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उतरता पानी कर रहा मायूस
अमर उजाला ब्यूरो, कन्नौज
Updated Mon, 05 Sep 2016 12:27 AM IST
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खेतों से उतर रहा गंगा नदी का पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले के कटरी क्षेत्र में गत माह आई बाढ़ ने पहले किसानों की फसलों को चौपट किया। और फिर तेजी से उतरते पानी से होने वाले कटान ने ग्रामीणों को कई रात सोने नहीं दिया। अब इस समय कटरी क्षेत्र के कई ग्रामीण खेतों में भरे पानी के न उतरने से परेशान चल रहे है। जिन खेतों से पानी उतर गया है तो दलदल की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में कई ग्रामीण पानी निकालने का रास्ता बनाने में लगे हुए हैं।
कटरी क्षेत्र के गांव तारा बांगर, कासिमपुर, अलियापुर, सलेमपुर, मेंहदीपुर, समेत करीब 24 गांवों की सैकड़ाें बीघा खाली खेत और सैकड़ों बीघा बरसाती मक्का व धनिया की फसल बाढ़ के चलते जलमग्न हो गए थे। जिससे ग्रामीणों को पहले ही काफी नुकसान हो चुका है। अब इधर इन गांवों में कई खेतों में जगह-जगह अभी भी पानी भरा हुआ है। जिसके चलते किसान फसल की बुवाई नही कर पा रहे हैं। किसान रामचंद्र का कहना है कि पानी उतरने के इंतजार करने के सिवा कर भी क्या सकते हैं। वहीं कई ग्रामीणों के खेतों से पानी उतर भी गया है तो खेत में अभी भी इतना दलदल बना हुआ है। जिससे खेतों की जुताई ही नही हो पाई है। फसल बुवाई तो दूर की बात है।
ग्रामीण योगेश ने बताया कि पहले ही उनकी बरसाती मक्का की फसल खराब हो चुकी है। ऐसे में यदि खेत का दलदल खत्म हो जाता तो उड़द और मूंग की फसल बोई जा सकती थी। वहीं कमला देवी ने बताया कि बाढ़ में उनकी धनिया की फसल पूरी तरह चौपट होने से हजारों रुपये का नुकसान हो गया था। ऐसे में यदि खेतों से समय से पानी निकल जाता तो मवेशियों के चारा ही बोया जा सकता था। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के दौरान उन्हें प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की मदद उपलब्ध नही कराई गई।
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कटरी क्षेत्र के गांव तारा बांगर, कासिमपुर, अलियापुर, सलेमपुर, मेंहदीपुर, समेत करीब 24 गांवों की सैकड़ाें बीघा खाली खेत और सैकड़ों बीघा बरसाती मक्का व धनिया की फसल बाढ़ के चलते जलमग्न हो गए थे। जिससे ग्रामीणों को पहले ही काफी नुकसान हो चुका है। अब इधर इन गांवों में कई खेतों में जगह-जगह अभी भी पानी भरा हुआ है। जिसके चलते किसान फसल की बुवाई नही कर पा रहे हैं। किसान रामचंद्र का कहना है कि पानी उतरने के इंतजार करने के सिवा कर भी क्या सकते हैं। वहीं कई ग्रामीणों के खेतों से पानी उतर भी गया है तो खेत में अभी भी इतना दलदल बना हुआ है। जिससे खेतों की जुताई ही नही हो पाई है। फसल बुवाई तो दूर की बात है।
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ग्रामीण योगेश ने बताया कि पहले ही उनकी बरसाती मक्का की फसल खराब हो चुकी है। ऐसे में यदि खेत का दलदल खत्म हो जाता तो उड़द और मूंग की फसल बोई जा सकती थी। वहीं कमला देवी ने बताया कि बाढ़ में उनकी धनिया की फसल पूरी तरह चौपट होने से हजारों रुपये का नुकसान हो गया था। ऐसे में यदि खेतों से समय से पानी निकल जाता तो मवेशियों के चारा ही बोया जा सकता था। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के दौरान उन्हें प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की मदद उपलब्ध नही कराई गई।
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