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हत्या में एक को आजीवन कारावास
अमर उजाला/कन्नौज
Updated Thu, 01 Sep 2016 12:12 AM IST
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एडीजे चतुर्थ न्यायाधीश दिवाकार प्रसाद चतुर्वेदी ने हत्या के करीब नौ वर्ष पुराने मामले में बुधवार को एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 20 हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी के द्वारा जुर्माना नहीं भरा जाता है, तो उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास काटनी होगी।
शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार यादव ने बताया कि गुरसहायगंज के सुल्तान आलम नगर निवासी वादी चांदबाबू पुत्र रशीद अली ने 14 अक्तूबर 2007 को थाना में लिखाई रिपोर्ट में बताया कि वह अपने घर में बैठा हुआ था। तभी मोहल्ले के चुन्ने खां पुत्र लियाकत अली हाथों में तमंचा लेकर उनके घर के सामने आए और अभद्रता करने लगे। उन्होंने जब विरोध किया तो चुन्ने खां मारपीट करने लगा। इसी दौरान उसकी बहन राजिया, मां अकबरी और पिता रशीद अली उसे बचाने के लिए घर से बाहर निकल आए।
इसी बीच चुन्ने खां ने उसके सीने पर गोली मार दी। और उसकी मां, बहन व पिता के साथ मारपीट भी की। मोहल्ला वालों को देखकर आरोपी भाग निकला। आनन-फानन में उसे गुरसहायगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। वहां से उसे कानपुर हैलट रेफर कर दिया गया। जहां से उसे रामा अस्पताल में ट्रांसफ र किया गया। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार यादव ने बताया कि वादी ने चुन्ने खां, अनवार खां, नन्हे और पतन्ना पुत्रगण लिायकत अली के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
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विवेचना कर रहे तत्कालीन एसआई भगवंत मान सिंह ने चुन्ने खां के अलावा तीन नाम निकालकर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान लिखाई गई रिपोर्ट के आधार पर बाकी के तीन को भी कोर्ट में तलब कर लिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान चुन्ने खां को आईपीसी धारा 302 का दोषी पाया। इसमें न्यायाधीश दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी ने चुन्ने खां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं साक्ष्यों के अभाव में बाकी के तीन आरोपियों को बरी कर दिया।
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शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार यादव ने बताया कि गुरसहायगंज के सुल्तान आलम नगर निवासी वादी चांदबाबू पुत्र रशीद अली ने 14 अक्तूबर 2007 को थाना में लिखाई रिपोर्ट में बताया कि वह अपने घर में बैठा हुआ था। तभी मोहल्ले के चुन्ने खां पुत्र लियाकत अली हाथों में तमंचा लेकर उनके घर के सामने आए और अभद्रता करने लगे। उन्होंने जब विरोध किया तो चुन्ने खां मारपीट करने लगा। इसी दौरान उसकी बहन राजिया, मां अकबरी और पिता रशीद अली उसे बचाने के लिए घर से बाहर निकल आए।
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इसी बीच चुन्ने खां ने उसके सीने पर गोली मार दी। और उसकी मां, बहन व पिता के साथ मारपीट भी की। मोहल्ला वालों को देखकर आरोपी भाग निकला। आनन-फानन में उसे गुरसहायगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। वहां से उसे कानपुर हैलट रेफर कर दिया गया। जहां से उसे रामा अस्पताल में ट्रांसफ र किया गया। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार यादव ने बताया कि वादी ने चुन्ने खां, अनवार खां, नन्हे और पतन्ना पुत्रगण लिायकत अली के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
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विवेचना कर रहे तत्कालीन एसआई भगवंत मान सिंह ने चुन्ने खां के अलावा तीन नाम निकालकर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान लिखाई गई रिपोर्ट के आधार पर बाकी के तीन को भी कोर्ट में तलब कर लिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान चुन्ने खां को आईपीसी धारा 302 का दोषी पाया। इसमें न्यायाधीश दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी ने चुन्ने खां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं साक्ष्यों के अभाव में बाकी के तीन आरोपियों को बरी कर दिया।