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शरद पूर्णिमा को अमृत संग फसलों पर बरसी आफत

Tue, 11 Oct 2022 12:43 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 11 Oct 2022 12:43 AM IST
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disaster on crops
फोटो:01- शहर से गुजरे बाईपास के निकट बारिश की वजह से खेतों में पलटी धान की फसल। संवाद - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। चार दिन से हो रही बारिश किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई है। इस महीने करीब 120 मिमी औसम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
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शरद पूर्णिमा की रात ही 82 मिमी पानी गिरा, जो फसलों के लिए आफत बन गया है। धान की फसल खेतों में गिर गई है।
आलू बीज भी डूब गया है। मूंगफली व मूंग की फसल को भी तगड़ा नुकसान हुआ है।
खरीफ फसलों में 19,531 हेक्टेयर रकबा में धान की फसल है।
30,430 हेक्टेयर में मक्का, 1,620 हेक्टेयर में ज्वार, 4,665 हेक्टेयर रकबा में बाजरा, 4,615 हेक्टेयर में मूंगफली, 4,461 हेक्टेयर में तिल और 1,155 हेक्टेयर में अरहर की फसल समेत कुल 66, 985 हेक्टेयर में 12 तरह की फसलों की बुआई हुई है।
रविवार को शरद पूर्णिमा के दिन और रात में जमकर बारिश हुई, जिससे खेतों में पानी भर गया है। जिन किसानों ने आलू के खेत तैयार किए हैं, उसमें पानी भरने से लागत बेकार चली गई है।
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साथ ही खेत सूखने और दोबारा तैयार करने की वजह से फसल देरी से हो सकेगी।
जिन किसानों ने आलू की गढ़ाई कर दी थी, वह भी बारिश की वजह से पानी में डूूब गई है। इससे आलू बीज सड़ने का डर है। धान की पकी फसल भी खेतों में डूब गई है।
मूूंगफली और मक्का की फसल में भी पानी भरा है। कई फसलें पलट गईं हैं, इससे नुकसान ही नुकसान है।
बारिश से फसलों को नुकसान ही नुकसान है। आलू की फसल भी लेट हो रही है। मिट्टी भी बह गई है, इससे मृदा को भी क्षति हुई है। धान की खड़ी फसल भी पानी व हवाओं की वजह से पलट गई है। मूंग व आलू आदि में भी नुकसान है।
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डॉ. वीके कनौजिया, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक
17 व 18 सितंबर को बारिश हुई थी, इस वजह से अगेती आलू की गढ़ाई कम हुई है। अब फिर पांच दिनों से बारिश हो रही है। सात से आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में अगेती आलू की फसल की जाती है।

कुल रकबा करीब 50 हजार हेक्टेयर का है। जिन किसानों ने आलू की गढ़ाई कर दी है, उसको ही नुकसान होगा। अनुमानत: 500 से 1000 हेक्टयर में ही आलू की कच्ची फसल की गढ़ाई हुई होगी।
सीपी अवस्थी, डीएचओ
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