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डीएम ने लगाया प्रतिबंध, खुलेआम बिक रही थाईमागुर मछली
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बाजार में बिक्री के लिए रखी थाईमागुर मछली।
- फोटो : KANNAUJ
तिर्वा(कन्नौज)। शासन की ओर से प्रतिबंधित की गई थाईमागुर मछली बाजारों में खुलेआम बिक रही है। मत्स्य विभाग चुप्पी साधे है। इस मछली को लोगों की सेहत के लिए खतरनाक घोषित किया जा चुका है। बिक्री करने वालों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
थाईमागुर मछली को खाने से कैंसर की आशंका के चलते पिछले साल शासन ने इसे प्रतिबंधित कर दिया था। सभी जिलाधिकारियों को इसकी बिक्री और पालन पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए गए थे। जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने 25 जून 2019 को मत्स्य विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर थाईमागुर मछली की बिक्री और पालन पर रोक लगाने के लिए कहा था। इसके बाद भी मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की। जिले के मछली बाजारों में थाईमागुर खुलेआम बेची जा रही है।
मत्स्य विभाग के अधिकारी सूरज कुमार शैलेश ने बताया कि डीएम ने 25 जून को आदेश दिया था। इसका पालन कराया जा रहा है। यह मछली जिस तालाब में होती, उसकी मिट्टी खाकर ऊसर में परिवर्तित कर देती है। यह मछली मांसाहारी होती है। इसे खाने से कैंसर हो सकता है। यह उड़ीसा, बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर पाई जाती है। इसका सेवन सेहत के लिए हानिकारक है। इस मछली की देसी प्रजाति भी है। इसका वजन 250 या 300 ग्राम ही हो पाता जाता है। विदेशी मछली का वजन कम समय में अधिक हो जाता है। देसी मागुर छोटी व कम वजन की होती हैं। जहां भी इनकी बिक्री हो रही, अभियान चलाकर बंद कराया जाएगा। थाईमागुर को नष्ट कराने का खर्च बेचने वाले से वसूल किया जाएगा। बेचने पर कार्रवाई भी होगी।
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थाईमागुर मछली को खाने से कैंसर की आशंका के चलते पिछले साल शासन ने इसे प्रतिबंधित कर दिया था। सभी जिलाधिकारियों को इसकी बिक्री और पालन पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए गए थे। जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने 25 जून 2019 को मत्स्य विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर थाईमागुर मछली की बिक्री और पालन पर रोक लगाने के लिए कहा था। इसके बाद भी मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की। जिले के मछली बाजारों में थाईमागुर खुलेआम बेची जा रही है।
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मत्स्य विभाग के अधिकारी सूरज कुमार शैलेश ने बताया कि डीएम ने 25 जून को आदेश दिया था। इसका पालन कराया जा रहा है। यह मछली जिस तालाब में होती, उसकी मिट्टी खाकर ऊसर में परिवर्तित कर देती है। यह मछली मांसाहारी होती है। इसे खाने से कैंसर हो सकता है। यह उड़ीसा, बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर पाई जाती है। इसका सेवन सेहत के लिए हानिकारक है। इस मछली की देसी प्रजाति भी है। इसका वजन 250 या 300 ग्राम ही हो पाता जाता है। विदेशी मछली का वजन कम समय में अधिक हो जाता है। देसी मागुर छोटी व कम वजन की होती हैं। जहां भी इनकी बिक्री हो रही, अभियान चलाकर बंद कराया जाएगा। थाईमागुर को नष्ट कराने का खर्च बेचने वाले से वसूल किया जाएगा। बेचने पर कार्रवाई भी होगी।
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