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छिबरामऊ महोत्सव के मंच से दिया संगीत संदेश
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छिबरामऊ। छिबरामऊ महोत्सव के वर्चुअल मंच पर बुधवार को नगर के संगीतज्ञों के बीच संगीत पर चर्चा हुई। इसके बाद स्थानीय कवि सम्मेलन में कवियों ने सभी का मन मोह लिया।
युवा गायक हर्षदीप के संचालन में हुई गोष्ठी में गणेश त्रिपाठी ने कहा कि नगर में संगीत कला केंद्र होना चाहिए। गायक रमई दुबे ने कहा कि संगीत साधना है। इसे करने के लिए ईमानदारी से तप करना होगा। लकी पॉल ने संगीत की बारीकियों पर प्रकाश डाला। नासिर अल्वी ने कहा कि आज सुरों के रियाज से ज्यादा गायक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से आवाज को सुधारने पर ज्यादा जोर देते हैं। यह चिंतनीय है।
कार्यक्रम के अंत में गणेश त्रिपाठी ने कसमें वादे, प्यार, वफा, लकी पॉल ने आ लेकर चलें तुझे एक ऐसे जहां पर, रमई दुबे ने मेरी आवाज ही मेरी पहचान है, हर्षदीप ने आओ सजा लें आज को, कल का पता नहीं, गीत सुनाया। अंत में सभी ने एक स्वर में रुक जाना नहीं थक हार के, ओ राही, ओ राही, गाकर नगर को एकता का संदेश दिया।
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वहीं स्थानीय कवि गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन हुआ। वरिष्ठ कवि ओमप्रकाश शुक्ल अज्ञात, मदन वर्मा फलक, शंभूदयाल मौर्य, कृष्णगोपाल पंकज, रामप्रकाश अग्निहोत्री, सुधीर मिश्रा ने रचनाएं सुनाईं। मेरठ के मदारी रॉक बैंड ने पुराने गानों को नए रूप में ऑनलाइन प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं। लीड सिंगर मुदित त्रिवेदी, ड्रमर गोहर, गिटारिस्ट नकुल, शुभम ने प्रस्तुति दी।
विदेशों में अपनी मिट्टी की खुशबू को किया याद
सातवें छिबरामऊ महोत्सव के वर्चुअल स्वरूप की आवाज नगर के साथ-साथ विश्व के अलग-अलग देशों में पहुंच गई। संजीव चौहान और अमित भूषण तिवारी के संचालन में हुए वतन की खुशबू कार्यक्रम में अप्रवासी भारतीयों ने अपने विचार साझा किए। आस्ट्रेलिया से सरजीत उर्फ काके ने नगर के क्रिकेट मैदान और अपने साथियों को याद करते हुए कहा कि अब वह नगर का टैलेंट देख पाएंगे। जर्मनी से नूपुर मिश्रा ने खुशी जाहिर की कि छिबरामऊ हाईटेक हो रहा है। अमेरिका से विवेक गुप्ता ने नगर के युवाओं से कहा कि हिम्मत व हौसले से देश, दुनिया मुट्ठी में की जा सकती है। इंग्लैंड से विकल्प दुबे ने कहा कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से नगर से बराबर जुड़े रहते हैं। विदेश में भारतीय संस्कृति के अनुसार काम करते हैं। उन्होंने अपनी बेटी का ओम जय जगदीश गाते हुए वीडियो भेजा। हांगकांग से विवेक भारतीय ने नगर की गलियों और यहां के अध्यापकों को याद किया। दक्षिण अफ्रीका से तन्ना दुबे ने कलियां मुस्कुराएंगी, हम मुस्कुराएंगे कविता से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महोत्सव के इस स्वरूप से वह प्रफुल्लित हैं।
आज होगा महोत्सव का समापन
सातवें छिबरामऊ महोत्सव के पहले वर्चुअल स्वरूप की सफलता से उत्साहित संस्थापक गौरव त्रिपाठी अमर ने बताया कि नगरवासियों की व्यापक सहभागिता के चलते महोत्सव का समापन अब नव वर्ष की पूर्व संध्या पर होगा। 31 दिसंबर की रात नृत्य व गायन के प्रतिभागी कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। विजेताओं को पुरस्कार दिए जाएंगे।
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युवा गायक हर्षदीप के संचालन में हुई गोष्ठी में गणेश त्रिपाठी ने कहा कि नगर में संगीत कला केंद्र होना चाहिए। गायक रमई दुबे ने कहा कि संगीत साधना है। इसे करने के लिए ईमानदारी से तप करना होगा। लकी पॉल ने संगीत की बारीकियों पर प्रकाश डाला। नासिर अल्वी ने कहा कि आज सुरों के रियाज से ज्यादा गायक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से आवाज को सुधारने पर ज्यादा जोर देते हैं। यह चिंतनीय है।
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कार्यक्रम के अंत में गणेश त्रिपाठी ने कसमें वादे, प्यार, वफा, लकी पॉल ने आ लेकर चलें तुझे एक ऐसे जहां पर, रमई दुबे ने मेरी आवाज ही मेरी पहचान है, हर्षदीप ने आओ सजा लें आज को, कल का पता नहीं, गीत सुनाया। अंत में सभी ने एक स्वर में रुक जाना नहीं थक हार के, ओ राही, ओ राही, गाकर नगर को एकता का संदेश दिया।
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वहीं स्थानीय कवि गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन हुआ। वरिष्ठ कवि ओमप्रकाश शुक्ल अज्ञात, मदन वर्मा फलक, शंभूदयाल मौर्य, कृष्णगोपाल पंकज, रामप्रकाश अग्निहोत्री, सुधीर मिश्रा ने रचनाएं सुनाईं। मेरठ के मदारी रॉक बैंड ने पुराने गानों को नए रूप में ऑनलाइन प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं। लीड सिंगर मुदित त्रिवेदी, ड्रमर गोहर, गिटारिस्ट नकुल, शुभम ने प्रस्तुति दी।
विदेशों में अपनी मिट्टी की खुशबू को किया याद
सातवें छिबरामऊ महोत्सव के वर्चुअल स्वरूप की आवाज नगर के साथ-साथ विश्व के अलग-अलग देशों में पहुंच गई। संजीव चौहान और अमित भूषण तिवारी के संचालन में हुए वतन की खुशबू कार्यक्रम में अप्रवासी भारतीयों ने अपने विचार साझा किए। आस्ट्रेलिया से सरजीत उर्फ काके ने नगर के क्रिकेट मैदान और अपने साथियों को याद करते हुए कहा कि अब वह नगर का टैलेंट देख पाएंगे। जर्मनी से नूपुर मिश्रा ने खुशी जाहिर की कि छिबरामऊ हाईटेक हो रहा है। अमेरिका से विवेक गुप्ता ने नगर के युवाओं से कहा कि हिम्मत व हौसले से देश, दुनिया मुट्ठी में की जा सकती है। इंग्लैंड से विकल्प दुबे ने कहा कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से नगर से बराबर जुड़े रहते हैं। विदेश में भारतीय संस्कृति के अनुसार काम करते हैं। उन्होंने अपनी बेटी का ओम जय जगदीश गाते हुए वीडियो भेजा। हांगकांग से विवेक भारतीय ने नगर की गलियों और यहां के अध्यापकों को याद किया। दक्षिण अफ्रीका से तन्ना दुबे ने कलियां मुस्कुराएंगी, हम मुस्कुराएंगे कविता से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महोत्सव के इस स्वरूप से वह प्रफुल्लित हैं।
आज होगा महोत्सव का समापन
सातवें छिबरामऊ महोत्सव के पहले वर्चुअल स्वरूप की सफलता से उत्साहित संस्थापक गौरव त्रिपाठी अमर ने बताया कि नगरवासियों की व्यापक सहभागिता के चलते महोत्सव का समापन अब नव वर्ष की पूर्व संध्या पर होगा। 31 दिसंबर की रात नृत्य व गायन के प्रतिभागी कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। विजेताओं को पुरस्कार दिए जाएंगे।