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गांव नहीं पहुंचा शहीद का शव
Sat, 06 Apr 2019 11:57 PM IST
प्रतीक दुबे
kannauj
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Published by: प्रतीक दुबे
Updated Sat, 06 Apr 2019 11:57 PM IST
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शहीद के परिजनों को सांत्वना देते पूर्व सीएम अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
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कन्नौज। कश्मीर घाटी में सर्च आपरेशन के दौरान पाकिस्तान सेना की गोली लगने से शहीद हुए जिले के लाल पंकज के गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। परिवारीजन समेत पूरा गांव शव आने के इंतजार में है। इसी बीच शहीद के घर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने परिजनों को सांत्वना दी।
जिला मुख्यालय से सटे गांव गंगधरापुर निवासी पंकज दुबे (20) पुत्र शांति स्वरूप दुबे भारतीय सेना में रेडियो आपरेटर के पद पर तैनात थे। जम्मू कश्मीर के तंगधार में सर्च आपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर हुई गोलीबारी में सिर में गोली लग गई थी। चार अप्रैल को पंकज ने इलाज के दौरान ऊधमपुर में दम तोड़ दिया। पंकज के शहीद होने से परिजनों का हाल बेहाल है। शनिवार को पत्नी डिंपल यादव के नामांकन के बाद पूर्व सीएम अखिलेश यादव पंकज के घर पहुंचे। उन्होंने पंकज के दिव्यांग पिता शांति स्वरूप और दिव्यांग भाई जवाहर लाल को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि पंकज की शहादत को पूरा देश याद रखेगा। पंकज के परिवार को उनकी ओर से हर संभव मदद की जाएगी। प्रदेश सरकार से एक करोड़ रुपये और शहीद परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी देने की मांग की। आचार संहिता के कारण परिवार को कोई मदद न कर पाने पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा, चुनाव के बाद परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। वहीं शहीद के भाई रामू दुबे ने बताया कि शनिवार को ऊधमपुर से दिल्ली पंकज का शव लाया गया है। शनिवार देर रात तक पंकज का शव गांव पहुंचने की आर्मी के अधिकारियों ने जानकारी दी है।
वंदेमातरम सेवा संस्थान ने दी श्रद्धांजलि
हिंदू नववर्ष पर वंदेमातरम सेवा संस्थान की ओर से शहर में निकलने वाली बाइक रैली इस बार नहीं निकाली गई। शहीद पंकज दुबे के सम्मान में इस बार वंदेमातरम सेवा संस्थान ने बाइक रैली न निकालने का फैसल लिया। नगर पालिका कन्नौज के चेयरमैन शैलेंद्र अग्निहोत्री ने वंदेमातरम सेवा संस्थान के पदाधिकारियों के साथ शहीद के गांव पहुंच कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मोहन अग्निहोत्री, नंदन पाठक, अनूप दुबे, शिव दुबे, अमन, अनमोल मौजूद रहे।
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जिला मुख्यालय से सटे गांव गंगधरापुर निवासी पंकज दुबे (20) पुत्र शांति स्वरूप दुबे भारतीय सेना में रेडियो आपरेटर के पद पर तैनात थे। जम्मू कश्मीर के तंगधार में सर्च आपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर हुई गोलीबारी में सिर में गोली लग गई थी। चार अप्रैल को पंकज ने इलाज के दौरान ऊधमपुर में दम तोड़ दिया। पंकज के शहीद होने से परिजनों का हाल बेहाल है। शनिवार को पत्नी डिंपल यादव के नामांकन के बाद पूर्व सीएम अखिलेश यादव पंकज के घर पहुंचे। उन्होंने पंकज के दिव्यांग पिता शांति स्वरूप और दिव्यांग भाई जवाहर लाल को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि पंकज की शहादत को पूरा देश याद रखेगा। पंकज के परिवार को उनकी ओर से हर संभव मदद की जाएगी। प्रदेश सरकार से एक करोड़ रुपये और शहीद परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी देने की मांग की। आचार संहिता के कारण परिवार को कोई मदद न कर पाने पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा, चुनाव के बाद परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। वहीं शहीद के भाई रामू दुबे ने बताया कि शनिवार को ऊधमपुर से दिल्ली पंकज का शव लाया गया है। शनिवार देर रात तक पंकज का शव गांव पहुंचने की आर्मी के अधिकारियों ने जानकारी दी है।
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वंदेमातरम सेवा संस्थान ने दी श्रद्धांजलि
हिंदू नववर्ष पर वंदेमातरम सेवा संस्थान की ओर से शहर में निकलने वाली बाइक रैली इस बार नहीं निकाली गई। शहीद पंकज दुबे के सम्मान में इस बार वंदेमातरम सेवा संस्थान ने बाइक रैली न निकालने का फैसल लिया। नगर पालिका कन्नौज के चेयरमैन शैलेंद्र अग्निहोत्री ने वंदेमातरम सेवा संस्थान के पदाधिकारियों के साथ शहीद के गांव पहुंच कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मोहन अग्निहोत्री, नंदन पाठक, अनूप दुबे, शिव दुबे, अमन, अनमोल मौजूद रहे।
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