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पीड़ित को इलाज का खर्च देने का आदेश, अपराधियों को परिवीक्षा काल में छोड़ा
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कन्नौज। मारपीट के मामले में एससी-एसटी कोर्ट विशेष न्यायाधीश सतेंद्र कुमार ने शुक्रवार को पीड़ित को 12 हजार रुपये देने का आदेश दिया। वहीं अपराधियों के एक ही परिवार से होने और बच्चों के पालन-पोषण का कोई जरिया न होने पर परिवीक्षा काल पर छोड़ने का आदेश दिया। तीनों अपराधी छह माह तक परिवीक्षा पर रहेंगे। इस दौरान लगातार जिला परिवीक्षा अधिकारी को रिपोर्ट करेंगे।
सहायक शासकीय अधिवक्ता तरुण चंद्रा ने बताया कि सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव मलिकापुर निवासी नरेश दोहरे ने कोतवाली में दी तहरीर में बताया कि पांच सितंबर 2014 को वह गांव से जा रहा था। तभी गांव के ही कल्लू पुत्र शिव सिंह उर्फ शेर सिंह यादव, रम्मी व पंपू पुत्रगण मुंशीलाल यादव निवासी मलिकापुर पुरानी रंजिश को लेकर गाली-गलौज करने लगे। मना किया तो उसके साथ मारपीट की। इससे उसे काफी चोटें आईं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचक तत्कालीन एसआई रामप्यारे ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तीनाें आरोपियों को दोषी पाया। लेकिन अपराधियों की ओर से दलील दी गई कि वह एक ही परिवार के हैं। उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं। वह तीनों ही बच्चों व परिवार के पोषण का एकमात्र सहारा हैं। अपराधियों ने कोर्ट को बताया कि इस मामले के अतिरिक्तउन पर अन्य कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। इस पर कोर्ट ने तीनों अपराधियों को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर परिवीक्षा काल में छोड़ने का आदेश दिया। इसके अलावा तीनों अपराधियों को पंद्रह दिन के अंदर कोर्ट में चार-चार हजार रुपये जुर्माने के रूप में भरने का आदेश दिया, जो पीड़ित पक्ष नरेश दोहरे को दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि परिवीक्षा काल में वह जिला परिवीक्षा अधिकारी को नियमित रिपोर्ट करेंगे। इसके अलावा इस दौरान इन पर कोई मामला दर्ज होता है या वह किसी आपराधिक गतिविधि में लिप्त पाए जाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता तरुण चंद्रा ने बताया कि सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव मलिकापुर निवासी नरेश दोहरे ने कोतवाली में दी तहरीर में बताया कि पांच सितंबर 2014 को वह गांव से जा रहा था। तभी गांव के ही कल्लू पुत्र शिव सिंह उर्फ शेर सिंह यादव, रम्मी व पंपू पुत्रगण मुंशीलाल यादव निवासी मलिकापुर पुरानी रंजिश को लेकर गाली-गलौज करने लगे। मना किया तो उसके साथ मारपीट की। इससे उसे काफी चोटें आईं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचक तत्कालीन एसआई रामप्यारे ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तीनाें आरोपियों को दोषी पाया। लेकिन अपराधियों की ओर से दलील दी गई कि वह एक ही परिवार के हैं। उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं। वह तीनों ही बच्चों व परिवार के पोषण का एकमात्र सहारा हैं। अपराधियों ने कोर्ट को बताया कि इस मामले के अतिरिक्तउन पर अन्य कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। इस पर कोर्ट ने तीनों अपराधियों को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर परिवीक्षा काल में छोड़ने का आदेश दिया। इसके अलावा तीनों अपराधियों को पंद्रह दिन के अंदर कोर्ट में चार-चार हजार रुपये जुर्माने के रूप में भरने का आदेश दिया, जो पीड़ित पक्ष नरेश दोहरे को दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि परिवीक्षा काल में वह जिला परिवीक्षा अधिकारी को नियमित रिपोर्ट करेंगे। इसके अलावा इस दौरान इन पर कोई मामला दर्ज होता है या वह किसी आपराधिक गतिविधि में लिप्त पाए जाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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