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प्लेटलेट्स गिरते ही हाथ खड़े कर देते डॉक्टर, जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स अलग करने की सुविधा नहीं
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कन्नौज। जिले में डेंगू का कहर जारी है। प्लेटलेट्स गिरने से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार के लाख दावों के बाद भी ऐसी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए जिला अस्पताल में जरूरी चिकित्सकीय संसाधन तक नहीं हैं। गंभीर डेंगू मरीज को बचाने का उपाय प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन है। अस्पताल के ब्लड बैंक में कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन मशीन (सीबीसी) ही नहीं है। इससे कि ब्लड से प्लेटलेट्स अलग कर मरीज को चढ़ाई जा सकें। ऐसे में डॉक्टर के पास मरीज को रेफर करने की मजबूरी है।
जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए 45 बेड आरक्षित हैं। तेज बुखार आने पर मरीज जिला अस्पताल पहुंचता है। जिला अस्पताल में रैपिड किट से डेंगू की रैंडम (तत्काल) जांच की जाती है। इस जांच में डेंगू के लक्षण मिलने पर मरीज को भर्ती कर एलाइजा जांच (डेंगू की पुष्टि) राजकीय मेडिकल कालेज तिर्वा से कराई जाती है।
एलाइजा से पुष्टि होने पर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाना बेहद जरूरी हो जाता है। ऐसी स्थिति में यहां के डॉक्टर हाथ खड़े कर देते हैं। जिला अस्पताल में डेंगू के मरीज की प्लेटलेट्स बीस हजार से कम होने पर बिना देर किए कानपुर रेफर किया जाता है। कई बार तीमारदारों को समझाकर चिकित्सक इससे पहले भी रेफर कर देते हैं।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु का कहना है कि डेंगू मरीज के प्लेटलेट्स बीस हजार से कम होने पर रिकवरी प्रतिशत कम हो जाता है। नाक, पेशाब से खून आदि आने लगता है। ऐसे में मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। जिले में ऐसी सुविधा नहीं है। इसके लिए कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन मशीन (सीबीसी) मशीन की आवश्यकता पड़ती है। जिले में यह लगना प्रस्तावित है। तब तक के लिए रेफर करना मजबूरी भी है।
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जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए 45 बेड आरक्षित हैं। तेज बुखार आने पर मरीज जिला अस्पताल पहुंचता है। जिला अस्पताल में रैपिड किट से डेंगू की रैंडम (तत्काल) जांच की जाती है। इस जांच में डेंगू के लक्षण मिलने पर मरीज को भर्ती कर एलाइजा जांच (डेंगू की पुष्टि) राजकीय मेडिकल कालेज तिर्वा से कराई जाती है।
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एलाइजा से पुष्टि होने पर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाना बेहद जरूरी हो जाता है। ऐसी स्थिति में यहां के डॉक्टर हाथ खड़े कर देते हैं। जिला अस्पताल में डेंगू के मरीज की प्लेटलेट्स बीस हजार से कम होने पर बिना देर किए कानपुर रेफर किया जाता है। कई बार तीमारदारों को समझाकर चिकित्सक इससे पहले भी रेफर कर देते हैं।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु का कहना है कि डेंगू मरीज के प्लेटलेट्स बीस हजार से कम होने पर रिकवरी प्रतिशत कम हो जाता है। नाक, पेशाब से खून आदि आने लगता है। ऐसे में मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। जिले में ऐसी सुविधा नहीं है। इसके लिए कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन मशीन (सीबीसी) मशीन की आवश्यकता पड़ती है। जिले में यह लगना प्रस्तावित है। तब तक के लिए रेफर करना मजबूरी भी है।