हैं। शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। देवी के नाम जमीन से मंदिर की व्यवस्था होती थी। धन के अभाव में न कोई आयोजन हो पा रहा, न ही जीर्णोद्धार। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए पहल करनी चाहिए।
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आदमपुर कपूरापुर में 1870 में तालग्राम के जमींदार दिलसुखराय ने मंदिर की नींव रखी थी। उन्होंने 21 बीघा जमीन मां दुर्गा के नाम दान कर दी थी। इससे होने वाली आय से मंदिर की व्यवस्था होनी थी। उनकी मृत्यु के बाद बेटे दुर्गाशंकर ने मंदिर का निर्माण पूरा कराया। दुर्गाशंकर के निधन के बाद बेटे राकेश ने इंद्रजीत को सेवादार बनाया। कब्जे से पहले मंदिर की जमीन पर होने वाली फसल से रखरखाव किया जाता था। आयोजन होते थे। वर्ष 2002 से मंदिर की जमीन से होने वाली आय बंद हो गई। तीन लोगों ने चकबंदी प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेज तैयार करा कर कब्जा कर लिया। चकबंदी में दुर्गा विराजमान मंदिर के नाम 21 बीघा जमीन दर्ज है। पहले मालगुजारी की रसीद भी कटती थी। इस समय मंदिर की पूरी जमीन पर कब्जेदार खेती कर रहे हैं। इन्हें एक से डेढ़ लाख रुपये की सालाना आमदनी हो रही है। एसडीएम गजेंद्र सिंह का कहना है कि मामले की जानकारी नहीं है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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अधिकारी और जनप्रतिनिधि करें कब्जा हटवाने की पहल: सेवादार
दुर्गा मंदिर के सेवादार इंद्रजीत ने बताया कि सरकार कब्जे हटवाने के लिए संवेदनशील है। कार्रवाई भी हो रही है। इसके बाद भी देवी के नाम जमीन पर सालों से लोग कब्जा कर खेती कर रहे हैं। शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। देवी के नाम जमीन से मंदिर की व्यवस्था होती थी। धन के अभाव में न कोई आयोजन हो पा रहा, न ही जीर्णोद्धार। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए पहल करनी चाहिए।
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